उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से हिन्दू युवती को इस्लामिक कन्वर्जन के लिए मजूबर किया गया। जिले की 12वीं कक्षा की एक छात्रा के भाई ने पुलिस में शिकायत की। मुस्लिम सहेलियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। आरोप था कि वे लड़कियाँ उसे बुर्का पहनाने और मीट खाने के लिए मजबूर कर रही थीं। घटना दिसंबर 2025 की है। आरोपी लड़कियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर FIR रद्द करने की मांग की। उनकी मांग को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला
शिकायतकर्ता के मुताबिक, अलीना और शाबिया समेत पाँच मुस्लिम लड़कियों ने ट्यूशन क्लास में पढ़ने वाली अपनी क्लासमेट को बार-बार इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करती थीं। पीड़ित की शिकायत में बताया है कि मुस्लिम लड़कियों ने उसे (हिन्दू युवती) एक बार जबरन बुर्का पहना दिया और साथ ही नॉन-वेज खाने का ग्रेवी खिलाने की कोशिश की। जब वह मना करती तो वे उसे मनाने की कोशिश करतीं। भाई ने कहा कि ये सब उसके सामने भी हुआ और बहन डर के मारे चुप थी।
धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत केस दर्ज
इसके आधार पर मुरादाबाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश धर्मांतरण विरोधी कानून 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत FIR दर्ज की गई है। FIR में पाँच लड़कियों के नाम शामिल थे, जिनमें अलीना और शाबिया मुख्य आरोपी बताई गईं। दोनों मुख्य आरोपी अब बालिग हैं, बाकी तीन नाबालिग बताई जा रही हैं।
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आरोपियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की और FIR रद्द करने की माँग की। उनका कहना था कि यह मामला झूठा है, बदले की भावना से बनाया गया है और उनकी पढ़ाई-लिखाई पर असर पड़ रहा है। 12वीं की बोर्ड परीक्षा नजदीक होने के कारण उन्होंने राहत माँगी। एक बेंच ने पहले शाबिया को अस्थायी राहत दी थी, लेकिन बाद में मामला दो जजों की बेंच के सामने आया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों की याचिका की खारिज
16 अप्रैल 2026 को जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि जांच में CCTV फुटेज और अन्य सबूत मिले हैं, जिनमें लड़की को बुर्का पहनाते हुए दिखाया गया है। इसलिए FIR रद्द करने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने 11 पन्नों के फैसले में लिखा कि युवाओं में दूसरों पर अपना धर्म थोपने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। जजों ने कहा कि ऐसे मामलों की शुरुआत में ही रोकना जरूरी है, वरना कानून का मकसद खत्म हो जाएगा। उन्होंने युवाओं को पढ़ाई और समाज सेवा पर ध्यान देने की सलाह दी। कोर्ट ने साफ किया कि UP धर्मांतरण कानून 2021 का मकसद ही ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाना है। शाबिया को दी गई राहत भी वापस ले ली गई।
बहरहाल, पुलिस इस मामले की आगे जांच कर रही है। आरोपी लड़कियों का कहना है कि यह पूरा मामला गलतफहमी या झूठ पर आधारित है, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल FIR को बरकरार रखा है।

















