जिहादियों की ‘प्रयोगशाला’ पूर्णिया में हिंदुओं को भरमाने और डराने के कई प्रयोग हो रहे हैं। इन दिनों एक विशेष प्रयोग सामने आया है। इसमें हिंदू धर्मग्रंथ भगवत गीता के नाम पर कुरान और बाइबिल का प्रचार किया जा रहा है। पुस्तक का नाम, ‘गीता तेरा ज्ञान अमृत’ है। लेकिन कहीं भी गीता की सर्वोच्चता को नहीं बताया गया है। इसमें कई आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। पुस्तक के पेज नंबर 7 पर हजरत मुहम्मद को भगवान शिव, जबकि भगवान विष्णु को ईसा बताया गया है।
पेज नंबर 53 पर लिखा है- श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में व्रत करना या रखना मना किया गया है। लिखा गया है कि हे अर्जुन यह योग (भक्ति) न तो अधिक खाने वाले का और न ही बिल्कुल न खाने वालों का अर्थात यह भक्ति न ही व्रत रखने वाले, न ही अधिक सोने वाले की, न अधिक जागने वाले की सफल होती है। इस श्लोक में व्रत रखना पूर्ण रूप से मना किया गया है।
पेज 187, 188 और 189 में हिन्दू धर्म में वर्णित देवी देवताओं की पूजा, पितृ पूजा (श्राद्ध), भूत पूजा (अस्थि पूजा), फूल उठाना, पिण्ड भरवाना इत्यादि करना मना किया है। किताब में तीर्थ स्थानों पर जाना, मां काली की पूजा, निधन के बाद अंतिम संस्कार, बच्चे के जन्म पर उत्सव जैसे कई कृत्यों को करने से मना किया गया है, जो हिंदू परंपराओं की आस्था और रीति-रिवाजों का खंडन करते हैं।
इसे मानने वाले लोगों को मन्द बुद्धि तक कहा गया है। इस तरह की पूजा करने वाले लोग जन्म-मरण में ही रहेंगे, मोक्ष तक नहीं मिल सकेगा। पूजा को भूतों की पूजा बताया गया है। पितरों को पूजने वाले पितरों के समीप जाएंगे और भूतों को पूजने वाले अर्थात पिंडदान करने वाले भूत बन जाएंगे।
इसी प्रकार की एक और पुस्तक बेची जा रही है। उस पुस्तक का नाम ‘ज्ञान गंगा’ है। इस पुस्तक में पूजा-पाठ, देवी-देवता को त्याग कर कुरान का गुणगान करने के बारे में लिखा गया है।
पेज 53 पर बाइबिल और कुरान का बखान किया गया है। उसकी आयतें लिखी गई हैं। इनमें सृष्टि रचना में इन दो धर्मग्रंथों को श्रेष्ठ बताया गया है। मूर्ति पूजा का विरोध करते हुए हजरत मुहम्मद के दिखाए रास्ते पर चलते हुए खुदा को मानने को कहा गया है। देवी-देवता और पूजा-पाठ त्याग कर कुरान का गुणगान करने को कहा गया है।
इसी पेज पर लिखा है कि ‘हजरत मुहम्मद का खुदा कह रहा है कि हे पैगम्बर ! आप काफिरों, जो खुदा की भक्ति त्याग कर अन्य देवी-देवताओं और मूर्ति पूजा करते हैं। इनका कहा मत मानना। हजरत मुहम्मद जी जिसे अपना प्रभु मानते हैं, वह अल्लाह किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है। ऐ पैगम्बर ! उस कबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था। वह कभी मरने वाला नहीं है, अविनाशी है। उसकी पाकी का गुणगान किए जा।
पेज 83 पर उर्दू के लफ्ज लिखे हैं। इस बात का जिक्र है कि पूजने योग्य सिर्फ अल्लाह ही हैं। लिखा गया है कि कोई बंदा ऐसा नहीं कि ‘लाइला-ह-इल्लल्लाहह’ कहे और उसके लिए आसमानों के दरवाजे न खुलें।
यह पुस्तक पूर्णिया शहर के प्रसिद्ध पंचमुखी हनुमान मंदिर के आगे कुछ लोग बेच रहे थे। वे इसे 200 रुपए की पुस्तक बताकर 20 रुपए में बेच रहे थे। इस पुस्तक के लेखक विवादित रामपाल हैं।

















