महाराष्ट्र में नासिक स्थित टीसीएस की ब्रांच से कार्पोरेट जिहाद की घटना के सामने आने के बाद अब एक-एक करके अलग-अलग संस्थाओं के पीड़ित सामने आ रहे हैं। साथ ही वो अपने साथ हो रहे इस्लामिक अत्याचारों की गवाही दे रहे हैं। इसी क्रम में नागपुर स्थित एक गैर सरकारी संगठन (NGO) के अध्यक्ष रियाज फाजिल काजी को हिन्दू महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और उन पर इस्लामिक कन्वर्जन के लिए दबाव डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर-पश्चिम नागपुर में स्थित यह एनजीओ 2010 से चल रहा है। यह मंकापुर इलाके में झुग्गी-झोपड़ियों में गरीब बच्चों को पढ़ाने व स्वास्थ्य शिविर लगाने जैसे सामाजिक कार्य करता था। इसी की आड़ में इसका प्रेसिडेंट रियाज फाजिल काजी इस तरह के काम करता था। इस मामले में शनिवार रात करीब 10 बजे मंकापुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई। इसके तुरंत बाद पुलिस ने रियाज फाजिल काजी को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य शिकायतकर्ता 23 साल की एक महिला है, जो सितंबर 2023 से एनजीओ में एडमिनिस्ट्रेशन और एचआर हेड के पद पर काम कर रही थी।
क्या है आरोप?
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि 18 जुलाई 2024 को उसका जन्मदिन था। ऑफिस में सेलिब्रेशन के बाद दोपहर करीब 1 बजे काजी ने उसे अपने केबिन में बुलाया। वहां उसने जबरन गले लगाया, माथे पर किस किया और कहा, “आज मैं तुम्हें छोड़ना नहीं चाहता।” महिला डर के मारे कुछ बोल नहीं पाई क्योंकि नौकरी जाने का डर था। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके बाद कई बार उसने गले लगाने की कोशिश की, एक बार तो सीसीटीवी कैमरा बंद करके भी उसने ऐसा किया। जब महिला ने विरोध किया तो काजी का व्यवहार रूखा हो गया। वह उसके बारे में दूसरों से जानकारी भी जुटाता था।
बनाता था कन्वर्जन का दबाव
शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि उसकी बड़ी बहन नवंबर 2025 में इसी एनजीओ में असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर जुड़ी थी। काजी ने उसे भी जबरन कलमा पढ़ने को मजबूर किया। साथ ही बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया। इसी के चलते उसकी बहन ने मात्र दो माह में ही एनजीओ की नौकरी को छोड़ दिया था। इसी तरह एक 24 साल की शिक्षिका भी 2024 में एनजीओ में काम कर रही थी। उसने भी काजी के व्यवहार से तंग आकर छोड़ दिया। आरोप है कि वह घूरता था और इस्लाम थोपने की कोशिश करता था।
इसे भी पढ़ें: लव जिहाद के लिए अजीज पठान बना राहुल, छात्रा से दुष्कर्म, धर्म परिवर्तन का आरोप
विरोध पर धंधेवाली कहा
पीड़िता का आरोप है कि 13 अप्रैल को काजी ने एक पूर्व कर्मचारी की मां को फोन करके शिकायतकर्ता, उसकी बहन और उनके दोस्तों को “कॉल गर्ल” और “प्रॉस्टिट्यूट” कहा। बोला कि वे “नाइट एक्टिविटी” में शामिल हैं और उनसे दूर रहने की सलाह दी। 17 अप्रैल को ऐसी ही बातचीत की रिकॉर्डिंग सहकर्मियों में साझा हुई। काजी पर यह भी आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता और अपने नाम के हिस्से मिलाकर एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था। उससे वह महिला स्टाफ और वॉलंटियर की गतिविधियां मॉनिटर करता था। 18 अप्रैल को पीड़ित महिलाओं का एक छोटा ग्रुप एनजीओ ऑफिस गया, लेकिन ऑफिस बंद मिला। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
कई धाराओं में केस दर्ज
इस मामले में शिकायत मिलते ही पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें सेक्शन 74 (महिला की इज्जत से छेड़छाड़), 75(2), 78(2), 296 (अश्लील हरकतें), 302(1) (धार्मिक भावनाएं आहत करना), 356(2) (बदनामी) शामिल हैं। साथ ही आईटी एक्ट की सेक्शन 66-बी भी लगाई गई है। मंकापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर हर्ष कालसेकर ने बताया कि रविवार को काजी को कोर्ट में पेश किया गया।
कोर्ट ने 23 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया एक्टिविटी और ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच कर रही है। स्टाफ और परिवार के सदस्यों के बयान भी लिए जाएंगे।अब तक तीन महिलाएं आगे आई हैं। पुलिस कह रही है कि और भी महिलाएं बयान दे सकती हैं। राज्य की एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने भी एनजीओ की पृष्ठभूमि, फाइनेंशियल ट्रेल और उसके असली मकसद की जांच शुरू कर दी है।















