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दलाई लामा के विषय में दखल बर्दाश्त नहीं : भारत ने चीन को दिया कड़ा सन्देश, कहा- फैसला उन्हीं के अधिकार में…

दलाई लामा उत्तराधिकारी विवाद पर चीन के दखल को लेकर भारत ने बिना नाम लिए तीखा जवाब दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- फैसला दलाई लामा और तिब्बती परंपरा का होगा, न कि किसी राजनीतिक दबाव का।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jul 3, 2025, 03:49 pm IST
inभारत, विश्व
परम पावन दलाई लामा

परम पावन दलाई लामा

नई दिल्ली । दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं, और हाल ही में चीन की तरफ से आए एक बयान ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया। चीन ने कहा था कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन को तभी वैध माना जाएगा, जब उसमें उनकी मंजूरी होगी। अब भारत ने इस बयान पर बेहद स्पष्ट और तीखा जवाब दिया है- वो भी बिना नाम लिए।

भारत का संदेश साफ है

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- “दलाई लामा का पद सिर्फ तिब्बतियों के लिए नहीं, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों अनुयायियों के लिए बेहद आध्यात्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है। उनके उत्तराधिकारी का फैसला पूरी तरह उन्हीं के अधिकार में है, इसमें कोई दूसरा पक्ष दखल नहीं दे सकता।”

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रिजिजू का यह बयान चीन की टिप्पणी के तुरंत बाद आया और इसे भारत की तरफ से एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि धार्मिक मामलों में राजनीतिक दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भारत ने बिना लाग-लपेट के यह संदेश दे दिया है कि दलाई लामा जैसे आध्यात्मिक विषयों में बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब जब खुद दलाई लामा यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके उत्तराधिकारी की पहचान धार्मिक परंपराओं और ट्रस्ट के फैसले से तय होगी, तो ऐसे में चीन की जिद पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

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बता दें कि यह पूरा मामला सिर्फ एक धार्मिक परंपरा का नहीं है, बल्कि तिब्बत की पहचान, आज़ादी और आत्मसम्मान का भी है — और भारत इस पर खुलकर दलाई लामा के साथ खड़ा नजर आ रहा है।

क्या चाहता है चीन ?

दरअसल, चीन का दावा है कि तिब्बत उसका हिस्सा है, और इसीलिए वह दलाई लामा की परंपरा को भी अपने नियंत्रण में रखना चाहता है। बीजिंग का कहना है कि अगले दलाई लामा की नियुक्ति तभी वैध मानी जाएगी, जब चीन की सरकार उसकी मंजूरी दे।

क्या कहा दलाई लामा ने ..?

हालांकि धर्मशाला में खुद दलाई लामा ने हाल ही में यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी परंपरा (दलाई लामा) जारी रहेगी, और उनके उत्तराधिकारी को लेकर निर्णय सिर्फ गादेन फोडरंग ट्रस्ट लेगा। यह वही ट्रस्ट है जिसे दलाई लामा ने 2015 में स्थापित किया था, और अब वही संस्था इस परंपरा को आगे बढ़ाएगी।

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उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उनका उत्तराधिकारी कोई महिला भी हो सकती है, या वह किसी ऐसे स्थान पर जन्म ले सकता है जो चीन के बाहर हो। इस तरह, उन्होंने यह संकेत दिया कि उत्तराधिकारी के चयन में परंपरा, तिब्बती भावना और व्यक्तिगत इच्छा का सम्मान किया जाएगा- न कि किसी राजनीतिक दबाव का।

क्या है पूरा मामला.?

दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे ऊंचे आध्यात्मिक पद पर हैं और उन्हें अवलोकितेश्वर (करुणा के बोधिसत्त्व) का अवतार माना जाता है। उनकी पुनर्जन्म की परंपरा सदियों पुरानी है। हर बार नए दलाई लामा को खास धार्मिक प्रक्रियाओं के जरिए खोजा और मान्यता दी जाती है।

लेकिन चीन लंबे समय से इस प्रक्रिया को राजनीतिक रूप से नियंत्रित करना चाहता है। चीन पहले भी पंचेन लामा के मामले में ऐसा कर चुका है, जहां उसने खुद से एक उत्तराधिकारी घोषित किया और जिसे अधिकतर तिब्बती मान्यता नहीं देते।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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