श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। यह पर्व पूरे भारत में बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, रात के समय और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए हर साल इसी तिथि को लोग श्रीकृष्ण का जन्मदिन “जन्माष्टमी” के रूप में मनाते हैं।
श्रीकृष्ण जन्म का महत्व- भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु जी का आठवां अवतार माना जाता है। उन्होंने अन्याय, अधर्म और पाप का नाश कर धर्म की स्थापना की थी। उनका जन्म कारागार में हुआ था, और जन्म लेते ही उन्होंने अपने माता-पिता (देवकी और वासुदेव) को विश्वास दिलाया कि वे संसार में अधर्म को समाप्त करने आए हैं। इस साल अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 11:49 बजे शुरू होकर 16 अगस्त की रात 9:24 बजे तक रहेगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त की सुबह 4:38 बजे शुरू होगा। इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक साथ नहीं पड़ने के कारण लोग यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि जन्माष्टमी 15 अगस्त को मनाएं या 16 अगस्त को।
जन्माष्टमी कब है- शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी की मध्यरात्रि में हुआ था। जिस दिन रात 12 बजे अष्टमी तिथि होती है, उसी दिन व्रत और पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। इस बार 16 अगस्त की रात को अष्टमी तिथि रहेगी, इसलिए 16 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी मनाना उचित होगा। हालाँकि, कुछ परंपराओं में 15 अगस्त को भी विशेष माना जा रहा है, इसलिए आप अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार 15 या 16 अगस्त को यह पर्व मना सकते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा रात के समय की जाती है, खासकर मध्यरात्रि में। इस दिन व्रत रखा जाता है और रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। एक साफ जगह पर बाल गोपाल (छोटे कृष्ण जी की मूर्ति) को पालने में विराजमान करें। झांकी को फूलों, रंग-बिरंगी लाइट्स, और कपड़ों से सजाएं। बाल गोपाल को दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बने पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं। बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं। फूलों से उनका शृंगार करें, मोर मुकुट, बांसुरी आदि अर्पित करें। भगवान को उनके प्रिय भोग चढ़ाएं, जैसे- माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और पंचामृत। भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें, जैसे- “ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥” रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म का समय मानकर मंगल आरती करें। भजन-कीर्तन करें और भगवान का जन्म उत्सव मनाएं। पूजा और आरती के बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलें।

















