लोकसभा में नया आयकर विधेयक, 2025 पारित हो गया है और यह 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। यह विधेयक आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा और इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस संशोधित विधेयक में करदाताओं को कई लाभ मिलेंगे।
नए आयकर विधेयक 2025 की मुख्य विशेषताएं
नया विधेयक कर कानूनों को सरल और स्पष्ट बनाने पर केंद्रित है। इसमें 800 से अधिक धाराओं के बजाय 23 अध्यायों में 536 धाराएं होंगी, जो इसे कहीं अधिक कॉम्पैक्ट बनाता है।
डिजिटल और फेसलेस प्रक्रियाएं
यह विधेयक प्रक्रियाओं को डिजिटल-प्रथम और फेसलेस बनाता है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। कर अधिकारियों को कोई भी कार्रवाई करने से पहले करदाताओं को पूर्व सूचना भी देनी होगी।
करदाताओं के लिए राहत
- वार्षिक कर छूट – ₹12 लाख की वार्षिक कर छूट सीमा को बरकरार रखा गया है।
- टीडीएस रिफंड – अब समय सीमा के बाद भी बिना किसी जुर्माने के टीडीएस रिफंड का दावा किया जा सकता है।
- शून्य-टीडीएस प्रमाणपत्र- जिन करदाताओं पर कोई कर देयता नहीं है, उन्हें शून्य-टीडीएस प्रमाणपत्र मिल सकेगा।
कटौतियों में सरलता
- गृह संपत्ति की आय- नगरपालिका करों में कटौती के बाद 30% की मानक कटौती की अनुमति है। किराए पर दी गई संपत्तियों के लिए निर्माण-पूर्व ब्याज को भी 5 साल में घटाया जा सकता है।
- पेंशन: एलआईसी पेंशन फंड या एनपीएस जैसी योजनाओं से मिलने वाली एकमुश्त पेंशन राशि पर पूरी तरह से कर छूट मिलेगी।
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
धार्मिक ट्रस्ट: सामाजिक सेवा में शामिल न होने वाले धार्मिक ट्रस्टों को मिलने वाले गुमनाम दान पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
सीबीडीटी का अधिकार: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को डिजिटल युग के लिए नए नियम बनाने का अधिकार दिया गया है।
कराधान विधियां (संशोधन) विधेयक, 2025
यह विधेयक भी नए आयकर विधेयक के साथ पारित किया गया है। इसके तहत, एकीकृत पेंशन योजना (UPS) के ग्राहकों को NPS के समान कर छूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब के सार्वजनिक निवेश कोष और उसकी सहायक कंपनियों को भी कर राहत का प्रावधान है। आयकर खोज मामलों में ब्लॉक मूल्यांकन के नियमों को भी सरल बनाया गया है।
ये बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे, जिससे करदाताओं के लिए प्रक्रियाएं और अधिक सरल और पारदर्शी बन जाएंगी।

















