प्रमिला ताई मेढ़े : वात्सल्य की प्रतिमूर्ति
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प्रमिला ताई मेढ़े : वात्सल्य की प्रतिमूर्ति

राष्ट्र सेविका समिति की चतुर्थ प्रमुख संचालिका रहीं वंदनीया प्रमिला ताई मेढ़े नहीं रहीं। उन्होंने 31 जुलाई को नागपुर के धंतोली स्थित समिति के मुख्यालय देवी अहिल्या मंदिर में अंतिम सांस ली।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 3, 2025, 11:40 am IST
inसंघ @100, श्रद्धांजलि, महाराष्ट्र

राष्ट्र सेविका समिति की चतुर्थ प्रमुख संचालिका रहीं वंदनीया प्रमिला ताई मेढ़े नहीं रहीं। उन्होंने 31 जुलाई को नागपुर के धंतोली स्थित समिति के मुख्यालय देवी अहिल्या मंदिर में अंतिम सांस ली। 1 अगस्त को उनके पार्थिव शरीर को नागपुर स्थित एम्स को दान कर दिया गया।

96 वर्षीया प्रमिला जी ने अपना पूरा जीवन देश और समाज के लिए अर्पित कर दिया था। उनका जन्म 8 जून, 1929 को नंदुरबार, महाराष्ट्र में हुआ था। बचपन में ही वे समिति की सेविका बन गई थीं। समिति की गतिविधियों में भाग लेते हुए उन्होंने बी.ए. और बी.टी. तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद दो वर्ष तक अध्यापन कार्य किया। फिर डी.ए.जी.पी.टी. में वरिष्ठ आडिटर के रूप में कई वर्ष तक देश की सेवा की। राष्ट्र सेविका समिति का कार्य करने के लिए उन्होंने सेवानिवृत्ति से 12 वर्ष पहले ही नौकरी छोड़ दी। प्रमिला ताई मराठी के साथ हिंदी और अंग्रेजी धाराप्रवाह बोलती थीं।

नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने वंदनीया मौसीजी के साथ भारत के विभिन्न प्रांतों में प्रवास किया और समाज को नजदीक से जाना। वे 1978 से 2003 तक लगभग 25 वर्ष अखिल भारतीय प्रमुख कार्यवाहिका रहीं। इस दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश क्षेत्र एवं जम्मू—कश्मीर का विशेष दायित्व मिला। प्रमुख कार्यवाहिका के नाते उन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष में निरंतर प्रवास किया। कार्य को विविध आयाम देते हुए व्यापक जनसंपर्क किया। फरवरी, 2003 में उन्हें सह प्रमुख संचालिका का दायित्व दिया गया। फिर 22 जुलाई, 2006 को उन्हें प्रमुख संचालिका बनाया गया। इस दायित्व को उन्होंने 20 जुलाई, 2012 तक संभाला।

इसी दिन उन्होंने यह पदभार माननीया शांताक्का जी को सौंप दिया। समिति के कार्य के लिए उन्होंने इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा, श्रीलंका आदि देशों की यात्राएं कींं। अमेरिका प्रवास के दौरान उन्हें न्यू जर्सी के महापौर ने वहां की मानद नागरिकता प्रदान की थी। 75 वर्ष की आयु में उन्होंने भारत के 107 स्थानों पर प्रवास करने का संकल्प पूर्ण किया था।

9 अगस्त, 2001 से 2 मई, 2004 तक उन्होंने 266 दिन तक पूरे देश की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने कन्याकुमारी से जम्मू-कश्मीर और जूनागढ़ से इंफाल तक लगभग 28,000 किलोमीटर की यात्रा की थी। इस दौरान वे नेपाल भी गईं। बढ़ती आयु भी उन्हें कार्य करने से रोक नहीं पाई। उनकी प्रेरणा से अनगिनत सेविकाएं देश की सेवा के लिए आगे आईं। ऐसी कर्मठ और ममता से भरे हृदय वाली प्रमिला ताई को विनम्र श्रद्धांजलि।

मातृवत छत्र हट गया

राष्ट्र सेविका समिति की पूर्व प्रमुख संचालिका वंदनीया श्रीमती प्रमिला ताई मेढ़े जी के परलोक गमन से हम सभी लोगों के सर पर से एक मातृवत छत्र हट गया है। उनके निधन से, समिति के लगभग स्थापना काल से आज तक की उनकी दीर्घ तपस्या की पूर्ण हो गयी है। लक्ष्य की अचूक समझ व निष्ठा, कार्यवृद्धि के लिए सातत्यपूर्ण कठोर परिश्रम तथा व्यवहार में आत्मीयता का वे मूर्तीमंत उदाहरण थीं। राष्ट्र सेविका समिति के कार्ययज्ञ में अपनी जीवन समिधा अर्पित कर अंततोगत्वा उन्होंने मरणोपरांत देहदान संकल्प से अपनी देह का भी समर्पण कर दिया। उनकी तपस्या के कारण उनकी सद्गति तो सुनिश्चित है। उनके बिना ध्येय पथ पर आगे बढ़ने का धैर्य हम सभी को मिले, यही ईश चरणों में प्रार्थना। ॐ शांति।

—मोहनराव भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

वंदनीया प्रमिलाताई जी बहुमुखी व्यक्तित्व की प्रखर, चिंतनशील और कर्मठ कार्यकर्ता थीं। अंतिम क्षण तक मन तथा बुद्धि से सतर्क रहकर अनुशासित जीवन बिताने वाली मातृत्व भाव की ताई जी आज हमारे मध्य नहीं रहीं। उनके आदर्श पथ पर चलते रहना ही अपनी श्रद्धांजलि है।

— शांता कुमारी, प्रमुख संचालिका, राष्ट्र सेविका समिति

Topics: मोहनराव भागवतराष्ट्र सेविका समितिप्रमिला ताईदेश की सेवाअहिल्या मंदिर
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