विभाजन – विभीषिका : बर्तन तक नहीं ला पाए थे, चुन्नी के पल्लु में आटा गूंथती थी दादी
Panchjanya Special, True Stories of Partition, Hindus atrocities in Partition, India Pakistan Partition Stories, Vibhajan Vibhishika, विभाजन-विभीषिका, भारत पाक बंटवारे की कहानी, कुन्दनलाल गुलाटी, स्यालकोट, हिन्दू धर्म,
— राकेश सैन
India Pakistan Partition : विभाजन से पूर्व हमारा परिवार स्यालकोट जिले की डस्कां तहसील के एक गांव में रहता था। मैंने एम.डी.एच. मसालों वाली कम्पनी के संस्थापक महाशय धर्मपाल गुलाटी जी के बारे में पढ़ा था कि वे भी यहीं के निवासी थे।
घर के आगे ऐग नामक नदी थी जो सुख व दुख दोनों का कारण बनती। दादा श्री मुकन्द लाल गुलाटी पंसारी व किराने की दुकान चलाते थे। परिवार भरापूर और खुशहाल था, लेकिन विभाजन के दौरान परिवार को नजर लग गई।
उन दिनों हिन्दू परिवार के बड़े या किसी एक बच्चे के केशधारी होने का रिवाज था, दादाजी ने मेरे पिता जी श्री कुन्दन लाल गुलाटी को सिख बनाया था। दंगाई मुसलमान सिखों को शुद्ध हिन्दू मानते और पहले हमला उन्हीं पर करते थे। इसी कारण दादाजी ने पिताजी को जम्मू में उनकी बुआजी के पास भेज दिया।
सुरक्षा की दृष्टि से उनके केशों की लड़कियों जैसी चोटियाँ बनाई गईं और लड़की का वेश धारण कर उन्हें जम्मू भेजा गया। उन दिनों संचार के माध्यम इतने नहीं थे। पिता जी भी जम्मू चले तो गए लेकिन वहां अकेले ही छत पर बैठे रोते थे और परिवार को याद करते रहते थे।
इधर गांव में मुसलमानों ने हमले शुरू कर दिए। गांव का चौधरी भी मुसलमान था, उसने गांव के पांच-सात हिन्दू परिवारों को एक बड़े घर में बंधक बनाया और एक सप्ताह के भीतर इस्लाम कबूलने का समय दिया। उस इलाके में संत बाबा पूरनदास जी का बड़ा सम्मान व रसूख था, उन्हें इन बंधक हिन्दुओं का पता चला तो उन्होंने किसी न किसी तरह संदेश पहुंचाया कि वे इस्लाम न कबूलें और चौधरी से समय लेते रहें। कुछ दिनों बाद संत जी भारतीय सैनिकों के साथ ट्रक लेकर आए और इन हिन्दू परिवारों को मुक्त करवा कर भारत ले आए। हमारा परिवार मात्र तीन सौ रुपए लेकर जालंधर आ गया। बाकी सब वहीं छूट गया।
जालंधर में आकर संघर्षपूर्ण जीवन शुरू हुआ। आटा गूंथने तक के लिए बर्तन नहीं थे तो दादी अपनी चुन्नी के एक पल्लू में आटा गूंथती थीं। इसके बाद रोटी पकाई जाती थी। धीरे-धीरे दिन बदले, परन्तु कोई जब भी दादी श्रीमती केसरा देवी से पूछता था कि वो पाकिस्तान से क्या बचा कर लाईं तो वो उत्तर देती थीं कि मैं वहां से हिन्दू धर्म, इज्जत व जीता-जागता परिवार बचा कर लाई हूं, ये ही मेरी सबसे बड़ी दौलत है।
– कुन्दनलाल गुलाटी, मूल स्थान: स्यालकोट
















