कृष्ण जन्माष्टमी, भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में उल्लास और भक्ति के साथ मनाई जाती है। मथुरा और वृंदावन इस पर्व के प्रमुख केंद्र हैं, जहां जन्माष्टमी की धूम देखते ही बनती है। लेकिन अगर आप कुछ नया अनुभव करना चाहते हैं या इन पारंपरिक स्थलों से हटकर कहीं और इस पर्व को मनाने की योजना बना रहे हैं, तो भारत में कई अन्य स्थान हैं जो इस अवसर पर विशेष रंग में रंगे होते हैं। यहां हम आपको मथुरा-वृंदावन के अलावा कुछ प्रमुख स्थलों के बारे में बताएंगे जहां कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है।
द्वारका, गुजरात- भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद द्वारका को अपनी राजधानी बनाया था। इस कारण यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। जन्माष्टमी के दिन द्वारकाधीश मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है। रात्रि 12 बजे ‘मंगल आरती’ होती है और भगवान कृष्ण का झूला झुलाया जाता है। यहां की संगीतमय भजन संध्याएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशाल झांकियां इस पर्व को यादगार बना देती हैं।
उज्जैन, मध्य प्रदेश- उज्जैन का श्रीकृष्ण मंदिर (जिसे गोपाल मंदिर भी कहा जाता है) जन्माष्टमी पर विशेष आयोजनों का केंद्र बनता है। यहां पूरे दिन भजन-कीर्तन, धार्मिक कथाएं और रात को विशेष ‘महा अभिषेक’ का आयोजन होता है। उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत इस पर्व को और भी भावपूर्ण बना देती है।
पूरी, ओडिशा- पूरी को जगन्नाथ जी की नगरी कहा जाता है, लेकिन यहां भी कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। जगन्नाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं। रात्रि जागरण, भजन और विशेष प्रसाद वितरण की व्यवस्था इस दिन को भक्तिमय बना देती है।
मुंबई, महाराष्ट्र- मुंबई में जन्माष्टमी का रंग कुछ अलग ही होता है। यहां ‘दही-हांडी’ प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है, जिसमें गोविंदाओं की टोलियां पिरामिड बनाकर ऊंची जगह पर टंगी हांडी फोड़ती हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव बन गया है। मुंबई के बड़े-बड़े मैदानों और सड़कों पर लाखों की भीड़ इसे देखने उमड़ती है।
जयपुर, राजस्थान- जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देव जी मंदिर में जन्माष्टमी पर विशेष झांकियों, भजन संध्या और रंग-बिरंगे झूलों का आयोजन होता है। यहां की राजस्थानी संस्कृति में रचा-बसा यह पर्व, स्थानीय लोगों के लिए आस्था और आनंद दोनों का स्रोत होता है।
इस्कॉन मंदिर- भारत के हर बड़े शहर में इस्कॉन (ISKCON) के मंदिर मौजूद हैं जो कृष्ण भक्ति के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। जन्माष्टमी पर इस्कॉन मंदिरों में दिनभर कथा, नृत्य, संगीत और आध्यात्मिक प्रवचन होते हैं। रात को विशेष महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ रासलीला का आयोजन होता है। दिल्ली, बैंगलोर, पुणे, कोलकाता, और चेन्नई जैसे शहरों में इस्कॉन मंदिर जन्माष्टमी पर हजारों भक्तों को आकर्षित करते हैं।

















