इजरायल के साथ तनाव और अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता के बीच क्या ईरान जंग की तैयारी में जुटा है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि ईरान के तेवर तो कुछ उसी तरफ इशारा कर रहे हैं। उसने बैलिस्टिक मिसाइलों में ईंधन का काम करने वाले प्रमुख घटकों में से एक अमोनियम परक्लोरेट का, हजारों टन का ऑर्डर चीन को दिया है। ऐसे में इस बात को हवा मिल रही है कि कहीं परमाणु वार्ता को लंबा खींचकर ईरान इधर युद्ध की तैयारी तो नहीं कर रहा है?
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल ने गुरुवार को एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में उसने ईरान द्वारा चीन को हजारों टन अमोनियम परक्लोरेट का ऑर्डर देने का जिक्र किया है। दावा किया गया है कि आने वाले महीनों में ईरान पहुंचने वाली शिपमेंट का इस्तेमाल सैकड़ों मिसाइलों के उत्पादन के लिए किया जाएगा। कहा जा रहा है कि इसमें से कुछ सामग्रियों को ईरान अपने द्वारा पाले जा रहे आतंकी संगठनों यमन में हूती और दूसरे संगठनों को भी हस्तांतरित करेगा।
800 मिसाइलें की जा सकती हैं तैयार
बताया जा रहा है कि जितने अमोनियम परक्लोरेट का ऑर्डर ईरान ने चीन को दिया, उतने में कम से कम 800 मिसाइलों का उत्पादन किया जा सकता है। अमेरिका के साथ जारी परमाणु वार्ता के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वो इस वार्ता के हिस्से के तौर पर अपनी मिसाइलों की सीमा को किसी भी सूरत में नहीं स्वीकार करेगा। बता दें कि चीन को ये ऑर्डर ईरान ने हांगकांग की एक कंपनी के जरिए दिया है। उल्लेखनीय है कि ईरान के पास क्षेत्र के सबसे बड़े बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों में से एक है।
इससे पहले मंगाया था सोडियम परक्लोरेट
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इससे पहले इसी साल की शुरुआत में चीन से ईरान ने सोडियम परक्लोरेट भारी मात्रा में आयात किया था। उससे भी अमोनियम परक्लोरेट बनाया जाता है।
अमेरिकी प्रतिबंध को दिखाया ठेंगा
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका ने ईऱान पर नकेल कसने की कोशिशों के तहत उसके मिसाइल प्रणोदक खरीद खरीद से जुड़े कई लोगों और संस्थाओं पर बैन लगा दिया था। लेकिन अब ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंध की हवा निकाल दी है।

















