प्रमिला ताई जी: राष्ट्र सेविका समिति की प्रेरणादायी शख्सियत
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प्रमिला ताई जी: राष्ट्र सेविका समिति की प्रेरणादायी शख्सियत

राष्ट्र सेविका समिति की पूर्व प्रमुख संचालिका प्रमिला ताईजी के प्रेरणादायी जीवन और राष्ट्र सेवा के योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि।

Written byडॉ रूपा रावलडॉ रूपा रावल
Aug 1, 2025, 11:03 am IST
in भारत
श्रद्धेय प्रमिला ताई

श्रद्धेय प्रमिला ताई

सन 1995 की बात है। मुझे कहा गया था कि राष्ट्र सेविका समिति के कुछ अधिकारी आ रहे हैं उनको लेकर राजकोट से सोमनाथ जाना है। किसी भी अधिकारी के साथ प्रवास का मेरे लिए पहला अनुभव था। आयु भी छोटी ही थी। मन में घबराहट भी थी। अधिकारी आए तो देखा कि लगभग 65-70 की आयु की दादीमा जैसी दिखने वाली दुबली पतली महिला थीं। उस दिन राजकोट में दिनभर अलग-अलग कार्यक्रमों के बाद रात्रि प्रवास कर के हम सोमनाथ पहुंचे थे। प्रवास कुछ खास आरमदायक नहीं था।

राज्य परिवहन की बस में हम गए थे। मैं तो थककर चूर हो गयी थी। लेकिन साथ के अधिकारी युवा की सी स्फूर्ति से महाराष्ट्र की पारम्परिक साड़ी (नौवारी) पहनकर नहा-धो कर तैयार थीं। उस वर्ष देवी अहिल्याबाई की 200वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही थी। हमें उसी उपलक्ष्य में सोमनाथ में देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित मंदिर में रूद्र पूजा के लिए जाना था। पूजा अधिकारी के हाथों से ही संपन्न होनेवाली थी। पूजा से पहले जब पंडितजी ने संकल्प दोहराने को कहा, तब उन अधिकारी ने स्थिर और गंभीर स्वर में कहा “आत्मनो मोक्षार्थ जगत हिताय च…” वे शब्द आज भी मेरे कानों में गूंज रहे हैं, लेकिन जिनके मुख से पहली बार इतने बड़े संकल्प को बिना समझे ही सुना था, अब वो अधिकारी यानि श्रद्धेय प्रमिला ताई जी हमारे बीच नहीं रहीं।

सतत चिंतनशील थीं प्रमिला ताई जी

कर्मठता यदि मनुष्य का स्वरूप ले सकती है तो वह निश्चित ही प्रमिला ताई जी के रूप में पहचानी जायेगी। सतत वाचन, नई चीजें सीखने के लिए सदा उत्साही, कर्तव्य कठोर, लेकिन मां जैसी ममतामयी, समिति कार्य के बारे में सतत चिंतनशील, कार्यकर्त्ता को जोड़कर रखने वाली प्रमिला ताई जी के गुणों के बारे में कितना भी लिखा तो कम ही होगा। अभी गत सप्ताह 25 जुलाई को दूसरे दिन कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में एक पोस्टर बनाकर उनको देखने के लिए भेजा था।

बचपन से ही राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ गई थीं ताई

केवल पांच मिनट में प्रतिक्रिया भी आ गयी और एक शब्द को बदलने की सूचना मिली। आयु के 96वें वर्ष में भी इतनी क्रियाशीलता शायद ही किसी में देखने को मिलती है। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में जन्मीं प्रमिला ताई जी बचपन में ही राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी हुई थीं। समिति की संस्थापिका वन्दनीया लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) के सानिध्य में उन्होंने संगठन की रीति-नीति सीखी और उसे आत्मसात कर लिया। स्नातक होकर बीएड पूर्ण कर उन्होंने नागपुर के सी.पी. एण्ड बरार उच्च माध्यमिक विद्यालय में दो वर्ष अध्यापन कार्य किया। बाद में उन्होंने सीनियर ऑडिटर की सरकारी नौकरी भी की, किन्तु समिति के कार्य के लिए सेवानिवृत्ति से 12 वर्ष पूर्व ही स्वैच्छिक अवकाश ले लिया। राष्ट्र सेविका समिति में विविध दयित्वों का वहन करके 2012 में प्रमुख संचालिका का पदभार शांताक्का जी को देकर हम सभी की मार्गदर्शक की भूमिका में वे जीवन के अंत तक रहीं।

न्यूजर्सी की मिली थी मानद नागरिकता

समिति कार्य के लिए विदेशों में भी उनका प्रवास रहता था। इसी प्रवास के दौरान अमेरिका में न्यूजर्सी शहर के महापौर द्वारा इन्हें “मानद नागरिकता” प्रदान की गई थी। मौसी जी के जन्मशताब्दी वर्ष में उन्होंने 266 दिनों की भारत परिक्रमा, मौसी जी की जीवन-प्रदर्शनी के साथ निजी वाहनों से की। कन्याकुमारी से लेकर नेपाल, जम्मू-कश्मीर एवं जूनागढ़ से लेकर इम्फाल तक इस 28,000 किलोमीटर लम्बी कठिन यात्रा में उन्होंने लगभग 109 सार्वजनिक भाषण दिए, 105 शाखाओं में रहीं, लगभग 141 परिसंवाद, भेंटवार्ता और पत्रकार वार्ता की। उन्होंने समूचे देश की मातृशक्ति को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया।

जिसकी अनुपम धैर्य धारणा, जिससे मिलती स्वयं प्रेरणा

मृत में भी जो अमृत भरता, वही समझ लो सात्विक कर्ता

गीत की इन पंक्तियों को सार्थक करते हुए अपने जीवन दीप से चहुं ओर प्रकाश बिखेरके प्रमिला ताई जी अनंत में विलीन हो गईं। उनको शत शत नमन। सादर सस्नेह श्रद्धांजलि!

 

 

Topics: Bharat Parikramaश्रद्धाजंलिtributeराष्ट्र सेविका समितिwomen powerमातृशक्तिNational Servants Committeeप्रमिलताईजीभारत परिक्रमाPramilataiji
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