जम्मू-कश्मीर पुलिस और राज्य की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने मंगलवार (12 अगस्त) को श्रीनगर में यासीन मलिक के आवास समेत नौ अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। यह छापेमारी 1990 में कश्मीरी पंडित महिला सरला भट्ट के अपहरण, गैंगरेप और हत्या मामले से जुड़ी है। फिलहाल, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का पूर्व प्रमुख यासीन मलिक कई आतंकी मामलों में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई लिबरेशन फ्रंट के 9 पूर्व कमांडरों के घरों पर की गई है, जिसमें यासीन मलिक का घर भी शामिल है। आतंकियों ने सरला भट्ट का अपहरण किया, कई दिनों तक उसके साथ गैंगरेप किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। यही नहीं उन्होंने उसके शव गोलियों से छलनी कर श्रीनगर की सड़क पर फेंक दिया था।
90 के दशक के आतंकी मामलों को फिर से खोला गया
केंद्र सरकार के निर्देश पर 90 के दशक के पुराने आतंकी मामलों को फिर से खोला गया है, जिसमें सरला भट्ट केस भी दोबारा जांच के दायरे में आ गया। उस समय के कई गवाहों और पुलिस केस डायरी में इस बात का उल्लेख है कि सरला भट्ट के अपहरण और हत्या में JKLF से जुड़े लोग शामिल थे। उस वक्त यासीन मलिक JKLF के शीर्ष नेतृत्व में था। हालांकि यासीन मलिक इस समय तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसे वर्ष 2017 में दर्ज टेरर फंडिंग केस में NIA की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था। ऐसे में सरला भट्ट केस की जांच के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
कौन थीं सरला भट्ट
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले की रहने वाली सरला भट्ट (27) कश्मीर पंडित थीं। वह श्रीनगर के सौरा इलाके में शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान (SKIMS) में नर्स के रूप में काम करती थीं। 18 अप्रैल 1990 को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकियों ने उसी हॉस्टल से उनको अगवा कर लिया था। हैवानियत और बर्बरता की सारी हदों को पार करने के बाद भी जब इन जिहादियों का मन नहीं भरा तो उन्होंने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया। अगले दिन 19 अप्रैल को मालबाग इलाके में नर्स का गोलियों से छलनी शव सड़क पर मिला था। बताया जाता है कि यह हत्या उस बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थी, जिसके तहत कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं को घाटी से बाहर भगाना था। आतंकियों द्वारा उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसियों का एजेंट कहकर निशाना बनाया गया था।
कश्मीर हिंदुओं का नरसंहार
बता दें कि सरला भट्ट मामले की जांच ने एक बार फिर कश्मीर हिंदुओं के जख्मों को ताजा कर दिया है। 1990 के दशक में घाटी में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार से आज सारी दुनिया वाकिफ है। उस वक्त आतंकियों के जुल्मों से तंग आकर घाटी से हजारों की संख्या में कश्मीरी हिंदुओं को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था। आतंकियों ने हिंदुओं की बहन-बेटियों के साथ दरिदंगी की सभी हदें पार की। सैंकड़ों निर्दोष मासूम लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। 3 दशक बाद भी उस मंजर को याद करके कलेजा सिहर उठता है।

















