भुवनेश्वर । ओडिशा के केन्दुझर जिले में ईसाई पादरियों द्वारा भ्रमित होकर ईसाई बन चुके दो जनजातीय परिवारों के 12 लोगों ने घरवापसी की है। केन्दुझर जिले के धर्म जागरण समन्वय के कार्यकर्ता व गांव के लोगों की उपस्थिति में उनका घरवापसी कार्यक्रम हुआ और उन्होंने स्वधर्म में वापसी की।
ईसाई पादरियों के बहकावे में आए थे परिवार
प्राप्त जानकारी के अनुसार केन्दुझर जिले के पुरुणाबांधगडा पंचायत के नानिकाबाहली जनजातीय बस्ती में कुछ परिवार अनेक साल पहले ईसाई पादरियों के बहकावे में आकर अपनी संस्कृति को त्याग चुके थे और ईसाइयत को अपना लिया था। धर्म जागरण समन्वय से जुड़े केन्दुझर जिला कार्यकर्ता लगातार इन परिवारों से संपर्क में थे और उन्हें घरवापसी के लिए प्रेरित कर रहे थे।
विशेष कार्यक्रम में हुआ घरवापसी संस्कार
इन लोगों की घरवापसी के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ग्रामीणों के साथ-साथ धर्म जागरण विभाग के कार्यकर्ता भी उपस्थित थे। घरवापसी के अवसर पर लौटे लोगों को महाप्रभु श्रीजगन्नाथ जी की फोटो व धार्मिक पुस्तकें प्रदान की गईं।
धोखे से कराया गया था कन्वर्जन
घरवापसी करने वाले सेतक सिंह, गुरुबारी सिंह और नरेन्द्र गागराई ने बताया कि कई साल पहले ईसाई पादरी उनके गांव में आए थे। उस समय परिवार के कुछ सदस्य अस्वस्थ थे। पादरियों ने उन्हें समझाया कि हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा के कारण उनकी तबीयत खराब रहती है और यदि वे ईसा मसीह की पूजा करेंगे तो स्वास्थ्य ठीक हो जाएगा। साथ ही, उन्हें जाति प्रथा न होने का झांसा दिया गया। इस बहकावे में आकर उन्होंने अपना स्वधर्म त्याग दिया।
घरवापसी से मिला आत्मिक आनंद
उन्होंने कहा कि अब उन्हें लग रहा है कि ईसाई पादरियों ने उन्हें धोखे से कनवर्ट कर लिया था। धर्म जागरण कार्यकर्ताओं के प्रयास से जब वे स्वधर्म में लौटे तो उन्हें आत्मिक आनंद और गहरा संतोष मिला। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वे अन्य कनवर्ट हो चुके जनजातीय लोगों को भी घरवापसी कराने का प्रयास करेंगे।
घरवापसी कार्यक्रम में शामिल रहे प्रमुख लोग
इस घरवापसी कार्यक्रम में केन्दुझर से सांसद के स्थानीय प्रतिनिधि शिवेंद्र चक्र, धर्म जागरण समन्वय के वरिष्ठ कार्यकर्ता शरत चंद्र स्वाईं, प्रशांत चक्र, प्रशांत बिश्वाल, सामाजिक कार्यकर्ता अंजन बेहेरा, पद्मलोचन जेना और अन्य लोग उपस्थित रहे।











