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खेलो भारत नीति 2025 : खेल बनेंगे विकास के इंजन

‘खेलो भारत नीति 2025’ देश के खेल परिदृश्य में समावेशिता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए बदलाव लाने वाली एक ऐतिहासिक पहल

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 24, 2025, 12:26 pm IST
in भारत, विश्लेषण, शिक्षा, खेल
इस वर्ष 4-15 मई तक बिहार में खेलो इंडिया यूथ गेम्स का आयोजन किया गया

इस वर्ष 4-15 मई तक बिहार में खेलो इंडिया यूथ गेम्स का आयोजन किया गया

देश की खेल संस्कृति को मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘खेलो भारत नीति-2025’ की घोषणा की है। यह केवल खेलों को बढ़ावा देने की नीति नहीं, बल्कि शिक्षा, आर्थिक विकास, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समावेश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को साथ लेकर चलने वाला एक समग्र दृष्टिकोण है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार इस नीति को 1 जुलाई, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया। यह 2001 की राष्ट्रीय खेल नीति का स्थान लेगी।

भारत 2036 में ओलंपिक की मेजबानी करेगा। यह नीति उसी की तैयारियों का खाका प्रस्तुत करती है। इसका प्रमुख लक्ष्य है-2036 तक भारत को शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 वैश्विक खेल राष्ट्रों की श्रेणी में लाना। इसके लिए सरकार ने एक विस्तृत रणनीतिक योजना बनाई है, जिसमें जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक भारतीय एथलीटों को पूर्ण समर्थन देने का प्रावधान किया गया है। ‘खेलो भारत नीति’ के पांच आधार स्तंभ हैं- वैश्विक मंच पर उत्कृष्टता, आर्थिक विकास के लिए खेल, सामाजिक विकास के लिए खेल, खेलों को जनांदोलन बनाना और नई शिक्षा नीति के साथ एकीकरण।

बढ़ता निवेश, बढ़ते अवसर

कुछ दशक पहले तक खेलकूद बच्चों के लिए केवल मनोरंजन का साधन हुआ करते थे। खेलों को कॅरियर के रूप में कम ही स्वीकारा जाता था। सीमित संसाधन, अपर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाएं, सीमित अवसरों और समाज की शिक्षा केंद्रित मानसिकता भी एक कारण थी। लेकिन आज परिदृश्य बदल चुका है। सरकारी पहलों, योजनाओं और नीति समर्थन ने खेलों को राष्ट्र निर्माण व कॅरियर विकल्प के रूप में स्थापित किया है।

भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह युवा शक्ति खेलों के माध्यम से राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने की क्षमता रखती है। सरकार ने 2025-26 के बजट में युवा कार्य और खेल मंत्रालय को 3,794 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो 2014-15 की तुलना में 130.9 प्रतिशत अधिक है। इसमें से 1,000 करोड़ रुपये केवल ‘खेलो इंडिया कार्यक्रम’ के लिए निर्धारित हैं। खेलो इंडिया, राष्ट्रीय खेल विकास कोष, निश्चित लक्ष्यों के लिए दिए जाने वाले पुरस्कार जैसी योजनाओं से न केवल जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान हुई, बल्कि प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति व प्रतिस्पर्धा के लिए माहौल तैयार किया गया।

आज भारत एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुका है, जहां खेल सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक सशक्त कॅरियर मार्ग, राष्ट्र निर्माण का औजार और सामाजिक समावेश का माध्यम बन चुके हैं। यह परिवर्तन एक सुविचारित रणनीति, सरकारी दृढ़ इच्छाशक्ति और नीतिगत समर्थन के परिणामस्वरूप संभव हुआ है।

खेलों से राष्ट्र निर्माण

खेलो भारत नीति-2025’ एक ऐतिहासिक पहल है, जिसका खेलों के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाना है। खेलों को स्कूल, कॉलेज, पंचायत और समुदाय स्तर पर जनांदोलन के रूप में बढ़ावा देकर मौजूदा खेल प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन लाना है। यह गांवों से लेकर वैश्विक मंच तक खेलों को मजबूत करने के लिए प्रारंभिक प्रतिभा पहचान, प्रतियोगिताओं को बढ़ावा और अवसंरचना निर्माण पर केंद्रित है। इसके प्रमुख बिंदु हैं-

  •  2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए रणनीतिक योजना और वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में भारत की पहचान बनाना।
  • ग्राम स्तर से ओलंपिक तक प्रतिभा पोषण की ठोस व्यवस्था करना।
  •  खेल पर्यटन, विनिर्माण और स्टार्टअप के माध्यम से खेलों को आर्थिक विकास का इंजन बनाना।
  •  सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और अभिनव वित्त पोषण पहलों के जरिए निजी क्षेत्र को जोड़ना।
  •  महिलाओं, जनजातीय समुदायों और दिव्यांगजनों को खेलों के जरिए आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना।
  •  राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा के साथ खेलों का एकीकरण करना।
  • खेल विज्ञान, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी का उपयोग कर प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों को वैज्ञानिक समर्थन प्रदान करना।
  •  प्रवासी भारतीय समुदाय से भारत की खेल विरासत को जोड़ना।

नीति की नींव ‘खेलो इंडिया’

‘खेलो इंडिया’ को इस नीति का मजबूत आधार बनाया गया है। इस कार्यक्रम ने देशभर में खेलों में भागीदारी और उत्कृष्टता को नई ऊंचाई दी है। 2016-17 में शुरू इस कार्यक्रम ने अब तक एक लाख से अधिक एथलीटों को प्रशिक्षित किया है। साथ ही, 3,124 करोड़ रु. की 326 खेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। 1,045 खेलो इंडिया केंद्र, 306 मान्यता प्राप्त अकादमियां और 34 राज्य उत्कृष्टता केंद्र बनाए गए हैं।

2,845 एथलीटों को छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण और चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं। अब तक 50,000 से अधिक एथलीट 17 आयोजनों में भाग ले चुके हैं। खेलो इंडिया युवाओं, विश्वविद्यालयों, पैरा एथलीटों और शीतकालीन खेलों के लिए वार्षिक आयोजन करता है। इस बार खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल का आयोजन 21-23 अगस्त को श्रीनगर में डल झील में किया जाएगा। यह देशभर के 400 से अधिक जलक्रीड़ा एथलीटों को मंच देगा।

प्रतिभा की पहचान और मार्गदर्शन

‘खेलो भारत नीति’ में ‘खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन’ (KIRTI) कार्यक्रम के तहत 9-18 वर्ष की उम्र के बच्चों की खेल प्रतिभा की पहचान के लिए 174 प्रतिभा मूल्यांकन केंद्र स्थापित किए गए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे पैरा-एथलीट रोहित कुमार ने इस नीति की सराहना करते हुए कहा कि यह शिक्षा और खेलों को साथ लाकर खिलाड़ियों को नई दिशा देगी। वहीं सिद्दी समुदाय की सामंथा सिद्दी, जो बेंगलुरु में अभ्यास और पढ़ाई कर रही हैं, ने इस नीति को वंचित समुदायों के लिए प्रेरणादायक बताया।

शिक्षा के साथ खेल का तालमेल

2018 में मणिपुर के इम्फाल में स्थापित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय खेल शिक्षा, अनुसंधान और कोचिंग का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इसकी वैश्विक साझेदारियां, जैसे कि ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा और विक्टोरिया विश्वविद्यालयों के साथ इसे विश्व स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान बनाती हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति भारत के खेल इकोसिस्टम में आमूलचूल परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय, इम्फाल और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से उच्च स्तरीय खेल शिक्षा और अनुसंधान को गति मिलेगी।

‘खेलो भारत नीति 2025’ एक क्रांतिकारी पहल है जो खेलों को केवल शारीरिक गतिविधि से उठाकर शिक्षा, समावेश और आर्थिक विकास से जोड़ती है। यह नीति भारत की युवा शक्ति को प्रशिक्षित, संगठित और सशक्त बनाकर वैश्विक खेल मंच पर नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा रही है। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब सिर्फ खेलों में भाग नहीं लेगा, बल्कि जीतने के लिए खेलेगा।

बढ़ते कदम

एशियाई खेलों में

  •  2014 : 11 स्वर्ण, 9 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 57 पदक जीते। भारत 8वें स्थान पर रहा
  •  2018 : 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य सहित कुल 69 पदक जीते। भारत 8वें स्थान पर रहा
  •  2023 : 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य सहित कुल 107 पदक जीते। भारत चौथे स्थान पर रहा

पैरा एशियाई खेलों में

2018 : 15 स्वर्ण, 24 रजत और 33 कांस्य
2023 : 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य। भारत पांचवें स्थान पर रहा

ओलंपिक में

2016 : 1 रजत और 1 कांस्य पदक जीत कर भारत 67वें स्थान पर रहा
2020 : 1 स्वर्ण, 2 रजत, 4 कांस्य जीत कर भारत 48वें स्थान पर रहा
2024 : 1 रजत और 5 कांस्य पदक जीत कर भारत 71वें स्थान पर रहा

पैरा ओलंपिक में

2020 : 5 स्वर्ण, 8 रजत और 6 कांस्य। भारत 24वें स्थान पर रहा
2024 : 7 स्वर्ण, 9 रजत और 13 कांस्य। भारत 18वें स्थान पर रहा

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