गत दिनों ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, नेरी (हिमाचल प्रदेश) एवं राष्ट्रीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (एन.आई.टी.) हमीरपुर के मध्य अकादमिक गतिविधियों के आदान-प्रदान हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्तक्षर हुए। अब दोनों प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास, लोक कला व संस्कृति, समाज विज्ञान व तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।
शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो. भाग चन्द चौहान ने कहा कि शोध संस्थान, नेरी एन.आई.टी., हमीरपुर के साथ अकादमिक क्षेत्र में सहभागिता के लिए उत्साहित है और हर स्तर पर यहां के शोधार्थियों की सहायता हेतु उपलब्ध है। वहीं शोध संस्थान के संगठन सचिव डॉ. चेतराम गर्ग ने कहा कि दोनों संस्थान पहले से ही मिलकर शोध कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एन.आई.टी. के निदेशक प्रो.हीरालाल मुरलीधर सूर्यवंशी और कुलसचिव प्रो. अर्चना ननोटी पिछले वर्ष संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद में बतौर अतिथि पधारे थे।
उन्होंने संस्थान के कार्य की सराहना करते हुआ दोनों संस्थानों के मध्य एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित करने की इच्छा व्यक्त की थी। इस अवसर पर प्रो. सूर्यवंशी ने कहा कि दोनों संस्थान मिलकर हिमाचल की संस्कृति में लोक मानस द्वारा चिरकाल से विद्यमान तकनीकी पहलुओं पर गहन शोध कार्य करने की पहल करेंगे।
दो घंटे में 2,100 पौधों का रोपण

गत दिनों चित्तौड़गढ़ के विजयपुर वन क्षेत्र में केवल दो घंटे में विभिन्न प्रजाति के 2,100 पौधों का रोपण किया गया। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, एकल अभियान, पद्मावती सेवा संस्थान, नरसिंह मित्र मंडल के कार्यकर्ताओं और वन विभाग के अधिकारियों ने सहयोग किया।
एकल अभियान के उदयलाल जटिया ने बताया कि विजयपुर वन क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के सह प्रांत संयोजक धर्मपाल गोयल, जिला प्रचारक त्रिलोक, एकल अभियान के जितेंद त्रिपाठी, संजय शर्मा, पद्मावती सेवा संस्थान के बसंत गोयल आदि के नेतृत्व तथा वन विभाग के सहायक वनपाल मनोज सिंह चौधरी, मेघराज तथा तुलसा प्रजापत के सान्निध्य में ‘एक पेड़ अपनों के नाम पर’ की थीम पर 2,100 पौधों का रोपण किया गया।
इनमें नीम, पीपल, बरगद, कचनार, शहतूत, जामुन,केसिया श्याम, बोगन बेलिया, चमेली, चंपा, हरसिंगार, आम, बेर, पारस पीपल, करंज, गूलर, अर्जुन आदि औषधीय फलदार एवं छायादार पौधे शामिल हैं।

















