उज्जैन में पदस्थ प्रधान जिला जज राजेश गुप्ता को हाईकोर्ट जज के रूप में पदोन्नत किये जाने के विरोध में शहडोल की सिविल जज अदिति शर्मा ने सेवा से त्यागपत्र दे दिया है। श्रीमती शर्मा ने राष्ट्रपति, कोलेजियम सदस्यों के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई से गुहार लगाई थी कि जज राजेश गुप्ता को हाईकोर्ट में जज नहीं बनाया जाए। पीडीजे राजेश गुप्ता पर अदिति ने सेवा के दौरान उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। शर्मा की शिकायतों पर कोलेजियम और केंद्र सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की और गत दिवस राजेश गुप्ता को हाईकोर्ट जज बनाने के आदेश जारी कर दिए गए। मप्र हाईकोर्ट में यह पहला मामला है जब किसी जज की नियुक्ति से जुड़ा इस तरह का विवाद सामने आया है। अदिति शर्मा ने अपने स्तीफे में न्यायपालिका पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
अदिति शर्मा कौन हैं?
अदिति शर्मा मप्र उच्च न्यायिक सेवा की अधिकारी हैं। उन्होंने सिविल जज के रूप में अपनी सेवा शुरू की, लेकिन 2023 में उन्हें उनके कामकाजी प्रदर्शन मूल्यांकन के आधार पर बर्खास्त कर दिया गया था। यह जांच हाईकोर्ट में नियुक्त प्रधान जिला जज राजेश कुमार गुप्ता ने की थी।अदिति शर्मा ने हाईकोर्ट की इस बर्खास्तगी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 28 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अदिति शर्मा की बर्खास्तगी को अवैध और मनमानी भरा मानते हुए उन्हें सेवा में बहाल कर दिया। जस्टिस नागरत्ना (सुप्रीम कोर्ट) की खण्डपीठ ने अपने निर्णय में कहा था कि अदिति शर्मा की बर्खास्तगी में उनकी चिकित्सा एवं भावनात्मक चुनौतियो पर विचार नही किया गया। उन्हें कोविड19 में गंभीर जटिलताओं और गर्भपात का सामना करना पड़ा।उनके प्रदर्शन मूल्यांकन को अनुचित तरीके से कम किया गया था।
प्रधान जिला जज राजेश गुप्ता की शिकायत
सिविल जज अदिति शर्मा ने जिला जज राजेश गुप्ता की जांच को दुर्भावनापूर्ण और पक्षपाती बताया और एक अभ्यावेदन पूर्व चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ को भेजा था।इस पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रकरण जांच के लिए मप्र हाईकोर्ट भेज दिया। मप्र हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए अदिति शर्मा को एक बार भी नहीं बुलाया, उल्टे जज राजेश गुप्ता का नाम हाईकोर्ट जज बनाने के लिए कोलेजियम को भेज दिया। अदिति शर्मा के शिकायती पत्र में तमाम आरोपों का जिक्र है कि कैसे श्री गुप्ता उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित करते रहे,उन्हें भावनात्मक रूप से बेइज्जत करते थे, सार्वजनिक रूप से न्यायिक अधिकारियों को धमकाते थे।
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एक कार्यक्रम में उन्हें जलपान की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। इसी तरह एक अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम में साथी जजों के सामने उनके चरित्र पर सवाल खड़ा किया गया। गुप्ता पर जज के रूप में ब्यूरोक्रेसी को धमकाने के अलावा सार्वजनिक तौर पर उच्च न्यायालय के जजों के विरुद्ध टिप्पणी की शिकायत थीं। गुप्ता की पत्नी द्वारा भी अधीनस्थ जजों को अपमानित करने जैसे आरोप अदिति शर्मा की इस शिकायत में प्रमुखता से थे।
हाईकोर्ट जज बनाने से पूर्व भी लिखा पत्र
इस महीने 01 जुलाई को कोलेजियम ने राजेश कुमार गुप्ता के नाम को हाईकोर्ट जज के रूप में हरी झंडी दे दी थी। अदिति शर्मा ने तत्काल फिर से एक पत्र राष्ट्रपति और कॉलेजियम को भेजा, जिसमें श्री गुप्ता के ऊपर लगाए गए आरोपों की जांच नियुक्ति से पहले कराए जाने का निवेदन किया गया। लेकिन केंद्र सरकार ने इस मामले में कोई पृथक जांच नहीं कराई और 27 जुलाई को गुप्ता को 11 नामों के साथ मप्र हाईकोर्ट में जज नियुक्त कर दिया।
दो साल पहले रुक गई थी गुप्ता की पदोन्नति
राजेश कुमार गुप्ता का नाम दो साल पहले भी हाईकोर्ट जज के लिए कोलेजियम को भेजा गया था। लेकिन, 2023 में अदिति शर्मा की शिकायत के अलावा एक अन्य मामले में पीडीजे गुप्ता का नाम वापिस कर दिया गया। तत्कालीन सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ ने शिकायतों की जांच मप्र हाईकोर्ट से करने को कहा था। इस मामले में एक बार भी अदिति शर्मा को नहीं बुलाया गया।इस साल अप्रैल में फिर से गुप्ता का नाम कोलेजियम को भेजा गया था।
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संबंधित का पक्ष
हमने इस संबन्ध में प्रधान जिला जज राजेश कुमार गुप्ता से उनका आधिकारिक पक्ष जानने के लिए मोबाइल से सम्पर्क किया उन्हें टेक्स्ट एवं व्हाट्सअप मैसेज किए लेकिन उन्होंने कोई जबाब नहीं दिया।

















