पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेनाओं के द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (2 अगस्त, 2025) अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने एक जन सभा को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को भगवान भोलेनाथ के चरणों में समर्पित किया। इसके साथ ही इस अभियान को देश की बेटियों की रक्षा का प्रण करार दिया।
प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर कहा कि ये सब बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद के कारण संभव हो सका। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब 22 अप्रैल को पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या की थी तो उस दौरान उन बच्चों और महिलाओं का मेरे दिल में गहरा दुख था। उस दौरान बाबा विश्वनाथ से हमें इस दुख को सहने की शक्ति देने की विनती की थी। मैंने अपनी बेटियों के सिंदूर की रक्षा का वादा किया था, और आज, महादेव के आशीर्वाद से मैंने वह वादा पूरा किया। मैं ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को महादेव के चरणों में समर्पित करता हूँ।”
उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन की ताकत 140 करोड़ देशवासियों की एकता थी। भारतीय सशस्त्र बलों ने 6-7 मई की रात को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिससे आतंकियों का हौसला टूट गया।
काशी के साथ भावनात्मक जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत भोजपुरी से करते हुए कहा, “हम काशी के हर परिवार-जन के प्रणाम करत हई।” सावन के पवित्र महीने में काशी की आध्यात्मिकता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “शिव भक्तों को गंगा जल लेकर काशी में आते देखना दैवीय लगता है। यादव भाइयों का गौरी-केदारेश्वर से जल ले जाना मनमोहक है।” उन्होंने बताया कि वे बाबा विश्वनाथ और मार्कंडेय महादेव के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन भक्तों को असुविधा न हो, इसलिए उन्होंने वहां जाने का विचार त्याग दिया।
काशी को 2200 करोड़ की सौगात
पीएम मोदी ने वाराणसी में 2,200 करोड़ रुपये की 52 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें वाराणसी-भदोही सड़क का चौड़ीकरण, हरदत्तपुर में रेलवे ओवरब्रिज, और कैंसर अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी यूनिट जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने 9.7 करोड़ किसानों के लिए पीएम-किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त के तहत 20,500 करोड़ रुपये जारी किए। उन्होंने कहा, “काशी से जब यह राशि किसानों के खातों में जाती है, तो यह अपने आप में प्रसाद बन जाता है।”
राष्ट्रीय एकता और शैव परंपरा
मोदी ने हाल की तमिलनाडु यात्रा का जिक्र करते हुए गंगैकोंडा चोलपुरम मंदिर का उल्लेख किया, जो राजेंद्र चोल द्वारा बनाया गया था। उन्होंने कहा, “हजार साल पहले, शैव भक्ति के जरिए राजेंद्र चोल ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परंपरा शुरू की थी। आज, काशी-तमिल संगमम जैसे कदम इसे आगे बढ़ा रहे हैं।” उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया, जो देश के हर कोने से मिले समर्थन से संभव हुआ।

















