मालेगांव बम विस्फोट में एनआईए (NIA) कोर्ट का फैसला आने से साधु-संतों में भी खुशी का मौहाल है। जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी का कहना है कि इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद का झूठा नरेटिव गढ़ा था। उन्होंने ‘पाञ्चजन्य’ से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस पर हिंदू और भगवा आतंकवाद का झूठ फैलाने के लिए आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मालेगांव बम धमाके में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित को जानबूझकर फंसाया था।
पूरी दुनिया में हिंदू को आतंकवादी सिद्ध करना चाहती थी कांग्रेस
महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि हिंदू और भगवा आतंकवाद का झूठ गढ़कर कांग्रेस पूरी दुनिया में हिंदू को आतंकवादी सिद्ध करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही सनातन हिंदुओं के खिलाफ रही है। 17 साल बाद मालेगांव बम धमाके में न्यायालय का फैसला आना और साध्वी प्रज्ञा सहित सभी सातों आरोपियों को बरी करना स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित ने इतने साल जो अमानवीय शारीरिक और मानसिक यातनाएं सही उसका क्या?
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स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि एक स्त्री और वह भी साध्वी, उसके ऊपर जिस प्रकार कांग्रेस के इशारे पर पुलिस अमानवीय और अशोभनीय अत्याचार हुए क्या इसके लिए उन लोगों को सजा होगी? उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद अब कांग्रेस को भगवा आतंकवाद शब्द का झूठा नरेटिव गढ़ने के लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस के ऊपर आपराधिक मुकदमा इस संदर्भ में चलना चाहिए कि उन्होंने समूचे सनातन हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए यह कुचक्र षड्यंत्र किया।

महाराष्ट्र के मालेगांव बम धमाके पर फैसला देते हुए कोर्ट ने बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी को बरी कर दिया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और साधु-संत भी कांग्रेस पर हमलावर हो गये हैं। NIA अदालत ने कहा कि सिर्फ शक वास्तविक सबूत की जगह नहीं ले सकता। सबूत के अभाव में आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।
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न्यायाधीश ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि समग्र साक्ष्य अदालत में आरोपियों को दोषी ठहराने का विश्वास नहीं जगाते। दोषसिद्धि के लिए कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं है। यह साबित नहीं हुआ है कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर पंजीकृत थी, जैसा कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया था। अदालत ने कहा, ‘अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया है कि विस्फोट हुआ था, लेकिन यह साबित नहीं कर सका कि विस्फोटक मोटरसाइकिल में लगाया गया था। किसी भी गवाह ने इसका समर्थन नहीं किया और इसलिए न तो बैठक और न ही रची गई साजिश साबित हो सकी।’ गौरतलब है कि 29 सितंबर को मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव शहर में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में लगाए गए विस्फोटक उपकरण में विस्फोट होने से छह लोगों की मौत हो गयी थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
















