ऐसा प्रतीत होता है कि राजनीतिक पार्टियों ने सनातन धर्म को बदनाम करने का प्रण ले रखा है। वे इसे फैशन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को खत्म करने की बकवास के बाद अब महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने सनातन धर्म को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया है। 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी सात आरोपियों के बरी होने के बाद आव्हाड ने सनातन धर्म को “भारत को बर्बाद करने वाला” और इसकी विचारधारा को “विकृत” बताया। उनके इस बयान पर बीजेपी और शिवसेना ने कड़ा विरोध जताया है।
आव्हाड ने क्या कहा?
जितेंद्र आव्हाड, जो ठाणे के मुंब्रा-कलवा से चार बार के विधायक हैं, ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “सनातन धर्म ने भारत को बर्बाद कर दिया। ऐसा कोई धर्म कभी था ही नहीं। हम हिंदू धर्म के अनुयायी हैं।” उन्होंने दावा किया कि सनातन धर्म ने ऐतिहासिक रूप से कई महान हस्तियों के साथ अन्याय किया। उनके मुताबिक, छत्रपति शिवाजी महाराज को सनातन धर्म की वजह से राज्याभिषेक से वंचित रखा गया और छत्रपति संभाजी महाराज को बदनाम किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने ज्योतिराव फुले पर हमले, सावित्रीबाई फुले पर अपमान और डॉ. बी.आर. अंबेडकर को पानी पीने और पढ़ाई से रोकने जैसे मामलों को भी सनातन धर्म से जोड़ा। आव्हाड ने यह भी कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर ने सनातन धर्म के खिलाफ खड़े होकर मनुस्मृति को जलाया और इसकी “दमनकारी परंपराओं” को खारिज किया।
बीजेपी और शिवसेना का पलटवार
आव्हाड के बयान पर बीजेपी और शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि सनातन धर्म भारत की सुंदरता और सत्य का प्रतीक है, और आव्हाड का बयान इसे अपमानित करने वाला है। उन्होंने शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले से पूछा कि क्या यह एनसीपी-एसपी की आधिकारिक राय है या सिर्फ आव्हाड का निजी विचार। शिवसेना नेता शाइना एनसी ने आव्हाड की टिप्पणी को “अशिक्षित” बताया और कहा कि यह बयान जातिगत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार को बढ़ावा देता है। बीजेपी नेता राम कदम ने भी आव्हाड पर “अधूरी जानकारी” के आधार पर सनातन धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया।
आव्हाड का विवादों से पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब जितेंद्र आव्हाड विवादों में घिरे हैं। जनवरी 2024 में उन्होंने भगवान राम को मांसाहारी और बहुजन समुदाय से होने का दावा किया था, जिस पर भी खूब बवाल हुआ। इसके अलावा, 2023 में उन्होंने राम नवमी और हनुमान जयंती जैसे त्योहारों को दंगों से जोड़ा था। 61 साल के आव्हाड, जो ओबीसी समुदाय से आते हैं और सामाजिक-धार्मिक आंदोलनों में डॉक्टरेट हैं, शरद पवार के करीबी माने जाते हैं।
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मालेगांव केस से जुड़ा विवाद
आव्हाड का यह बयान मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद आया, जिसने “भगवा आतंकवाद” की बहस को फिर से हवा दी। विशेष एनआईए कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सातों आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके बाद आव्हाड ने सनातन धर्म पर निशाना साधा। इस बयान ने न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी नया तनाव पैदा कर दिया।

















