ईरान और इजराइल के बीच हाल ही में हुई 12 दिनों की भीषण जंग ने न सिर्फ इन दोनों देशों को, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। दोनों देशों की सेनाओं ने एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे सैकड़ों लोग प्रभावित हुए और अरबों डॉलर की संपत्ति का नुकसान हुआ। पर अब युद्धविराम की घोषणा के बाद विश्व समुदाय ने राहत की सांस ली है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन, जो अब्राहम समझौते के बाद इजराइल के साथ कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत कर चुके हैं, इस संघर्ष में पूरी तरह तटस्थ नजर आए। दोनों देशों ने युद्ध की आलोचना करने की बजाय संयम बरतते हुए अपने व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दी। UAE की ओर से एक सीमित बयान आया जिसमें ‘शांति की अपील’ की गई लेकिन न तो ईरान की निंदा की गई और न ही इजराइल की। ईरान के पड़ोसी अजरबैजान, जिसके इज़राइल के साथ रक्षा संबंध काफी गहरे हैं, इस युद्ध में अपने कदम फूंक-फूंक कर रखता रहा। तेहरान की नाराजगी से बचने के लिए अजरबैजान ने कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी, हालांकि गुप्त सैन्य सहयोग की संभावना ज़रूर जताई गई।
तुर्की ने अपने पारंपरिक अंदाज में इज़राइल की आलोचना की, पर यह आलोचना सिर्फ भाषणों और प्रेस बयानों तक सीमित रही। अंकारा ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की न तो कूटनीतिक दबाव बनाया और न ही कोई आर्थिक प्रतिबंध लगाए। मिस्र और जॉर्डन दोनों देशों की सीमाएं इजराइल से लगती हैं और ये ऐतिहासिक रूप से शांति समझौतों का हिस्सा रहे हैं। पर इस बार दोनों देशों ने बेहद संतुलित रुख अपनाया। काहिरा और अम्मान ने बस “शांति बनाए रखने” की अपील की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सक्रिय होने को कहा।












