उत्तर प्रदेश में सहारनपुर के देवबंद में स्थित इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने महिलाओं के प्रवेश पर फिर से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। प्रबंधन ने महिलाओं का प्रवेश वर्जित संबंधी आदेश संस्था के मुख्य द्वार पर लगाकर यह फरमान जारी किया है। इसके साथ ही संस्था के अंदर किसी भी प्रकार की वीडियो बनाने और फोटोग्राफी करने पर भी रोक लगा दी गई है। प्रबंधन का कहना है कि रोक के बावजूद कुछ महिलाएं और युवतियां चोरी छिपे परिसर के अंदर रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रही थीं, जिससे ‘बेपर्दगी’ फैल रही थी और संस्था की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा था। वहीं, भ्रमण के लिए आने वाले पुरुष भी अब संस्था में फोटोग्राफी नहीं कर सकेंगे।
संस्थान के प्रभारी मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम ने बताया, “हमने पूर्व में शर्तों के साथ महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी, लेकिन कुछ ही समय बाद ही सोशल मीडिया पर रील बनाने का चलन फिर शुरू हो गया, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा था। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसे देखते हुए हमें दोबारा महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना पड़ा।”
जानें क्या है नए आदेश में
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रबंधन द्वारा जारी नए आदेश में केवल महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि कई अन्य सख्त शर्तों को भी शामिल किया गया है। आदेश में लिखा गया है कि दारुल उलूम में आने वाले किसी भी व्यक्ति को संस्थान के अंदर फोटोग्राफी और वीडियो बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। साथ ही गुटखा, तंबाकू, नशीली वस्तुएं लाने और उनके सेवन करने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। फूल-पौधों को छूना और तोड़ना वर्जित है। सूर्यास्त से पहले सभी विजिटर को संस्था के परिसर से बाहर निकलना अनिवार्य होगा।
2024 में भी लग चुका है प्रतिबंध
दारुल उलूम प्रशासन ने पिछले वर्ष 17 मई 2024 को संस्था में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। दारुल उलूम ने उस वक्त भी यही तर्क दिया था कि संस्था में आने वाली महिलाएं और युवतियां बेपर्दा घूमती हैं और वीडियो बनाकर उन्हें गाने आदि के साथ सोशल मीडिया पर अपलोड करती हैं। इससे संस्था की छवि खराब हो रही है। हालांकि छह महीने की रोक के बाद संस्था द्वारा कुछ सख्त शर्तों के साथ विजिटर पास की व्यवस्था के तहत महिलाओं को संस्था में आने की अनुमति दी गई थी।

















