बांग्लादेश से विस्थापित विभिन्न हिंदू परिवारों को संक्रमणीय/असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र के वितरण कार्यक्रम माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर में कहा कि पापी पाकिस्तान, उसके कर्मो से भारत का विभाजन हुआ,फिर उस पाकिस्तान के टुकड़े हुए,अभी और टुकड़े का इंतज़ार करिये, पाकिस्तान अभी और टुकड़ो में बंटने वाला है। लेकिन उस पापी पाकिस्तान के पाप की सज़ा वहां रह रहे हिंदुओं, सिखों को,बौद्धों को,जैनियों को,पारसियों को,ईसाइयों को मिली। क्योंकि उनके यहां किसी अन्य जाति के लिए अस्तित्व नही है।
हिंदू सहिष्णुता और शरणार्थियों के अधिकारों पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोचिए, अगर आप बांग्लादेश से नहीं आते क्या होता आपके साथ,क्या होता? पाकिस्तान से नहीं आते क्या होता? यह हिंदुओं की सहिष्णुता देखिए, आप आए किसी ने आपकी जाति नहीं पूछी, किसी ने आपका संप्रदाय नहीं पूछा, किसी ने आपका मत नहीं पूछा, उन्होंने गले से आपको लगाया, अपने साथ जोड़ा और अपने साथ रहने, एक साथ मिलकर के जीवन को आगे गुजर-बसर चलाने के लिए आपके साथ चले, बढ़े और आपके लिए संघर्ष किए। आप सोचिए, मोहम्मदी के विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह संघर्ष नहीं करते तो क्या आपको आपका अधिकार मिल जाता? नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि जिस सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के अंतर्गत आपको हम अधिकार प्रदान कर रहे हैं, इसका विरोध कांग्रेस ने भी किया था और समाजवादी पार्टी ने भी किया था। ये लोग नहीं चाहते थे कि हिंदुओं को,सिखों को, बौद्धों को, जैनियों को अधिकार मिले, क्योंकि यह तो तुष्टीकरण के पोषक हैं। जब हम लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाते हैं, तब समाजवादी पार्टी देश के तोड़क जिन्ना के प्रति उसका महिमामंडन करते हैं। जब हम एकजुट होने का आह्वान करते हैं, तब यह जातीय विभाजन में समाज के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का पाप करते हैं। ये केवल एक निर्णय नहीं है,यह न्याय का वह क्षण है जिसने इतिहास की अधूरी तमन्ना को पूरा किया है।
विस्थापित हिंदुओं के दर्द और भारत में मिली शरण व सम्मान की भाव
उन्होंने कहा को वर्ष 1971,1973,1976,1978 में आप यहां आए,आप केवल सीमा पार करके ही यहां नही आये थे,आप अपने साथ टूटे हुए सपनो को और उसकी पीड़ा लेकर आये थे,बिछड़े हुए अपनो की यादें लेकर और एक अनिश्चित भविष्य लेकर आये थे। आप ने अपना घर अपनी मर्ज़ी से नही छोड़ा,आपको अपना घर छुड़वा दिया गया,क्योंकि उन दरिदों ने आपके घरों पर कब्जा कर लिया था,जो आज भी बांग्लादेश में हिंदुओं की निर्मम हत्या कर रहे हैं। वहां पर अपनी जमीन छोड़ने के लिए आपको मजबूर कर दिया गया,आपकी आजीविका छीनी गई,आपको अपनो की यादों को पीछे छोड़ना पड़ा,लेकिन आपके मन मे आशा थी कि भारत मे ठौर ठिकाना सम्मान मिलेगा। याद करिये,आपको उस बांग्लादेश, पाकिस्तान ने नही अपनाया, आप हिंदू थे तो आपको हिंदुस्तान ने ही गले लगाया,आप सिख थे,बौद्ध जैन पारसी थे तो हिंदुस्तान ने ही आपको अपने गले से लगाया।
विस्थापित समुदाय को अधिकार, पहचान और सम्मान दिलाने पर सरकार का जोर
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू प्रताड़ित होता है, सिख, बौद्ध प्रताड़ित होता है, उसकी आस और उसका विश्वास भारत की तरफ होता है, वह भारत की तरफ देखता है। भारत उसको न्याय देगा, भारत उसके साथ खड़ा होगा। यद्यपि आपके पूर्वज बांग्लादेश में रहते थे, लेकिन आपको मालिकाना अधिकार भारत मे लखीमपुर की धरती पर प्रधानमंत्री मोदी जी के कारण मिल रहा है। जिस बांग्लादेश ने इन्हें ठुकराया, जिस पाकिस्तान के पाप के कारण इनपर अत्याचार हुआ था,उस बांग्लादेश से विस्थापित होकर उनकी जमीन पर,सम्पत्ति पर वहां के दरिंदों ने वहां कब्जा किया। कांग्रेस का पाप देखिये,आप से वोट लेते रहे,लेकिन आपको कभी मालिकाना अधिकार नही दिया,आपकी पहचान छिपाने के लिए गांव का नाम भी मियांपुर रख दिया,सोचिए,एक भी मियां नही लेकिन फिर भी नाम मियांपुर!! अब यह मियांपुर नही रहेगा, अब बांग्लादेश से आये इन बंधुओ की बस्ती का नाम रविन्द्रनगर होगा।भारत को राष्ट्रगान देने वाले गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के नाम पर अब आपकी पहचान होगी।















