साड़ी पहने डिम्पल यादव को “...औरत” कहना और महिला संगठनों एवं सपा समर्थकों का मौन : घातक है यह चुप्पी 
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साड़ी पहने डिम्पल यादव को “…औरत” कहना और महिला संगठनों एवं सपा समर्थकों का मौन : घातक है यह चुप्पी 

मौलाना साजिद रशीदी की सपा सांसद डिंपल यादव पर टिप्पणी ने मचाया सियासी बवाल। अखिलेश यादव की चुप्पी और सपा के मुस्लिम वोटबैंक की रणनीति पर उठे सवाल। क्या महिला सम्मान से बढ़कर है राजनीति? पढ़ें पूरी खबर।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Jul 29, 2025, 11:29 am IST
inविश्लेषण, उत्तर प्रदेश
Dimple Yadav

डिम्पल यादव

रिपब्लिक चैनल पर पूछता है भारत में मौलाना साजिद रशीदी ने भारत की एक ऐसी सांसद के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, जो सेक्युलर कहलाती हैं और मुस्लिम उनकी पार्टी के वोटबैंक हैं, ऐसा माना जाता है। यह समाजवादी पार्टी का भी परंपरागत वोटबैंक है।

मौलाना साजिद रशीदी ने डिम्पल यादव पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “मस्जिद में गई …औरत” कहा। जबकि डिम्पल यादव उस मीटिंग में साड़ी पहनकर गई थीं। दरअसल चल रहे संसद सत्र के दौरान सपा के सांसद दिल्ली में एक मस्जिद में एक बैठक में चले गए थे। रामपुर के सानाद मोहिबुल्ला नदवी जो इस मस्जिद के इमाम भी हैं, उन्होंने सपा के सांसदों को मस्जिद में मीटिंग के लिए बुलाया था।

"Dimple Yadav nangi baithi thi"

Maulana Sajid Rashidi made disgusting remark on Akhilesh Yadav's wife. But did he or his IT Cell object to it?

Of course NOT because votebank matters more. pic.twitter.com/z97AMHfS2a

— BALA (@erbmjha) July 27, 2025

इस राजनीतिक मीटिंग को लेकर बहुत हंगामा हुआ। जहां भाजपा ने यह आरोप लगाया कि सपा अपने राजनीतिक प्रयोग के लिए मस्जिद का प्रयोग कर रही है तो वहीं सपा ने भी पलटवार किया और अखिलेश यादव ने फिर कहा कि भाजपा घृणा की राजनीति करती है।

डिम्पल यादव की अस्मिता को किया गया तार-तार

परंतु इस राजनीतिक मीटिंग के बाद डिम्पल यादव पर जिस प्रकार से हमला हुआ है और जिस प्रकार से डिम्पल यादव की महिला अस्मिता को तार-तार किया जा रहा है वह तो क्षोभ से भरने वाला है ही, मगर कुछ दिनों पहले तक एक कथावाचक के कथित अपमान को लेकर ब्राह्मण महिलाओं तक पर अभद्र टिप्पणियां करने वाले सपा समर्थक डिम्पल यादव को मौलाना रशीदी दारा ‘…औरत’ कहे जाने पर ऐसे शांत हैं, जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं।

आए दिन भाजपा सरकार को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर घेरने वाले अखिलेश यादव और खुद डिम्पल यादव की चुप्पी हैरान करने वाली है। यह चुप्पी इसलिए और हैरान करने वाली है क्योंकि अखिलेश यादव या डिम्पल यादव कोई सामान्य लोग या दम्पत्ति नहीं हैं। अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वे पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं। अखिलेश यादव इन दिनों उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरने का कोई भी अवसर छोड़ नहीं रहे हैं। वे लगातार पीडीए और महिला सुरक्षा पर योगी सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

मुस्लिमों के अपराध पर अखिलेश का मौन

पीडीए में परंतु वे केवल तभी ख्याल रख रहे हैं, जब कथित रूप से कोई अत्याचार सामान्य वर्ग के लोगों ने किया हो। मुस्लिमों द्वारा किये गए अपराधों पर वे मौन साध लेते हैं। ऐसा क्यों है, यह सहज समझा जा सकता है क्योंकि मुस्लिम-यादव वोटबैंक को लेकर वे कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं।

परंतु बात यहाँ पर ऐसी महिला के सम्मान की है जो केवल उनकी पत्नी ही नहीं है, अपितु एक सांसद भी हैं। डिम्पल यादव के लिए मौलाना रशीदी के “…औरत” वाले शब्द पर अखिलेश चुप क्यों हैं?

इससे जो सबसे बढ़कर बात उभरकर आती है वह है मौलाना का टीवी पर यह कहना कि साड़ी में पीठ दिखती है, इसलिए वह ‘… औरत’ है। डिम्पल यादव के बहाने क्या यह सभी साड़ी पहनने वाली हिन्दू स्त्रियों का अपमान नहीं है और क्या यह वह विकृत सोच नहीं है जो हर गैर-मुस्लिम महिला जो अपने धर्म और संस्कृति के अनुसार वस्त्र पहनती है, उसे नंगा ही मानती है?

बांग्लादेशी सोच का भारत में प्रदर्शन

शायद यही सोच बांग्लादेश की कथित क्रांति में दिखाई दी थी, जब शेख हसीना के ब्लाउज लूटकर लहराए गए थे। मौलाना रशीदी ने टीवी पर कहा तो वहीं मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि मस्जिद के इमाम मौलाना मोहिबुल्ला नदवी को इमामत से हटाया जाए। उन्होंने तमाम बातों को लिखा कि जैसे मस्जिद के अंदर नापाक और नाज़िश लोग नहीं आ सकते हैं। अब नापाक और नाज़िश लोगों पर लिखने बैठेंगे तो शायद लेख समाप्त ही नहीं होगा। मगर उन्होंने यह भी लिखा कि “मस्जिद के अंदर महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, मगर दो महिलाएं मस्जिद के अंदर आई और उन्होंने भी मीटिंग में भाग लिया।“

हिन्दू धर्म में छोटी से छोटी बात पर महिलाओं का विरोध खोजने वाले लोग इतने बड़े भेदभाव पर मुंह नहीं खोलते हैं कि आखिर मस्जिद के भीतर महिलाओं का प्रवेश क्यों नहीं है? इस्लाम के विषय में कथित प्रगतिशील से लेकर इस्लामिक विद्वान सहित यही कहते हैं कि इस्लाम में औरतों का बहुत आदर है और भेदभाव तो है ही नहीं। यदि ऐसा वे मानते हैं तो यदि कोई महिला गलती से उनके कथित ड्रेसकोड के अनुसार मस्जिद में नहीं भी गई थीं, तो भी क्या राष्ट्रीय चैनल की डिबेट में महिलाओं को लेकर इस तरह की टिप्पणी की जा सकती है?

यह बहुत ही अपमानजनक, क्षोभपूर्ण एवं खेदजनक होने के साथ ही एक विकृत एवं घृणित सोच से भरा हुआ वाक्य है, क्योंकि यह वाक्य बताता है कि एक बहुत बड़ा कथित वर्ग गैर-मुस्लिम महिलाओं के विषय में क्या सोचता है? और उससे भी बढ़कर है मौलाना की कही बात का मुस्लिम समाज से और सपा से और अखिलेश यादव और इन सबसे भी बढ़कर डिम्पल यादव का कुछ भी विरोध न करना।

महिला सम्मान से बढ़कर राजनीति?

यह कैसी राजनीति है जो एक महिला के सम्मान से बढ़कर है? क्या महिला सम्मान को दांव पर लगाकर राजनीतिक लाभ उठाया जा रहा है? और इन सबसे बढ़कर एक सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी के इस भयानक अपमान पर केवल इसलिए मौन है कि उसका वोट बैंक न छिन जाए, वह सत्ता पाने पर आम हिन्दू महिला के साथ क्या करेगा? क्या वह अपने वोटबैंक द्वारा महिलाओं के अपमान पर कुछ बोल सकेगा?

कथित प्रगतिशील लेखकों की चुप्पी?

यह घटना तमाम बातों की कलई खोलती है। कथित प्रगतिशीलता की, मुस्लिम प्रगतिशीलता की, पीडीए की, और सबसे बढ़कर महिला सुरक्षा की! उत्तर प्रदेश की सपा सरकार के दौरान कई लेखकों को सम्मानित किया गया था, परंतु उनमें से एक भी लेखक ने सपा सांसद के इस अपमान पर विरोध दर्ज कराया हो, ऐसा दिखाई नहीं देता है। तमाम महिला संगठन जो स्वामी अनिरुद्धाचार्य पर एक वाक्य को लेकर हमलावर हो रहे थे और महिला अपमान को लेकर सड़क पर उतर रहे थे, वह नेशनल टीवी पर एक “सेक्युलर” सांसद को “…औरत” कहने पर शांत है।

यह चुप्पी और शांति दमघोंटू ही नहीं है, अपितु बहुत घातक है!

जब भाजपा नेत्री नूपुर शर्मा पर कट्टरपंथियों ने हमला किया था या फिर जिस प्रकार से उन्हें हत्या आदि की धमकियाँ दी गई थीं, तब भी महिलाओं का ठेकेदार वह वर्ग एकदम चुप था, लेकिन यहाँ पर तो ‘सेक्युलर’ सांसद हैं, जो बिना सिंदूर अर्थात पितृसत्ता के तमाम प्रतीकों के बिना ही संसद में आती हैं, परंतु उनके साथ प्रगतिशील महिलाओं का न आना भी अपने आप में खतरनाक और क्षोभ से भरने वाला है।

 

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