भारत इस वर्ष 15 अगस्त 2025 को अपना 79 वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। यह दिन हर भारतीय के लिए गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है। इस दिन हम सभी पूरे सम्मान और गर्व के साथ अपने राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं। हमारा तिरंगा झंडा केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत की आजादी की लंबी लड़ाई, लाखों बलिदानों, और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है। तिरंगे के तीनों रंग और अशोक चक्र, सबका अपना खास मतलब होता है।
भारत का पहला गैर-सरकारी झंडा 7 अगस्त 1906 को कोलकाता के पारसी बागान चौक (अब ग्रीन पार्क) में फहराया गया था। इसे स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता ने बनाया था। उस झंडे में तीन रंग थे- हरा, पीला, और लाल। इसके बाद सन् 1917 में, जब होम रूल आंदोलन चल रहा था, तब एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने एक नया झंडा फहराया। इसमें लाल और हरे रंग की चार पट्टियाँ, सप्तऋषि तारों के आकार में सात सितारे, एक तरफ यूनियन जैक और दूसरी तरफ अर्धचंद्र और तारा थे। सन् 1921 में जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया, तब एक ऐसे झंडे की जरूरत महसूस हुई जो देश की एकता और आजादी का प्रतीक हो। आंध्र प्रदेश के पिंगली वेंकैया ने कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में यह झंडा पेश किया। इस झंडे में लाल और हरे रंग की दो पट्टियाँ थीं, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मानी गईं। झंडे के बीच में एक चरखा बना था, जो स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। सन् 1931 में झंडे में कुछ बदलाव किए गए ताकि यह सबके लिए स्वीकार्य बन सके। अब इसमें तीन रंग जोड़े गए- केसरिया (ऊपर), सफेद (बीच में), और हरा (नीचे)। बीच में चरखे को भी रखा गया। यही झंडा बाद में हमारे राष्ट्रीय ध्वज का आधार बना।
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स्वतंत्र भारत का ध्वज (1947)- जब भारत को आजादी मिली, तब 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इस झंडे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। इस झंडे में चरखे की जगह अब अशोक चक्र को रखा गया, जो सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया था। इस चक्र में 24 तीलियाँ होती हैं, जो निरंतर गति और न्याय का प्रतीक हैं।
तिरंगे के रंगों और चक्र का अर्थ- केसरिया रंग (ऊपर): यह रंग साहस, शक्ति, और बलिदान का प्रतीक है। सफेद रंग (बीच में): यह रंग शांति, सच्चाई, और ईमानदारी को दर्शाता है। हरा रंग (नीचे): यह रंग हरियाली, समृद्धि, और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है। अशोक चक्र)- यह जीवन की निरंतर गति, न्याय और कर्तव्य पथ का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए, कभी रुकना नहीं चाहिए।











