हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर नूंह के फिरोजपुर झिरका में मंगलवार को एक घटना को मजहबी रंग दे दिया गया। घटना मुड़ाका गांव की है। इसरा ने सड़क पर गलत ढंग से गाड़ी खड़ी की और जब उसे इसे हटाने के लिए कहा गया तो नाराज हो गया। उसने समय सिंह के सिर पर बोतल से हमला किया। विवाद ने थोड़ी देर में और हिंसक रूप ले लिया।
गांव के सरपंच रामसिंह सैनी के मुताबिक उनके गांव की ओर जाने वाली सड़क पर दूसरे गांव के रहने वाले युवक इसरा ने अपनी गाड़ी खड़ी की हुई थी। रास्ते से गुजर रहे समय सिंह ने गाड़ी हटाने के लिये कहा। इसी दौरान उनके बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि इसरा ने कार में रखी कांच की बोतल समय सिंह के सिर पर मार दी। उसने समय के भाई पर भी फावड़े से हमला किया। इस पर दोनों पक्षों के लोग जुट गए और मामला बढ़ता चला गया। छतों से पथराव शुरू हो गया, कांच की बोतलें फेंकी गईं और माहौल तनावपूर्ण हो गया। भीड़ ने एक बाइक को आग के हवाले कर दिया और कई दुकानों में आग लगा दी। चुन्नीलाल, गोपाल, लेखराज, वीर सिंह, फूलचंद, हंसराज, खुर्शीद, फरहान व शहबाज इस विवाद में गंभीर रूप से घायल हुए।
विवाद को मजहबी रंग देने का प्रयास
सरपंच रामसिंह ने बताया कि भीड़ ने जानबूझकर इस झगड़े को हिंदू-मुस्लिम रंग देने का प्रयास किया। इन लोगों ने रामसिंह के ऊपर भी पथराव किया और दुकानों में आग लगा दी। समय पर पुलिस नहीं पहुंचती तो हालात और बिगड़ जाते। बताया जा रहा है कि अलवर – हरियाणा बॉर्डर पर स्थित एक मात्र हिन्दू गांव की यह घटना है। यहां मुख्यतः सैनी समाज के लोग रहते हैं।
इन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान लुकमान (32), जुबैर (37), उमरदीन (35), शकरूल्ला खान (40) और रुस्तम (37) के रूप में हुई है। ये राजस्थान के अलवर के रहने वाले हैं। फरार आरोपियों की पहचान और उनकी तलाश की जा रही है।
नूंह में अब कैसे हैं हालात
नूंह के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने घटना के बारे में मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुड़ाका गांव में समय रहते स्थिति सामान्य कर दी गई थी। वहां अब शांति है। कुछ लोग इसे सामुदायिक दंगे के रूप में देख रहे हैं, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ भी नहीं है।

















