देश के बाघों का दोस्त चला गया। वाल्मीक थापर चले गए, ‘टाइगर मैन’ से जाने जाते श्री थापर को भारत के तमाम टाइगर रिजर्व के बारे में गहनता से जानकारी थी। जब भी वे किसी कार्यशाला में होते तो हर बार बाघों के बारे में कुछ न कुछ नई जानकारी देते। वाल्मीकि थापर ने अपनी जीवन के करीब 40 साल से ज्यादा समय वन्यजीव संरक्षण के काम में लगाए। खासकर बाघों की रक्षा पर उनका विशेष ध्यान था।
उन्होंने कई किताबें लिखीं, जो बाघों से प्यार करने वालों के पास जरूर मौजूद हैं। जब भी उनसे पूछा जाता था कि बाघों को बचाना क्यों जरूर है, तो वह कहते थे, “क्योंकि वे खाद्य श्रृंखला में सबसे ऊपर हैं। यदि आप उन्हें बचाते हैं, तो आप जंगल, आवास, मधुमक्खियां, हाथी भी बचा रहे हैं। जिस जंगल में बाघ होंगे, वह जैव विविधता से समृद्ध होगा।”
वाल्मीकि थापर ने बाघों के संरक्षण के लिए कई वृत चित्र भी बनाए और उनके चित्र दुनिया भर में मशहूर हुए। देश में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के गठन करवाने में भी उनका योगदान रहा। देश का शायद ही कोई बाघ संरक्षित जंगल होगा जो उनसे अछूता होगा। उनके जाने के बाद वन्य जीव विशेषज्ञों, बाघ विशेषज्ञों में श्री थापर का नाम हमेशा सम्मान से लिया जाता रहेगा।















