5 अगस्त 2025 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ। गांव में राहत और बचाव कार्य के लिए सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमें लगातार काम कर रही हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी के मुरादाबाद से पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने कहा कि उत्तरकाशी और हिमाचल में आई आपदाएं धार्मिक स्थलों पर बुल्डोजर चलाने का नतीजा हैं। उनके इस बयान से विवाद शुरू हो गया है।
उनके इस बयान पर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। दरअसल, डॉ. हसन ने अपने बयान में कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में “दूसरे धर्म के लोगों के धार्मिक स्थलों का कोई सम्मान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘किसी भी धार्मिक स्थल पर बुलडोज़र नहीं चलना चाहिए। इस संसार को चलाने वाली कोई और शक्ति है, और जब उसका न्याय होता है, तो मनुष्य स्वयं को कहीं से भी नहीं बचा सकता। उनका इशारा यह था कि हालिया प्राकृतिक आपदाएं, धार्मिक स्थलों पर की गई कथित बुल्डोजर कार्रवाइयों का परिणाम हैं।
डॉ. एस.टी. हसन के हालिया बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “प्राकृतिक आपदाएं पूरी मानवता के लिए पीड़ादायक होती हैं। ऐसे समय में समाजवादी पार्टी के नेता का बयान घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। प्राकृतिक आपदा को भी धार्मिक दृष्टिकोण से देखना अत्यंत शर्मनाक है। सपा ऐसे नेताओं को दंडित करने के बजाय प्रोत्साहित करती है।”
राकेश त्रिपाठी ने आगे कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियाँ न केवल पीड़ितों की भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि समाज में अनावश्यक धार्मिक तनाव भी उत्पन्न कर सकती हैं। यह पहला अवसर नहीं है जब डॉ. एस.टी. हसन ने बुल्डोज़र कार्रवाई पर आपत्ति जताई हो। सितंबर 2024 में जब सुप्रीम कोर्ट ने बुल्डोजर कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया था, तब उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा था, “बुल्डोजर की कार्रवाई अधिकतर मुसलमानों के खिलाफ की जा रही थी। यह एक लोकतांत्रिक देश है, यहाँ राजशाही नहीं चल सकती।”
















