आतंकवाद के खिलाफ भारत का वैश्विक अभियान: ऑपरेशन सिंदूर और कूटनीतिक पहल
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आतंकवाद के खिलाफ भारत का वैश्विक अभियान: ऑपरेशन सिंदूर और कूटनीतिक पहल

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का वैश्विक कूटनीतिक अभियान आतंकवाद के खिलाफ मजबूत रुख दर्शाता है। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे और पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ने की कहानी। भारत की जीरो टॉलरेंस नीति और वैश्विक समर्थन की पूरी जानकारी।

Written byअभय कुमारअभय कुमार
May 24, 2025, 10:27 am IST
in भारत, रक्षा, विश्लेषण
Army Shared video of Operation Sindoor

प्रतीकात्मक तस्वीर

आतंकवाद के खिलाफ भारत के वैश्विक अभियान का असर दिखना शुरू हो गया है। पाकिस्तान की परेशानी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती जा रही है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल को अलग-अलग देशों में भेजा है। भारत के इस कदम के बहुत ही गूढ़ और दूरगामी असर देखने को मिलना शुरू हो गया है। इसके वैश्विक परिदृश्य में बहुत ही गूढ़ मायने हैं और इसका असर बहुत ही महत्वपूर्ण है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद जो कड़े कदम उठाए हैं उसके बाद इसकी अत्यंत आवश्यकता थी।  कूटनीतिक तौर पर यह जरूरी था कि दुनिया के तमाम देशों को भारत इस तथ्य से अवगत करवाए कि भारत ने किन परिस्थितियों में ये कदम उठाए हैं।  इसकी बारीकियों को दुनिया के समक्ष लाया जाए।

ऑपरेशन सिन्दूर अभी भी चल रहा है। उसमें अभी एक तरीके का विराम आया हुआ है। इसी बीच यह आवश्यक था कि विश्व समुदाय को कूटनीतिक स्तर पर अपना पक्ष बात रखी जाए ताकि देशों को पाकिस्तान की आतंक के प्रति उसके असल रवैया को दुनिया में बेनकाब किया जा सके। भारत ने इस तथ्य से दुनिया को अवगत करवा दिया है कि हमको अब कुछ कड़े और बड़े कदम लेने पड़ेंगे। भारत को जो करना जरुरी था उसको सफलतापूर्वक पूरा कर दिया और अब जरूरत थी कि विश्व के देशों को वास्तविक हालात से अवगत करवाया जाए कि आखिर भारत को यह करना क्यों जरुरी था। भारत विश्व को यह भी बताने में सफल रहा है कि इस मामले में राष्ट्रीय सहमति है और देश के सभी राजनीतिक दल एकमत हैं। देश के अंदर अलग राय रखने वाले राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर एकमत से देशहित में काम कर रहे हैं।

पाकिस्तान द्वारा कई दशकों से भारत के ऊपर आतंकवाद थोपा जा रहा है और अब भारत का जो सब्र का पैमाना समाप्त हो चुका है। भारत ने स्पष्ट तौर पर विश्व को यह बता दिया है कि अब इस तरीके के आतंकवाद को सहन नहीं करेगा। आतंकवाद की समुचित और जबरदस्त प्रतिक्रिया होगी। अब आतंकियों को खामियाजा केवल अपनी जान देकर ही नहीं चुकाना पड़ेगा, बल्कि अब उनको उससे भी बड़ा खामियाजा भरना पड़ेगा। भारत छोड़ेगा नहीं बल्कि उनके घर के अंदर घुस के उनके आकाओं को भी निशाना बनाएगा।

भारत के लिए यह बताना आवश्यक था कि अब जो इसकी बदली नीति है और जो भारत की जो अब कार्यशैली होगी वो अब इस स्तर की होगी। इस तरीके के आतंकवाद पर पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने के लिए केवल अधिकारियों के स्तर पर दूसरे देशों को समझाने के बदले भारतीय लोगों के प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भेजा जाए तो इसके दूरगामी असर होंगे। भारत ने अपनी आगे की रणनीति के हिसाब से यह कड़ा और कारगर कदम उठाया हैं।

भारत विश्व समुदाय को यह भी समझाने में सफल रहा है कि हमें आत्मरक्षा का अधिकार है और एक बहुत संतुलित माध्यम से जिससे कि एक बड़ी क्षति भी ना हो और अपने आर्थिक हितों के साथ ही अपनी जान माल भी रक्षा करने में सक्षम है। इससे हम अपनी बात दूसरे देशों को पहुंचा पाने में कितने सफल हुए हैं जो भारत ने जवाबी कार्रवाई पाकिस्तान के खिलाफ किया है वो बड़ा एक सोच समझकर लिया गया कदम है। भारत ने पूरा समय देकर और सोच समझकर सावधानी से कार्रवाई किया है। भारत को पाकिस्तान को एक सख्त संदेश देना था उसमें सफल रहा है। जवाबी कार्रवाई के पहले दौर में हमने सिर्फ आतंकियों के ठिकाने को ही निशाना बनाया है। साथ ही पाकिस्तान को स्पष्ट तौर पर संदेश दिया कि इसको यहीं पर रहने देंगे तो ठीक वरना अगर आपकी फौजों ने हस्तक्षेप किया तो भारत की जो प्रतिक्रिया बहुत ही तीव्र होगी। अगला तीव्रता का पैमाना इस बार से काफी जोरदार होगा।

भारत के सभी दलों का  प्रतिनिधिमंडल विदेशों की धरती पर जाकर यह दिखने में सफल हुआ है कि आतंकवाद के मुद्दे पर पूरा देश एकजुट है। मगर इस कदम से यह मान लेना कि इससे सारी की सारी कूटनीतिक कार्य ख़त्म हो गए और अब अन्य कदम लेने की जरूरत नहीं हैं ऐसा भी नहीं है। हमें कई स्तरों पर ऐसे ही सकारात्मक कदम लेने पड़ेंगे। इसके कई माध्यम होंगे जिसमें पत्रकारों, नागरिक समाज और अन्यों को भी शामिल करना पड़ेगा।

जापान के विदेश मंत्री ने भारत के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि आतंकवाद से किसी मायने में कोई समझौता नहीं होना चाहिए और उन्होंने भारत की प्रशंसा करते हुए भी कहा कि भारत को भी अपनी आत्मरक्षा का अधिकार है। उनके अनुसार पाकिस्तान को भी एक जिम्मेदार देश बनाना पड़ेगा।

आतंकवाद के खिलाफ सबका समर्थन प्राप्त करना चाहिए की नीति के अंतर्गत भारत के लिए जरूरी यह था कि अन्य देशों को यह बताया जाए कि भारत जिस तरह से पहलगाम आतंकी हमले में धर्म पूछकर नरसंहार से आहत हुआ है। दुनिया को पता लगना चाहिए कि पाकिस्तान ने किस तरीके के खूंखार आतंकवादी और उनके समूहों को भारत के ऊपर छोड़ रखा है। भारत अब यह बताने को आतुर है कि अब और  इसको और सहन करने को तैयार नहीं है, जिससे कि पाकिस्तान के ऊपर बाकी देशों का भी दबाव बनाया जाए। अन्य देशों को यह जानकारी हो कि भारत ने जो कदम उठाये हैं वो आतंकवादियों की सफाई के लिए मजबूरी में उठाया गया कदम है। भारत अपने गुस्से को शांत करने के लिए यह कार्रवाई पाकिस्तान में बैठे दहशतगर्दों और उनके जो सरपरस्त है उन पर जरूरी हो गया था। विदेशों में दूर बैठे बहुत लोग यह समझते नहीं है क्योंकि उनके लोग मारे नहीं जा रहे। उनकी संवेदनशीलता उस लिहाज से नहीं है जिस तरीके से होनी चाहिए थी।

पाकिस्तान ने अपनी हरकतों से खुद ही यह स्वीकार कर लिया की वो आतंकवाद का पोषक है। भारत द्वारा पाकिस्तान के आतंकी अड्डों पर हमले में जो आतंकवादी आका मारे गए उसको पाकस्तानी सेना के आला अफसर उसके ताबूत को कंधा दे रहे थे और वहां नमाज पढ़ने के लिए उपस्थित हुए थे। एक प्रकार से अब तक पाकिस्तान जो नकार रहा था वो आज दुनिया के सामने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूर्णतः खुलकर सामने आ गया है कि वो भारत में आतंक का पोषक है। इससे अब दुनिया में किसी को शंका नहीं है पकिस्तान ही भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देता है। भारत के इन कदमों से विश्व स्तर पर भारत को समर्थन के साथ ही पकिस्तान अलग-थलग पड़ता जा रहा है। पाकिस्तान को सिर्फ दो देशों तुर्किये और अज़रबैजान का ही खुल कर समर्थन मिल रहा है। अगर खाड़ी देश यूएई की बात करें या अरब देशों की बात करें तो पिछले दशक में बहुत और बड़े स्तर पर फर्क आया है। भारत और इन देशों के रिश्तों में अभी तक आर्थिक रिश्ते थे। लेकिन विगत एक दशक में अब सामरिक तरीके से एक दूसरे के तरफ बढ़ रहे हैं। खाड़ी देशों का पाकिस्तान से भौगोलिक तौर पर नजदीकी होने के बाजवूद भी इन देशों का भारत को स्पष्ट या मौन समर्थन पाकिस्तान के लिए करारा तमाचा है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का विदेशों में जाकर अपनी स्थिति से अवगत करवाना एक बड़ा और अहम कदम है, जिसका वाले समय में बड़ा असर देखने को मिलेगा। भारत को इस तरीके के और कदम लेने पड़ेंगे, ताकि सामाजिक स्तर पर अपनी स्थिति से अवगत करवाया जाए और देश जिस परिस्थिति का सामना कर रहा है उसका समझ  और जानकारी विदेशों को हो और उनमे ज्यादा संवेदनशीलता आए।  भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद के प्रति भारत के जीरो टॉलरेंस के दृष्टिकोण पर जोर दिया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री शेख नाहयान मुबारक अल नाहयान से मुलाकात के बाद शेख नाहयान ने भारत के लिए स्पष्ट समर्थन को दोहराते हुए कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात आतंकवाद से मिलकर निपटेंगे और उनका देश हमेशा भारत के साथ खड़ा रहेगा।

प्रतिनिधि मंडल ने संयुक्त अरब अमीरात की बैठकों में पाकिस्तान के दुष्प्रचार से निपटने के लिए तथ्यात्मक साक्ष्य प्रस्तुत किए और भारत को अस्थिर करने के उद्देश्य से चल रहे दुष्प्रचार अभियानों के खिलाफ चेतावनी दी। सांसद कनिमोझी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल रूस के दौरे पर गया है। रूस से भारत के हमेशा से बहुत अच्छे और सहज रिश्ते रहे हैं। रूस के साथ भारत के आर्थिक के साथ-साथ रक्षा सौदे भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे देशों में जो प्रतिनिधित्व मंडल जा रहे हैं वो एक ख़ास मकसद से जा रहे है  रूस को पता है कि भारत ने जवाबी कार्रवाई क्यों की?  रूस इन तथ्यों से अवगत है और रूस में इस के प्रतिनिधिमंडल को भेजने की जरूरत नहीं थी। एक औपचारिकता के तौर पर और रुसी जनमानस के तौर पर रिश्ता बनाए रखने और बढ़ाने के लिए सिर्फ सरकारी स्तर पर ही नहीं वरन  सरकारी स्तर के बाद संसद के स्तर पर भी रूस के लोगों के साथ साठगांठ बढ़ाना होगा।

Topics: ऑपरेशन सिंदूरभारत का आतंकवाद विरोधी अभियानindia Pakistan tensionsकूटनीतिक पहलवैश्विक समर्थन आतंकवादIndia's counter-terrorism operationsDiplomatic initiativesGlobal support for terrorismभारत-पाकिस्तान तनाव‘ऑपरेशन सिंदूरपहलगाम आतंकी हमलाPahalgam Terror Attack
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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