भारत की जनसंख्या को लेकर विश्व बैंक ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए दावा किया है कि भारत में पिछले कुछ सालों में जन्म दरों में तेजी से गिरावट आई है। हालात ये हो गए हैं कि देश की जन्मदर ‘हम दो,हमारे दो’ की नीति से भी नीचे चली गई है। वैश्विक संस्था के अनुसार भारत की जन्मदर 2.1 प्रतिशत होनी चाहिए थी, लेकिन ये उससे भी नीचे गिरते हुए 1.98 पर पहुंच गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये हाल केवल भारत का नहीं है, बल्कि चीन, जापान, रूस, दक्षिण कोरिया और इटली जैसे देशों के भी यही हाल हैं। कहा जा रहा है कि इन देशों में रिप्लेसमेंट लेवल बहुत अधिक घट गया है। आंकड़ों की मानें तो सबसे बुरा हाल दक्षिण कोरिया का है, जहां जन्म दर 0.72 पर सिमट गई है। सामान्य अर्थों में अगर इसे समझा जाय तो एक कपल एक बच्चा भी पैदा नहीं कर पा रहा है। जबकि, में जापान में जन्मदर 1.2 है, चीन में ये आंकड़ा 1 है, फ्रांस में 1.66 है, अमेरिका की बात करें तो वहां यह दर 1.62 है। वहीं पूरब का मोती कहे जाने वाले सिंगापुर में जन्मदर 0.97 प्रतिशत है। अगर पूरे विश्व की बात करें तो ये औसत 2.2 है। हालांकि, विश्व बैंक ने ये दावे 2023 के आंकड़ों के आधार पर किए हैं।
देशों पर बूढ़ों का बढ़ा बोझ
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में चेताया है कि जन्मदर घटने से कई देशों में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है। इसका एक असर ये भी हो रहा है कि बाजार पर लोड बढ़ रहा है और श्रम शक्ति कम हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ वर्षों में देशों पर इसका असर भी देखने को मिलेगा।
भारत में एकल परिवार का चलन बड़ा
दावा किया जा रहा है कि भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में भी एकल परिवार का चलन बढ़ा है। देश में ऐसे परिवारों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिनकी एक ही संतान है, अथवा वे बच्चे ही पैदा नहीं करना चाहते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि इसके पीछे की एक वजह ये भी है कि लोग अब तेजी से औद्योगीकरण की तरफ बढ़ रहे हैं। लोग गांवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। शहरी जीवन में रहना-खाना, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही जीवन शैली में भी बदलाव हो रहा है। इससे खर्च बढ़ गए हैं। इसलिए लोग कम बच्चे पैदा कर रहे हैं।
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कई देशों में जन्मदर बढ़ाने के लिए हो रहे उपाय
घटती जन्म दर से कई देश परेशान हैं। इससे निपटने के लिए ये देश लोगों को सरकारी नौकरी तक ऑफर कर रहे हैं। चीन, जापान और रूस ऐसा कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया में तो अलग से इसके लिए मंत्रालय तक बना दिया गया है।
















