गत 19 से 20 जुलाई तक जलगांव (महाराष्ट्र) में विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक आयोजित हुई। इसमें देशभर के सभी प्रांतों के 265 पदाधिकारियों के साथ ही नेपाल से पधारे संगठन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने 20 जुलाई को पत्रकारों को दी। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज का संकल्प है कि अब मंदिर सरकारी कब्जे में नहीं रहेंगे। समाज अब उन्हें मुक्त कराके ही रहेगा।
हिंदू एकता पर प्रहारों का देंगे करारा जवाब
इसके साथ ही बैठक में जाति, भाषा, प्रांत, क्षेत्र व लिंग इत्यादि के आधार पर हिंदू समाज के विविध घटकों को बांटने की विभाजनकारी मानसिकता के विरुद्ध एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें सभी कार्यकर्ताओं, पूज्य संतों व सामाजिक संगठनों के साथ संपूर्ण हिंदू समाज से आह्वान किया गया कि वे समाज को तोड़ने वाली इन शक्तियों को पहचान कर अपने अंतर्निहित भेदभावों को दूर कर, संगठित रहें तो हमें न कोई तोड़ सकेगा और न ही मिटा सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कभी पीडीए तो कभी मीम-भीम, कभी आर्य-द्रविड़ तो कभी महिषासुर-दुर्गा, कभी भाषा-जाति तो कभी राज्य व क्षेत्रवाद, तो कभी ओआरपी जैसे मुद्दों के माध्यम से कुछ हिंदू-द्रोही शक्तियां हिंदू समाज की एकजुटता को तोड़ने में लगी हैं। हमने 1969 में ही संकल्प लिया था कि ‘हिन्दवा: सोदरा सर्वे, ना हिंदू पतित भवेत्’ अर्थात् हिंदू हम सब भाई हैं। कोई ऊंचा-नीचा नहीं है। हम हिंदू-द्रोहियों के विभाजनकारी षड्यंत्रों को फलीभूत नहीं होने देंगे।
इस संबंध में बैठक में ‘संगठित एवं सशक्त हिंदू ही समाज विखंडन के षड्यंत्रों का एकमेव समाधान’ नाम से पारित एक प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘इन विघटनकारी प्रवृत्तियों के पीछे विस्तारवादी चर्च, कट्टरपंथी इस्लाम, मार्क्सवाद, पंथनिरपेक्षतावादी तथा बाजारवादी शक्तियां तीव्रगति से सक्रिय हैं। इसके लिए विदेशी वित्त पोषित, तथाकथित प्रगतिशीलतावादी, मतांतरणकारी शक्तियां और भारत विरोधी वैश्विक समूह भी सक्रिय हैं। इनका अंतिम लक्ष्य हिंदू समाज को तोड़ना और भारत की जड़ों पर प्रहार करना है।’ प्रस्ताव में हिंदू समाज से आह्वान करते हुए कहा गया है कि वह ‘विखंडनकारी शक्तियों को पहचान कर अपने अंतर्निहित भेदभावों को जड़मूल से समाप्त करे।’ इसमें सरकारों से भी नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में समाविष्ट करने का आह्वान किया गया है।
मंदिर स्वाधीनता आंदोलन
श्री आलोक कुमार ने कहा कि बैठक में मंदिरों की सरकारी नियंत्रण से मुक्ति हेतु एक व्यापक कार्य योजना भी बनाई गई है। इसके अंतर्गत हिंदू समाज के प्रतिनिधि आगामी 7 से 21 सितंबर के बीच राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलकर इस संबंध में ज्ञापन देंगे। प्रत्येक महानगर में प्रबुद्ध जनों की सभा करके इसके प्रति समर्थन बढ़ाया जाएगा। दूसरे चरण में, देश की सभी बड़ी विधानसभाओं के सत्र के दौरान विधायकों से व्यापक संपर्क करेंगे जिससे वे अपनी राज्य सरकारों पर इस हेतु उचित दबाव बना कर, मंदिरों को स्वाधीन करा सकें।
विहिप के संगठन महामंत्री श्री मिलिंद परांडे, सह संगठन महामंत्री श्री विनायकराव देशपांडे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव श्री चंपत राय, कोषाध्यक्ष श्री रमेश गुप्ता के अतिरिक्त बजरंग दल, दुर्गावाहिनी, मातृ शक्ति, गोक्षा, सेवा, समरसता, सत्संग, धर्म प्रसार, मठ मंदिर जैसे आयामों के राष्ट्रीय व क्षेत्रीय प्रमुख भी उपस्थित थे।
श्रद्धालुओं ने लिया कैलाश मानसरोवर की मुक्ति का संकल्प
गत दिनों भारत-तिब्बत सहयोग मंच के कार्यकर्ताओं ने कांवड़ शिविरों एवं मंदिरों में जाकर कांवड़ियों की सेवा करने के साथ-साथ उन्हें ‘कैलाश मानसरोवर’ की मुक्ति का संकल्प दिलाया। संकल्प इस प्रकार था-”मैं पवित्र श्रावण मास में भगवान शंकर का जलाभिषेक करते हुए यह संकल्प लेता हूं कि भगवान शिव के निवास स्थान कैलाश मानसरोवर को चीन के आधिपत्य से मुक्त कराने हेतु यथाशक्ति प्रयास करूंगा। अतः इस दिशा में किए जाने वाले सभी प्रयासों में हर संभव सहयोग करूंगा। भगवान शंकर मेरे इस संकल्प को पूर्ण करने हेतु शक्ति प्रदान करें।” संकल्प का यह अभियान भारत-तिब्बत सहयोग मंच के मार्गदर्शक श्री इंद्रेश कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मंच के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री पंकज गोयल का कहना है कि यह मूल रूप से कैलाश मानसरोवर की मुक्ति के लिए व्यापक जन-जागरण अभियान है। मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वामी दिव्यानंद जी महाराज इस अभियान के संयोजक एवं मंच के राष्ट्रीय महामंत्री कपिल त्यागी सह-संयोजक हैं।

















