पंजाब के जालंधर-लुधियाना नेशनल हाईवे पर फगवाड़ा के निकट एक वैष्णो ढाबे में गौमांस की फेक्ट्री की भंडाफोड़ हुआ है। मौके पर पहुंचे हिंदु संगठनों के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि यह गौमांस की फैक्ट्री रोहिंग्या मुसलमानों द्वारा चलाई जा रही है और यहा पर गौ हत्या करके उसके मास की पैकिंग की जा रही है। मौके पर पुलिस ने पहुंचकर आधा दर्जन के करीब लोगों को हिरासत में लिया है जबकि बताया जा रहा है कि फैक्ट्री का मालिक मौके से फरार हो गया।
घटना फगवाड़ा में नेशनल हाईवे पर बने एक ढाबे के साथ बने पैलेस की है जहां पर यह सारा काम किया जा रहा था। मौके पर से बरामद हुए पैकेटों पर अरबी व अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। फस्ट चॉईस नाम के ब्रांड पर इन पैकेटों पर 900 ग्राम वजन के साथ साफ तौर पर हलाल और व्हील क्यूब्स लिखा हुआ है। जानकारों की मानें तो व्हील क्यूब्स गौमांस के लिए अल्पायु बछड़ों अथवा कम उम्र की गाय जिसकी आयु 6 वर्ष या कम हो, के लिए इस्तेमाल होता है।
मौके पर से कुछ पका हुआ मास भी मिला है जिस पर हिंदु संगठनों ने दावा किया कि जो लोग इस स्थान पर गौमांस की पैकिंग करते हैं वे लोग गौमांस को पकाकर खाते भी हैं। एसएसपी कपूरथला गौरव तूरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मामले की जांच चल रही है और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, हिंदु संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि यदि इस मामले में कोई ढील बरती गई अथवा ढाबा संचालक पर कार्रवाई ना की गई तो वे लोग संघर्ष करने में देरी नहीं करेंगे। उधर, बताया जा रहा है कि मौके पर से आधा दर्जन के करीब लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बता दें कि इससे पहले कुछ वर्ष पूर्व इस स्थान से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जालंधर जिले के गोराया इलाके में भी गौमास की फैक्ट्री मिली थी और तब भी हिंदु संगठनों द्वारा ही उसका पर्दाफाश किया गया था।
प्लास्टिक के लिफाफों में रखा गया था गोमांस
गोमांस प्लास्टिक के बड़े-बड़े लिफाफों और पैकेट में भरा गया है। यह गोमांस कहां से आया और कहां सप्लाई होना था यह जांच का विषय बना हुआ है। छह से सात लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। हिंदू संगठनों के नेताओं ने रोष जताते हुए आरोपियों को फांसी देने की मांग की है।
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इसके अतिरिक्त राज्य में गोवंश की तस्करी भी बढ़ रही है, राज्य सरकार गो-कर (काऊ सैस) के नाम पर हर साल करोड़ों रूपये वसूल करती है परन्तु इसके बावजूद गायों व गोशालाओं की हालत अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

















