पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार अपनी स्वप्निल नीति लैंड पूलिंग को लेकर घिरती दिख रही है। सरकार जहां इसके लाभ गिनवा रही है तो दूसरी ओर किसानों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई 19 अगस्तक तक सरकार से जवाब मांगा है। दूसरी ओर इस नीति के भय से एक छोटे किसान की मौत हो गई। किसानों ने इसको लेकर आज पंजाब के कई हिस्सों में ट्रैक्टर मार्च निकाले हैं।
हाईकोर्ट में दायर याचिका
आप सरकार की लैंड पूलिंग नीति के खिलाफ पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के नाम पर किसानों का शोषण करने का आरोप लगाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने 4 जुलाई को जारी की गई इस नीति को अगली सुनवाई पर अदालत में पेश करने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है।
किसानों की आपत्तियाँ और कानूनी पहलू
डेराबस्सी निवासी नविंदर सिंह ने बताया कि सरकार की 4 जुलाई को लागू की गई यह नीति कई कानूनी प्रावधानों की अवहेलना करती है, जिनमें सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे अनिवार्य पहलू शामिल हैं। याचिका में बताया गया है कि लुधियाना और मोहाली जिलों की उपजाऊ बहुफसली कृषि भूमि को शहरीकरण और विकास के नाम पर अधिग्रहित किया जा रहा है।
कितनी जमीन अधिग्रहित होने जा रही है?
लुधियाना की 50 से अधिक गांवों की लगभग 24,000 एकड़ जमीन तथा औद्योगिक विस्तार के लिए 21,000 एकड़ भूमि को चिह्नित किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह भूमि केवल किसानों की आजीविका का आधार नहीं है, बल्कि पंजाब की खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय अन्न भंडार के लिए भी बेहद अहम है। नई नीति के जरिये भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में पारदर्शिता और उचित मुआवजा अधिनियम, 2013 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार किया जा रहा है। सामाजिक व पर्यावरणीय मूल्यांकन और उपजाऊ भूमि की सुरक्षा की अनदेखी की गई है।
किसानों का आरोप और पारदर्शिता पर सवाल
याची ने कहा कि ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी जैसी एजेंसियां भारी विरोध के बावजूद जबरन इस नीति को लागू कर रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि न्यायालय न केवल 4 जुलाई की अधिसूचना को रद्द करे, बल्कि 2013 की लैंड पूलिंग नीति को भी असंवैधानिक घोषित करे। साथ ही यह भी अपील की गई है कि राज्य सरकार को किसी भी प्रकार की नई कार्रवाई से रोका जाए। मुख्य न्याययाधीश शील नागू और संजीव बेरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 19 अगस्त तक स्थगित कर दी।
किसान की मौत से बढ़ा आक्रोश
दूसरी ओर जगरांव में मलक गांव के 70 वर्षीय किसान लखवीर सिंह उप्पल की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। जानकारी के अनुसार उनकी लगभग आठ एकड़ जमीन लैंड पूलिंग पॉलिसी के अंतर्गत आ गई थी, इसके साथ ही उनके ऊपर लाखों रुपये का कर्ज भी था। पहले से ही वह मानसिक रूप से परेशान थे। इस नीति के खिलाफ जोधा में आयोजित एक बैठक में भाग लेने के बाद वापस लौटने पर उनको दिल का दौरा पड़ा। उनको गंभीर हालत में लुधियाना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
किसान संगठनों की प्रतिक्रिया और संघर्ष
जमीन बचाओ संघर्ष समिति के नेता बलबीर सिंह, इकबाल सिंह राय और हरजोत सिंह उप्पल ने बताया कि लखवीर सिंह लैंड पूलिंग नीति और कर्ज के कारण मानसिक रूप से परेशान थे। किसान नेताओं ने लखवीर सिंह उप्पल को भूमि अधिग्रहण नीति के खिलाफ संघर्ष का पहला शहीद घोषित किया है।
संयुक्त किसान मोर्चा का ट्रैक्टर मार्च
आप सरकार की इस नीति के खिलाफ आज संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदेश के कई हिस्सों में ट्रैक्टर मार्च निकाला है और सरकार से इस नीति को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है।















