भारत के सुशासन मॉडल में तेजी से उभरते ओडिशा की नई भूमिका को लेकर ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा आयोजित सुशासन संवाद : ‘ओडिशा की उड़ान’ का आयोजन आज (28 जुलाई, 2025) ताज विवांता, भुवनेश्वर में किया गया। कार्यक्रम में ओडिशा की उप मुख्यमंत्री प्रभाती परीडा ने अतीत और भविष्य विषय पर वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा से बातचीत की। पेश हैं उस बातचीत के कुछ अंश।
आप राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं। कैसे ये पदार्पण हुआ?
हम जिस पार्टी से आते हैं वो लोग, जिस विचारधारा से बढ़े हैं, वो लोग हमेशा मनुष्य को मनुष्य की ही तरह पहचान लेते हैं। मुझे लगता है कि करते-करते वकालत से शायद जब मैं समाज कल्याण बोर्ड की सदस्य बनी। इस दौरान पार्टी के कई सारे दायित्व मैंने निभाए, जैसे महिला मोर्चा की अध्यक्ष थी और फिर उपाध्यक्ष भी रही। कई सारे जिलों का प्रभार दायित्व भी संभाला। लेकिन मैं पहली बार विधायक बनी और मुझे उपमुख्यमंत्री बनी। जिन्होंने भी मुझे ये जिम्मेदारी दी, मैं उन सभी की आभारी हूं। ये उड़ीसा की महिलाओं के लिए गर्व का विषय है।
टूरिज्म एक बड़ा वर्ग है ओडिशा में, यहां तट, वन सब है, तो इसको लेकर सरकार का क्या विजन है?
ओडिशा के लोगों ने जो परिवर्तन किए हैं वो मोदी जी नेतृत्व और विश्वास के ऊपर डबल इंजन की सरकार पर भरोसा जताया है। विकास तेज गति से होगा। ओडिशा में विकास और विरासत दोनों ही हिस्सेदारी है। शायद पिछली सरकार जो थी, उन लोगों ने टूरिज्म को एक इंडस्ट्री नहीं माना। हम जानते हैं कि भारतवर्ष आध्यात्मिक और घरेलू पर्यटन में आगे है। हमार पास तो प्रभु जगन्नाथ का क्षेत्र है। उसके 30 किलोमीटर की दूरी पर एक यूनेस्को साइट कोणार्क है। जहां पर इस साल हमने आंकड़े निकाले की इस साल अब तक 65 लाख लोगों का आगमन हुआ है। इसके अलावा प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा में केवल 9 दिन में करीब 50 लाख लोग आते हैं तो सोच लीजिए कि यहां तो 35-40 लाख तक घरेलू पर्यटक ही आते हैं।
ओडिशा में विरासत और विश्वास है
डिप्टी सीएम ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि टूरिज्म को देखते हुए हम ये कह सकते हैं कि ओडिशा में विरासत और विश्वास दोनों ही है। हमारे पास ट्राइबल टूरिज्म भी है। इसके अलावा हमारे पास प्रकृति का बड़ा पोटेंशियल है। हमने इको टूरिज्म को टूरिज्म की शाखा बनाई है। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी के साथ इस साल हमारे मुख्यमंत्री पर्यटन के क्षेत्र में महिलाओं को डालने के लिए नई स्कीम शुरू की है। महिलाओं के साथ महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए टूरिस्ट फ्रेंडली पुलिस भी अनाउंस करने जा रहे हैं।
पर्यटक जब भी आते हैं तो उनमें 80 फीसदी तो महिलाएं आती हैं। महिलाओं के कारण ही टूरिस्ट बढ़ते हैं। एक साल में जितना हमने होमस्टे पॉलिसी बनाए हैं, डब्ल्यूटीएम लंदन में हमने हिस्सा लिया। मुझे लगता है कि बहुत जल्दी हमने जो भी एक साल में डेवलपमेंट किए हैं, अगले साल में वो लोगों के सामने होगा।
धार्मिक पर्यटन और पर्यटन में सामंजस्य कैसे बिठाएंगे?
हमारे यहां बुद्धिस्ड भी हैं। हम लोग उन्हें भी सपोर्ट कर रहे हैं। हमारी जो धरोहर है, किंग खारवेल, उदयगिरि में, उसे भी आगे ले जा रहे हैं। मुझे लगता है कि विकास और विरासत के साथ हमारी रेत की जो सुंदरता है, वहां जो पक्षी प्रेमी आते हैं सिर्फ तीन माह में यहां 15 लाख बर्ड लवर्स आते हैं। हमारी कोशिश है कि हम एक म्यूजियम बनाए और इससे बर्ड लवर्स को खींच सकें। मुझे लगता है कि टूरिज्म तो अब आगे बढ़ चुका है। हम हॉट एयर बैलून की व्यवस्था करने जा रहे हैं, हेली टूर भी शुरू करने की तैयारी हैष भगवान जगन्नाथ की कृपा रही तो सतकोसिया, देवरीगढ़, समिलपाल में लाइव टाइगर को देखने और कोरापुट की कॉफी की ब्रांडिंग भी हमने की है।
डबल इंजन की सरकार को आप किस प्रकार से देखती हैं?
डबल इंजन की सरकार में विकास की गति चार गुना हो जाती है। डबल इंजन की सरकार में जो दबाव आता है वो सरकार चलाने वालों के ऊपर भी रहता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि लोगों की अपेक्षाएं अधिक हो जाती हैं। इसलिए, हम कोशिश कर रहे हैं कि इंजन ही नहीं बॉडी भी स्ट्रांग। लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश है।
महिलाओं को लेकर आपकी क्या केस स्टडी है?
ये हमारा सौभाग्य है कि कई सरकारें आईं। किसी ने कालिया और बलिया के नाम पर योजना लाने का काम किया। शायद उन्होंने सुभद्रा को हमारे लिए छोड़ दिया था। जब हम आए तो हम महिलाओं के पास अपने मेनिफेस्टो के हिसाब से सुभद्रा योजना लाए।
















