नई दिल्ली । बिहार की मतदाता सूची संसोधन को लेकर फैल रही अफवाहों और बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार चुनाव आयोग सामने आया है। आयोग ने साफ कहा है कि जो लिस्ट हाल ही में जारी हुई है, वह फाइनल नहीं बल्कि केवल एक ड्राफ्ट लिस्ट है। आयोग ने इस पर गलत जानकारी फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि लोगों में भ्रम पैदा करने की कोशिश बंद की जाए।
चुनाव आयोग का नया अपडेट
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश और उचित प्रक्रिया के बिना किसी भी मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता। अगर किसी को ERO के फैसले पर आपत्ति है, तो वह जिला मजिस्ट्रेट और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने अपील कर सकता है।
“इतना बखेड़ा क्यों खड़ा किया जा रहा?”
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब 1 अगस्त से 1 सितंबर तक पूरा एक महीना आपत्तियां दर्ज कराने के लिए रखा गया है, तो फिर अभी इतना हंगामा क्यों किया जा रहा है?
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आयोग ने बिना नाम लिए कुछ दलों और संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास 1.6 लाख BLA (Booth Level Agents) हैं, जिनके माध्यम से वे दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। फिर भी इसे फाइनल लिस्ट की तरह दिखाना गलत है।
पहले चरण का नतीजा
SIR (विशेष पुनरीक्षण अभियान) के पहले चरण के बाद चुनाव आयोग ने बताया कि अब तक 7.24 करोड़ मतदाताओं से फॉर्म मिले हैं। इनमें से 36 लाख लोग या तो कहीं और चले गए हैं या उपलब्ध ही नहीं हो पाए। वहीं, 7 लाख मतदाता ऐसे निकले जिनके नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज थे, यानी उन्होंने एक से ज्यादा बार वोटर आईडी बनवा लिया था।
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आयोग का मकसद साफ
चुनाव आयोग का कहना है कि उसका मकसद सिर्फ एक है — हर सही मतदाता का नाम सूची में हो और गलत नाम हटा दिए जाएं। आयोग ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अगर उन्हें वोटर लिस्ट में कोई गलती मिलती है, तो 1 सितंबर तक शिकायत दर्ज कराएं। आयोग ने भरोसा दिलाया कि सभी सही शिकायतों का निपटारा किया जाएगा, ताकि चुनाव पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रह सके।

















