बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आरजेडी में घमासान मच गया है। कल तक खुद को कृष्णा कहने वाले तेज प्रताप यादव ने ऐलान कर दिया है कि वे चुनाव अलग लड़ेंगे। और जैसे ही बड़े भाई का यह ऐलान हुआ, छोटे भाई तेजस्वी यादव ने भी साफ कर दिया कि वे भी पीछे हटने वाले नहीं हैं।
सीधी टक्कर तय : तेज प्रताप बनाम तेजस्वी
तेज प्रताप यादव, जो समस्तीपुर के हसनपुर से विधायक हैं और जिन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया गया है, ने ऐलान किया कि वे महुआ से चुनाव लड़ेंगे। उधर, जब इस पर तेजस्वी यादव से सवाल किया गया तो उन्होंने पलटवार करते हुए कहा — “मैं भी महुआ के साथ-साथ राघोपुर से चुनाव लड़ूंगा।”
तेज प्रताप का सीधा चैलेंज
इसके जवाब में तेज प्रताप ने भी एक समाचार चैनल के लाइव शो में सीधा एलान कर दिया— “अगर तेजस्वी महुआ से लड़ते हैं, तो मैं भी राघोपुर से लड़ूंगा।” यानी अब चुनावी मैदान में दोनों भाइयों की सीधी टक्कर तय है।
एनडीए को मिलेगा फायदा.!
इस भाई-भाई की जंग से सबसे ज्यादा फायदा एनडीए को मिल रहा है। बीजेपी ने चुटकी लेते हुए कहा — “राजद के अंदर महत्वाकांक्षाओं का टकराव खुलकर सामने आ गया है। यह लड़ाई दिखाती है कि सत्ता के लिए पार्टी अंदर ही अंदर कितनी बंटी हुई है।” बीजेपी का दावा है कि इस घमासान का फायदा एनडीए को मिलेगा क्योंकि वे विकास की राजनीति करते हैं, न कि झगड़े की।
जेडीयू का तंज
वहीं, जेडीयू ने भी मौका नहीं छोड़ा। पार्टी प्रवक्ता किशोर कुणाल ने तंज कसते हुए कहा — “लालू प्रसाद यादव धृतराष्ट्र की तरह आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं और उनके कृष्ण-अर्जुन अब बिहार की चुनावी महाभारत में आमने-सामने हैं।”
बड़ा सवाल- किसकी जीत, किसकी हार.?
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस चुनावी रणभूमि में तेजस्वी यादव विजय का सेहरा पहनेंगे या फिर तेज प्रताप यादव अपने भाई को कड़ी चुनौती देकर बिहार की राजनीति में अपनी खोई पकड़ वापस पाएंगे।

















