दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसी देश, थाईलैंड और कंबोडिया, एक बार फिर युद्ध के मैदान में आमने-सामने हैं। इस बार विवाद की जड़ है 11वीं सदी का प्रीह विहार मंदिर, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर, जो कभी खमेर साम्राज्य का गौरव था, अब दोनों देशों के बीच तनाव का केंद्र बन गया है। गुरुवार, 24 जुलाई 2025 को शुरू हुई गोलीबारी और हवाई हमलों ने दुनिया का ध्यान खींचा है। आइए, इस विवाद को आम बोलचाल में समझते हैं।
मंदिर विवाद की कहानी
प्रीह विहार मंदिर, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर बसा है। इसकी नींव 11वीं सदी में खमेर सम्राट सूर्यवर्मन ने रखी थी। मंदिर में आज भी शिवलिंग मौजूद है, जो इसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से खास बनाता है। लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति ने इसे विवाद का केंद्र बना दिया। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने मंदिर पर कंबोडिया का अधिकार माना, लेकिन आसपास की जमीन का मसला अनसुलझा रहा। इसके बाद 2008 में कंबोडिया ने इसे यूनेस्को सूची में शामिल करवाया, जिससे थाईलैंड में नाराजगी बढ़ी। तब से दोनों देशों में तनाव और छोटी-मोटी झड़पें होती रही हैं।
कैसे भड़की जंग?
इस बार तनाव 28 मई 2025 को शुरू हुआ, जब एमराल्ड ट्रायंगल (थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की साझा सीमा) में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हुई। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ाई। 24 जुलाई को ता मुएन थोम मंदिर के पास भारी गोलीबारी हुई। कंबोडिया का दावा है कि थाई सैनिकों ने पहले हमला किया, जबकि थाईलैंड ने कंबोडिया पर ड्रोन और रॉकेट हमले का आरोप लगाया। थाईलैंड ने जवाब में F-16 जेट्स से हवाई हमले किए, जिससे तनाव और बढ़ गया। इस संघर्ष में कम से कम 12 लोग मारे गए और हजारों लोग विस्थापित हुए।
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चीन की भूमिका?
इस जंग पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अहम है। चीन, जो दोनों देशों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इस तनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। चीन ने कंबोडिया में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जैसे हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे। थाईलैंड में भी चीन रेलवे प्रोजेक्ट में मदद कर रहा है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह तनाव बढ़ता है, तो चीन अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर दोनों देशों को शांत करने की कोशिश कर सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे चीन का क्षेत्रीय प्रभाव और बढ़ेगा?
वर्तमान स्थिति
फिलहाल, दोनों देशों ने सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। थाईलैंड ने कंबोडिया से सभी सीमा पारगमन बंद कर दिए हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगा रहे हैं। यह विवाद अब सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीयता और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई बन गया है।

















