भारत के पड़ोसी जिन्ना के देश का सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर आपरेशन सिंदूर में भारत से जबरदस्त मार खाने के बाद से ही बौखनाए बयान दे रहा है। इस बीच दो बार अमेरिका हो आए फील्ड मार्शल को संभवत: वहां से शह मिलने के कारण उसके बयानों में लगातार उग्रता देखने में आई है। पहले उसने सिंधु के पानी को लेकर परमाणु युद्ध और उसमें आधी दुनिया को खत्म करने की धमकी दी, फिर भारत पर अनर्गल आरोप लगाए। ताजा घटनाक्रम में जिन्ना के देश के सेना प्रमुख की ब्रूसेल्स में एक पाकिस्तानी पत्रकार से की गई बातचीत और उसमें भारत पर प्रॉक्सी वॉर या छद्म युद्ध करने की झूठे आरोप चर्चा में हैं।
जिन्न के देश के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने आरोप लगाया है कि भारत अफगानिस्तान के तालिबान के माध्यम से पाकिस्तान के विरुद्ध छद्म युद्ध छेड़े हुए है। मुनीर के ऐसा कहने के पीछे संभवत: तालिबान का पाकिस्तान के कहे को न मानना है। वही पाकिस्तान जिसकी सक्रिय मदद से उसने बंदूक के बल पर काबुल की सत्ता हथियाई है। पाकिस्तान ने ही अफगानिस्तान में चुनी हुई सरकार को अपदस्थ करके वहां तालिबान का राज कायम कराने में अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई के माध्यम से हस्तक्षेप किया हुआ था।
पाकिस्तान के उर्दू दैनिक जंग में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर ने दावा किया कि भारत अफगान तालिबान के साथ मिलकर पाकिस्तान को अस्थिर करने की साजिश रच रहा है। उसने कहा कि पाकिस्तान ने वर्षों तक अफगानों की मदद की, लेकिन अब वही अफगानी भारत के प्रभाव में आकर पाकिस्तान के खिलाफ खड़े हो रहे हैं।
स्तंभकार सुहैल वराइच द्वारा लिखी यह रिपोर्ट आगे बताती है कि मुनीर ने तालिबान को चेतावनी दी है कि यदि वे भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान में अस्थिरता फैलाते हैं, तो पाकिस्तान ‘खून की हर बूंद का बदला लेगा’।

जैसा पहले बताया, पाकिस्तान ने लंबे समय तक अफगानिस्तान में तालिबान को समर्थन दिया था, विशेषकर 1990 के दशक में और अमेरिका के खिलाफ युद्ध के दौरान आईएसआई ने तालिबान लड़ाकों को पूरा रणनीतिक और सैन्य मदद दी थी। लेकिन अब दूसरी बार, साल 2021 में अगस्त महीने में तालिबान की काबुल की सत्ता में वापसी के बाद पाकिस्तान को अपेक्षित रणनीतिक लाभ नहीं मिला है। तालिबान ने पाकिस्तान की कई मांगों को नजरअंदाज किया, जैसे कि टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के खिलाफ कार्रवाई करने की उसकी हर बढ़त को तालिबान ने ठुकराया है।
ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत ने अफगानिस्तान में विकास परियोजनाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमेशा से मदद की है, आर्थिक निवेश किया है, जिससे भारत की वहां एक सकारात्मक छवि दिखती है और पाकिस्तान को यह बात सदा से खटकती आ रही है। पाकिस्तान को यह डर सताता रहा है कि भारत की अफगानिस्तान में बढ़ती उपस्थिति उसके रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
भारत पर मुनीर के छद्म युद्ध के आरोप को कई नजरियों से देखा जा सकता है। जैसे, पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं से जूझ रहा है। ऐसे में भारत पर आरोप लगाकर संभवत: वहां की सर्वशक्तिमान सेना आंतरिक असंतोष से ध्यान हटाना चाहती है। दूसरे, मुनीर का बयान तालिबान को चेतावनी देने के लिए भी हो सकता है कि वे भारत के साथ किसी भी प्रकार की निकटता से बचें। तीसरे, ब्रूसेल्स जैसे स्थान पर यह बयान देना बताता है कि पाकिस्तान वैश्विक समुदाय को यह संदेश देना चाहता है कि वह आतंकवाद का शिकार है, न कि उसका समर्थक।
भारत ने इस प्रकार के अनर्गल आरोपों पर आमतौर पर संयमित प्रतिक्रिया ही दी है। भारत की नीति अफगानिस्तान में स्थायित्व और विकास को बढ़ावा देने की रही है। भारत जानता है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख ऐसे आरोपों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें वे हर बार नाकाम रहे हैं।
मुनीर के बोल अफगान तालिबान को हर बार चिढ़ाते और उकसाते प्रतीत हुए हैं, जबकि तालिबान भारत के साथ संबंधों को पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा मोल दे रहा है। ऐसे में अगर पाकिस्तान तालिबान के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की कोशिश करता है, तो हो सकता है पाकिस्तान अफगानिस्तान सीमा फिर से सुलग उठे।
ध्यान रखने की बात यह भी है कि जिन्ना के देश का फील्ड मार्शल आपरेशन सिंदूर की चोट से छटपटाया हुआ है। इसलिए विशेषज्ञों के अनुसार, मुनीर का भारत पर छद्म युद्ध का आरोप एक बहुस्तरीय रणनीतिक बयान हो सकता है, जिसके प्रति भारत में कोई धुंधलका नहीं होना चाहिए। मुनीर इस कोशिश में हो सकता है कि भारत में अपने छुपे पैंतरों में तेजी लाए और भारत पर आरोप की आड़ में कोई शैतानी सैन्य गतिविधि करे। बेशक, भारत को इस बयान को गंभीरता से लेते हुए अपनी कूटनीतिक और सुरक्षा रणनीति को मजबूत बनाए रखना होगा।

















