अल्जीरिया के विवादित बॉक्सर जिनके लिंग को लेकर तरह-तरह के विवाद होते रहे थे और बार-बार यह कहा जा रहा था कि वे लड़की नहीं है इसलिए उन्हें लड़कियों की श्रेणी मे बॉक्सिंग नहीं करानी चाहिए उन्हें लेकर अब अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सिंग एसोसिएशन के प्रमुख ने कहा है कि पेरिस ओलंपिक्स में जीते हुए मेडल्स उनसे वापस लेने चाहिए।
दरअसल ईमान खलीफ़ के दो सेक्स टेक्स्ट विफल हो चुके थे। और इसके बाद ही सारा विवाद एक बार फिर से आरंभ हुआ। अब आईबीए के प्रमुख उमर क्रेमलेव इस बात को लेकर गुस्सा हैं कि आखिर कैसे ओलंपिक्स समिति ने खलीफ़ को महिलाओं की श्रेणी में खेलने की अनुमति दी थी।
लिंग परीक्षण के जो परिणाम सामने आए हैं, उसके बाद ईमान खलीफ़ को पिछली विश्व प्रतिस्पर्धाओं से बाहर कर दिया गया था। मीडिया के अनुसार आईबीए ने इस सप्ताह तक प्रक्रिया का विवरण जारी नहीं किया था, जहां यह पता चला कि खलीफ को सेंटर फॉर आर्बिट्रैशन फॉर स्पोर्ट्स (सीएएस) में परीक्षण के परिणामों के खिलाफ अपील करने के लिए 21 दिन का समय दिया गया था, जिसमें संकेत दिया गया था कि उसके पास XY गुणसूत्र थे – और इसलिए वह ‘जैविक रूप से पुरुष’ थी। मुक्केबाज ने अपील नहीं की और इसलिए उसे विश्व चैंपियनशिप से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
पेरिस ओलंपिक्स में आईबीए और इंटरनेशनल ओलंपिक्स कमिटी के बीच टकराव के कारण आईबीए का नियंत्रण उन गेम्स में बॉक्सिंग प्रतिस्पर्धा में नहीं था। आईओसी को और मुद्दों के साथ ही आईबीए के साथ यह भी शिकायत थी कि उसने वित्तीय कुप्रबंधन किया है।
इसलिए आईओसी ने बॉक्सिंग प्रतिस्पर्धा को खुद ही देखने का निर्णय लिया था और ईमान खलीफ़ को केवल इस आधार पर महिलाओं की श्रेणी में खेलने की अनुमति दे दी थी कि उसकी सरकार ने उसे महिला के रूप में पासपोर्ट जारी किया हुआ है। और इस निर्णय की घोषणा करते हुए आईओसी ने यह तक कहा था कि आईबीए का निर्णय मनमाना और एकतरफा है।
क्रेमलेव ने अब बताया है कि 2022 से 2023 तक चलने वाले दो दौर के परीक्षण के बाद खलीफ़ को सभी IBA-स्वीकृत प्रतियोगिताओं से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, दोनों ही दौरों में पुरुष गुणसूत्र XY मौजूद होने की बात कही गई थी, क्रेमलेव ने घोषणा की कि खलीफ़ से उसका ओलंपिक स्वर्ण छीन लिया जाना चाहिए।
इस बार के पेरिस ओलंपिक्स बहुत ही विवादों में रहे थे और उसमें खुलकर वोक विचारधारा दिखती रही थी।
डेली मेल में आईबीए के प्रमुख उमर क्रेमलेव के मेल स्पोर्ट्स के साथ किये गए साक्षात्कार के हवाले से लिखा है कि पूर्व आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक को इस विवाद के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, उन्हें एक ‘चूहा’ बताया जाना चाहिए, जिसने ‘खिलाड़ियों के बजाय राजनीति को पोडियम पर ला दिया है’।
उन्होनें आईओसी पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया। उन्होनें कहा कि ‘आईओसी खेल में निष्पक्षता के लिए नहीं लड़ रहा है। आईओसी अपने राजनीतिक हितों के आधार पर पदक बांट रहा है। इमान खलीफ को पेरिस से ओलंपिक पदक वापस करने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए।’
अब इस मामले को लेकर एक बार फिर से सोशल मीडिया पर चर्चाएं आरंभ हो गई हैं। मेल स्पोर्ट्स ने बहुत ही अजीब शीर्षक देते हुए लिखा है कि ईमान खलीफ़ के दो जेन्डर परीक्षणों के विफल होने से उन्हें बॉक्सिंग से प्रतिबंधित किया गया मगर डेली मेल ने अपनी हेडिंग में उसे “her” कहकर संबोधित किया है। लोगों ने प्रश्न किया कि यह कैसा शीर्षक है?
Even after the Algerian boxer Imane Khelif has failed a sex test and been proved to be biologically male – the newspapers continue to refer to him as ‘she’
How absurd! pic.twitter.com/BEsruROoB2
— Mark Irvine (@Mark1957) June 26, 2025
लोगों ने लिखा कि पूर्व आईओसी अध्यक्ष ने दो पुरुषों को महिलाओं के खेल में विजयी घोषित किया था।
During Bach’s IOC tenure, these men won Olympic medals—in *women’s* competitions. Bach knew they were men, yet he ran interference for them. In 2024 he told blatant lies about boxers Imane Khelif, Lin Yu-ting, and their sex tests overseen by the IBA. He is a disgrace to sport. https://t.co/AFsNk1HU28 pic.twitter.com/MmyKmWcGIm
— Henry Hughes (@urusernameisu) June 23, 2025
क्रेमलेव ने बताया कि खलीफ़ के लिंग परीक्षणों की विफलता के कारण ही उसे महिलाओं की श्रेणी से बाहर रखा गया था। उन्होनें लिंग परीक्षण के विफल होने के बाद की घटनाओं को बताते हुए कहा कि “’पहला परीक्षण 2022 विश्व चैंपियनशिप के दौरान किया गया था, जब हमें कुछ संदिग्ध दिखा। हमने एथलीटों के एक समूह का परीक्षण करने का फैसला किया, न कि केवल एक या दो का। दो परिणाम असामान्य आए।
उन्होनें कहा कि यह पहली बार था जब हमने इस तरह की स्थिति हमारे सामने आई थी, इसलिए हमें लगा कि इस तरह का गंभीर निर्णय लेने से पहले पूरी तरह से सुनिश्चित होने के लिए दोबारा भी परीक्षण कराया जाए।
मगर दूसरा भी परीक्षण वही आया और यह समझ से परे है कि आखिर दो विफल लिंग परीक्षणों के बाद भी उसे महिला की श्रेणी में क्यों सम्मिलित किया गया?
यह और भी हैरानी की बात है कि ईमान खलीफ़ को महिला साबित करने के लिए पूरी की पूरी लिबरल लाबी जुट गई थी और जो भी उसका विरोध कर रहे थे उन्हें महिला विरोधी, मुस्लिम महिला विरोधी आदि आदि घोषित किया जा रहा था।
अब इस खुलासे के बाद वह पूरी लाबी शांत है। क्या कभी उस लाबी से महिलाओं के प्रति किये गए इस अन्याय का उत्तर मिलेगा?












