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फर्जी आधार कार्ड बनवाने वाला अशराफुल गिरफ्तार

मुस्लिम—बहुल किशनगंज में फर्जी आधार कार्ड बनवाने वालों पर कसने लगा शिकंजा। एक की गिरफ्तारी के बाद इस 'धंधे' से जुड़े लोग हुए गायब।

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Panchjanya

—सुबोध कुमार साहा
अभी बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। भले ही विरोधी दल इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन आम लोग इस अभियान को ठीक मान रहे हैं। यही कारण है कि अब तक 7.90 करोड़ मतदाताओं में से 74.39 प्रतिशत ने फॉर्म जमा कर दिए हैं। इस अभियान से वे लोग भी बेनकाब हो रहे हैं, जो बिहार में फर्जी आधार कार्ड या मतदाता पहचानपत्र बनवाते हैं। यह अच्छी बात है कि ऐसे लोग पकड़े भी जा रहे हैं। बता दें कि बिहार पुलिस ने किशनगंज जिले के जियापोखर थाना क्षेत्र के गिलहाबाड़ी गांव में अशराफुल नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। अशराफुल पर आरोप है कि वह बांग्लादेशी और नेपाली घुसपैठियों को भारतीय दस्तावेज मुहैया करवाकर उनका आधार कार्ड बनवाता था। पुलिस ने उसके पास से कई फर्जी आधार कार्ड, लैपटॉप, प्रिंटर, स्कैनर, रेटिना स्कैनर मशीन, नेपाली सिम कार्ड, दस्तावेज बनाने से जुड़ा पूरा सेटअप बरामद किया है।
उल्लेखनीय है कि अभी कुछ ही दिन पहले पता चला है कि किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जिले में जनसंख्या से अधिक आधार कार्ड बने हैं। ये सभी जिले सीमावर्ती हैं और यहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम अवैध रूप से रह रहे हैं। इनके आकाओं ने इनके आधार कार्ड भी बनवा दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, किशनगंज की आबादी 20 लाख 26 हजार 541 है, लेकिन यहां 21 लाख 31 हजार 172 आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। मतलब यहां आबादी से 1 लाख अधिक आधार कार्ड बनाए गए हैं। किशनगंज में मुस्लिमों की आबादी 68 फीसदी है। यहां 100 लोगों पर 126 आधार कार्ड जारी हुए हैं। ऐसा ही हाल कटिहार का है यहां की मुस्लिम आबादी 44 फीसदी है। इस जिले में 100 लोगों पर 123 आधार कार्ड बनाए गए हैं। अररिया में मुस्लिमों की आबादी प्रतिश्त है। यहां 100 लोगों पर 123 आधार कार्ड बनाए गए हैं। पूर्णिया में मुस्लिमों की आबादी 38 प्रतिशत है। यहां 100 लोगों पर 121 आधार कार्ड बने हैं।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जनसंख्या से अधिक जितने आधार कार्ड बने हैं, वे भारत के नागरिक नहीं हैं। यानी वे लोग घुसपैठिए हैं। इसलिए लोग कह रहे हैं कि घुसपैठियों को बचाने के लिए ही विपक्ष के नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध कर रहे हैं। इन सबके बावजूद बिहार में चुनाव आयोग बहुत ही लगन के साथ अपना कार्य कर रहा है।

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