मुंबई (हि.स.) । महाराष्ट्र के मालेगांव बम विस्फोट मामले में बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने गुरुवार को कहा कि आज हिंदुत्व की जीत हुई है, भगवा जीत गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें 17 सालों तक अपमानित किया गया, लेकिन आज उन्हें राहत महसूस हो रही है।
पूछताछ और 17 साल का संघर्ष
अदालत का फैसला सुनने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह भावुक हो गईं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “जब मुझे पहली बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था, तो मैं मानवता और न्याय के सम्मान के साथ आई थी। मुझे 13 दिनों तक प्रताड़ित किया गया, मेरा जीवन नष्ट कर दिया गया। मुझे अपने ही देश में आतंकवादी बना दिया गया। मैं जीवित हूँ क्योंकि मैं एक संन्यासी हूँ।”
भगवा को आतंकवाद कहने वालों को कभी माफ़ नहीं
साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि यहां तक कि संन्यासी और संत भी हर समय मर रहे हैं। उन्होंने भगवान को कलंकित किया है। फैसले के बाद उन्होंने जजों का शुक्रिया अदा किया और कहा, “मेरी बात सुनने और मुझे समझने के लिए धन्यवाद। आपने भगवा को आतंकवादी कहा, लेकिन भगवा जीत गया है। हिंदुत्व जीत गया है। हिंदुत्व को आतंकवाद कहने वालों को कभी माफ़ नहीं किया जाएगा।”
एनआईए अदालत का ऐतिहासिक फैसला
गुरुवार को मुंबई में विशेष एनआईए अदालत ने मालेगांव विस्फोट मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर आरोपितों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए सभी आरोपितों को बरी किया जा रहा है।
मालेगांव विस्फोट और निर्दोषों की जान
मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम विस्फोट में 6 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी और सौ से ज़्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में जांच एजेंसी ने साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित 11 आरोपितों पर मामला दर्ज किया था और सात को गिरफ्तार किया था।
बरी हुए सभी आरोपी
अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी को निर्दोष बरी कर दिया।

















