यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि उनके देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में यूक्रेनी सैनिकों को न सिर्फ रूसी सेना से, बल्कि रूस की ओर से लड़ रहे विदेशी भाड़े के सैनिकों से भी लड़ना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इन विदेशी लड़ाकों में चीन, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और अफ्रीका के कुछ देशों के लोग शामिल हैं।
यह बयान उन्होंने यूक्रेन के खार्किव क्षेत्र के एक फ्रंटलाइन (सीमा के पास के युद्ध क्षेत्र) का दौरा करने के बाद दिया। वहाँ उन्होंने 57वीं सेपरेट मोटराइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड के सैनिकों और कमांडरों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने युद्ध की वर्तमान स्थिति, खासकर ववचान्स्क शहर की सुरक्षा को लेकर बातचीत की। सैनिकों ने राष्ट्रपति को जानकारी दी कि इस क्षेत्र में लड़ाई में विदेशी लड़ाके भी शामिल हैं जो रूस की तरफ से युद्ध लड़ रहे हैं। इसके बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए यह बात सार्वजनिक की। उन्होंने लिखा कि यूक्रेनी सेना इन विदेशी लड़ाकों से भी मुकाबला कर रही है और देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
Today, I was with those defending our country in the Vovchansk direction – the warriors of the 17th Separate Motorized Infantry Battalion of the 57th Brigade named after Kish Otaman Kost Hordiienko.
We spoke with commanders about the frontline situation, the defense of… pic.twitter.com/40XsGHZU0T
— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) August 4, 2025
रूस को चेतावनी- राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनका देश इस तरह की हरकतों का कड़ा जवाब देगा। उन्होंने कहा कि विदेशी लड़ाकों को यूक्रेन की धरती पर लड़ते देखना, एक बहुत ही गंभीर मामला है। यह पहली बार नहीं है जब जेलेंस्की ने रूस पर विदेशी लड़ाके भेजने का आरोप लगाया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि रूस ने 100 से ज्यादा चीनी नागरिकों को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में भेजा है। उन्होंने दावा किया था कि दो चीनी लड़ाके डोनेट्स्क क्षेत्र में पकड़े गए हैं और उनका एक वीडियो भी सामने आया था। हालाँकि, चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। चीन का कहना है कि वह अपने नागरिकों को किसी भी प्रकार के युद्ध में हिस्सा लेने से रोकता है और यूक्रेन युद्ध में चीन का कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा खबरें हैं कि उत्तर कोरिया ने भी रूस के कुर्स्क क्षेत्र में हजारों सैनिक भेजे हैं। इससे यह साफ होता है कि रूस को कुछ देशों का समर्थन मिल रहा है, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष।
रूस की चुप्पी- इस पूरे मामले पर रूस ने अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, जब समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के दूतावासों से इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की, तो कोई भी देश इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दे पाया।
कौन हैं ये विदेशी भाड़े के सैनिक- यूक्रेनी सेना और खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ये विदेशी लड़ाके रूस की निजी मिलिशिया कंपनियों जैसे वैगनर ग्रुप, या रूस के रक्षा मंत्रालय की नई इकाइयों के तहत काम करते हैं। ये समूह आर्थिक रूप से कमजोर या राजनीतिक रूप से अस्थिर देशों से भाड़े के सैनिकों को भर्ती करते हैं। इन लड़ाकों को पैसा देकर युद्ध में भेजा जाता है। खासकर अफ्रीका और एशिया के देशों से ऐसे सैनिकों की भर्ती होती है क्योंकि वहाँ लोग आर्थिक समस्याओं के कारण ऐसे खतरनाक काम करने को मजबूर हो जाते हैं। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं, जैसे पकड़े गए कागज और जानकारी, जो दिखाते हैं कि इस युद्ध में विदेशी लोग भी लड़ रहे हैं।











