Jamaluddin Alias Maulana Chhangur conversions Network: मौलाना छांगुर ऊर्फ जमालुद्दीन अभी जेल में है। उसने लालच देकर 1500 से ज्यादा हिंदू महिलाओं का कन्वर्जन कराया था। वह मुस्लिमों की संख्या बढ़ाकर देश की डेमोग्राफी को बदलने की योजना बना रहा था। जगह-जगह इस्लाम में शामिल होने के लिए प्रेरित करने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करवाता था। इसमें उसकी मदद उसके करीबी रिश्तेदार और अनुयायी करते थे। दुबई में भी उसका नेटवर्क था। महाराष्ट्र में भी उसने अवैध तरीके से कई हिंदुओं का कन्वर्जन करवाया था।
मुंबई में एक दरगाह के बाहर अंगूठी बेचते-बेचते वह कन्वर्जन के अंतरराष्ट्रीय सिंडीकेट का हिस्सा बन गया था।
बलरामपुर आने से पहले मौलाना छांगुर (Jamaluddin Alias Maulana Chhangur) महाराष्ट्र और दुबई में अपना नेटवर्क स्थापित कर चुका था। महाराष्ट्र में उसने बड़ी संख्या में लोगों का अवैध कन्वर्जन कराया था। खाड़ी देशों की कई ऐसी संस्थाओं में उसकी गहरी पैठ थी जो हिंदुओं के कन्वर्जन के लिए आर्थिक मदद देती हैं और इस नेटवर्क को चलाती है। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर आने के बाद उसने आसपास के जिलों में अवैध कन्वर्जन के नेटवर्क का विस्तार करना शुरू कर दिया था। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में इन बातों का दावा किया गया है।
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पैसों के बल पर चलाता था कन्वर्जन नेटवर्क, इस्लाम अपनाने के लिए देता था लालच
मौलाना छांगुर (Uttar Pradesh Hindu Conversion Case) पैसों के बल पर अपना कन्वर्जन नेटवर्क चलाता था। वह जगह-जगह इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करता था। इसमें उसकी मदद उसके करीबी रिश्तेदार और सहयोगी करते थे। उसके कई रिश्तेदारों पर आजमगढ़ में दो साल पहले अवैध कन्वर्जन का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। मीडिया रिपोर्टस में कहा जा रहा है कि मौलाना छांगुर ने बलरामपुर और आसपास के जिलों में पुलिस, प्रशासन, एलआईयू के कुछ अफसरों को मुंहमांगी रकम देकर खरीद लिया था। इस कारण उसका विरोध करने वालों पर उल्टा मुकदमा दर्ज कर दिया जाता था। उसके समर्थक कन्वर्जन का विरोध करने वालों के साथ मारपीट करते थे और फिर उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करा देते थे।

3 से 4 हजार हिंदुओं को मौलाना छांगुर ने बनाया था निशाना
कन्वर्जन गिरोह का मास्टरमाइंड मौलाना छांगुर ऊर्फ जमालुद्दीन ( Jamaluddin Conversion Case) के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उसने तीन से चार हजार हिंदुओं को निशाना बनाया था। इसी कारण उसने अपने अनुयायियों में भी पैठ बनाई थी। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से 1500 से ज्यादा हिंदू महिलाओं का वह कन्वर्जन करा चुका था। कहा जा रहा है कि उसके इस रैकेट की जांच करने वाली एसटीएफ को इसके पुख्ता सुराग मिले थे। इसके बाद ही जांच का जिम्मा यूपी एटीएस को सौंपा गया। एटीएस अवैध कन्वर्जन के शिकार बने लोगों को अब चिन्हित कर रही है। यह भी कहा जा रहा है कि कन्वर्जन हुए अधिकतर लोग छांगुर के खिलाफ कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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वह मुंबई में एक दरगाह के बाहर अंगूठी बेचता था, देखते ही देखते वह अवैध धर्मांतरण के अंतरराष्ट्रीय सिंडीकेट का हिस्सा बन गया। हिंदुओं को इस्लाम धर्म में शामिल कराने में जुटीं खाड़ी देशों की कई संस्थाओं में उसकी गहरी पैठ बन गई। वहीं बलरामपुर आने के बाद उसने आसपास के जिलों में अवैध धर्मांतरण कराना शुरू कर दिया।
कोर्ट ने उसे अब सात दिन की रिमांड पर एटीएस के सुपुर्द कर दिया है। अब उससे और उसकी सहयोगी नसरीन से आईबी और एनआईए के अधिकारी पूछताछ करेंगे। उससे कन्वर्जन के लिए विदेशों से आने वाले पैसों को लेकर भी सवाल किये जाएंगे। इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि कन्वर्जन के लिए उसके पास 100 करोड़ की रकम विदेशों से आई थी।
हर साल उर्स कराता था मौलाना छांगुर, विदेशों से भी आते थे लोग
जांच में यह भी सामने आया है कि मौलाना छांगुर मधपुर ग्राम में स्थित चांद औलिया दरगाह में हर साल उर्स करवाता था। उसमें विदेशी लोग भी शामिल होते थे। उसने नवीन घनश्याम और नीतू की नाबालिग बेटी का दुबई में धर्मांतरण कराया था। नीतू का नाम बाद में नसरीन कर दिया गया था। यह भी कहा जा रहा है कि इन तीनों जिनका कन्वर्जन उसने कराया था, उनके पासापोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते में अभी भी हिंदू नाम ही है।

मुस्लिम आबादी बढ़ाकर बलरामपुर के आसपास की बसाटवद बदलना था मंसूबा
कहा जा रहा है कि मौलाना छांगुर हिंदुओं का कन्वर्जन ( Conversion of Hindus) कराकर बलरामपुर और उसके आसपास के जिलों की बसावट बदलना चाहता था। इसके लिए उसने हजारों हिंदू और गैर-मुस्लिम महिलाओं का टारगेट किया था। गैर-मुस्लिमों को इस्लाम अपनाने के लिए हर तरह का लालच देता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह बलरामपुर में इस्लामी दावा केंद्र और मदरसा बनाना चाहता था। एटीएस ने छांगुर और उसकी करीबी नीतू उर्फ नसरीन को रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में बताया था कि वह हिंदू धर्म के प्रति नफरत फैलाकर भारत को इस्लामी मुल्क बनाना चाहता था। इसके बाद एनआईए की विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश हुसैन अहमद अंसारी ने छांगुर और नसरीन की सात दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की। मौलाना छांगुर के निशाने पर गरीब और असहाय हिंदू थे। मजदूर, कमजोर वर्ग के हिंदू और विधवा महिलाओं को वह आर्थिक प्रलोबन और नौकरी का लालच देता था। उसका साथी नवीन जिसका वह पहले ही कन्वर्जन करा चुका था, बलरामपुर आने के बाद बड़ी संख्या में जमीनें खरीद रहा था।
मौलाना छांगुर को कन्वर्जन के लिए विभिन्न देशों से 100 करोड़ की फंडिंग मिली थी। इस घिनौने खेल में हिंदू धर्म की विभिन्न वर्णों की लड़कियों के कन्वर्जन के रेट फिक्स थे। ब्राह्मण, क्षत्रिय और सरदार लड़कियों के मतांतरण के 15 लाख रुपये और पिछड़ी जातियों की लड़कियों के कन्वर्ज का रेट 10-12 लाख रुपये था। अन्य जातियों की लड़कियों के कन्वर्जन का रेट 8 से 10 लाख रुपये था।

















