‘‘बिना एनआरसी के बंगाल नहीं बच सकता, हिन्दुओं को जागना होगा’’– डॉ. सुकांत मजूमदार 
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‘‘बिना एनआरसी के बंगाल नहीं बच सकता, हिन्दुओं को जागना होगा’’– डॉ. सुकांत मजूमदार 

भारतीय जनता पार्टी की प. बंगाल इकाई  के अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार कहते हैं कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हिन्दुओं की स्थिति बहुत ही खराब है। हिन्दू घुुट घुटकर जीने को मजबूर हैं।

Written byअश्वनी मिश्रअश्वनी मिश्र
Apr 29, 2025, 11:41 am IST
in साक्षात्कार

भारतीय जनता पार्टी की प. बंगाल इकाई  के अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार कहते हैं कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हिन्दुओं की स्थिति बहुत ही खराब है। हिन्दू घुुट घुटकर जीने को मजबूर हैं। आने वाले चुनाव में अगर राज्य के लोगों ने सही निर्णय नहीं लिया तो बंगाल में हिन्दुओं की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। पाञ्चजन्य के  विशेष संवाददाता अश्वनी मिश्र   ने उनसे मालदा-मुर्शिदाबाद में इस्लामिक हिंसा सहित समूचे राज्य के विभिन्न प्रासंगिक विषयों पर विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश – 

पश्चिम बंगाल जल रहा है। हिंसा, अराजकता अपने चरम पर है। मुर्शिदाबाद और मालदा में हुई इस्लामिक हिंसा इसकी गवाह है। राज्य के बिगड़ते हालात पर आप क्या कहेंगे?
देखिए, मुर्शिदाबाद के धुलियान में हिन्दुओं पर जो हिंसा हो रही है, वह एकतरफा है। यह अल्पसंख्यक हिन्दुओं के ऊपर बहुसंख्यक मुसलमानों का अत्याचार है। मुर्शिदाबाद से रात के अंधेरे में हजारों हिन्दू परिवार अपना घर, दुकान, मकान सब छोड़कर जान बचाकर पलायन करने को मजबूर हुए हैं। ममता राज में हालत यह है कि अपने ही देश में शरणार्थी शिविर में आश्रय लेने को वे मजबूर हुए हैं। आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल के हिन्दू शरणार्थी हुए हैं। यह ममता बनर्जी की करतूतों का पाप है। आने वाले चुनाव में राज्य की जनता ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को इस पाप की सजा जरूर देगी। जिस तरीके इन इलाकों की असहाय महिलाओं, गरीब मजदूरों के साथ अत्याचार हुआ है, वह असहनीय है। मैं आपके माध्यम से देश को बताना चाहता हूं कि इन इलाकों में इस्लामिक कट्टरपंथी हिन्दू महिलाओं से ये कहते हैं कि हमारे साथ चलो, नहीं तो तुम्हारे पतियों को मार देंगे। तुम लोगों ने हिन्दू घर में जन्म लिया है, इसलिए  तुम्हें जीने नहीं देंगे। यह उस राज्य के हालात हैं, जहां एक महिला मुख्यमंत्री है।

 धुलियान के पीड़ित हिन्दू कहते हैं कि ‘केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन ने कानून बनाया है, उसमें हमारा क्या दोष? मुसलमानों ने हमारा पूरा जीवन ही तहस-नहस कर दिया।’ भाजपा ऐसे परिवारों के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाने वाली है? 
हम उन सभी हिन्दू परिवारों के साथ खड़े हैं, जिन्हें इस्लामिक हिंसा का सामना करना पड़ा है। हमारे कार्यकर्ता हर स्तर पर उनकी मदद कर रहे हैं। पीड़ित हिन्दू परिवारों को हम कोई भी असुविधा नहीं होने देंगे। साथ ही मैं ये कहना चाहता हूं कि यहां के अराजक तत्वों ने इस कानून को हिन्दू विरोध में तब्दील कर दिया, क्योंकि यहां भी तो वक्फ की संपत्ति पर कुछ लुटेरे कुंडली मारकर बैठे हुए हैं तो वे भी इस कानून की जद में आएंगे ही। इसलिए माहौल ऐसा पैदा कर दो कि कोई इस संपत्ति को छू न पाए। यह दंगा-फसाद उसी कड़ी का हिस्सा है। दूसरी बात, हिन्दू समाज पर जो अत्याचार मुर्शिदाबाद में हो रहा है, वह आज बंगाल की नियति बन चुका है। जहां भी हिन्दू कम होते जा रहे हैं, वहां इस तरीके की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। कट्टरपंथियों को सिर्फ हिन्दुओं पर अत्याचार का बहाना चाहिए। इस बार वक्फ बहाना है। निश्चित रूप से ममता सरकार ऐसे उपद्रवियों को संरक्षण देती है। आज पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं की हालत बहुत ही खराब है। जब तक यहां ममता बनर्जी की सरकार है तब तक बंगाल में हिन्दू दोयम दर्जे का नागरिक है। मैं एक बात दावे के साथ कहता हूं कि अभी जो वक्फ कानून के विरोध में दंगाई नजर आए हैं, उनको इस कानून के बारे में एक लाइन की भी जानकारी नहीं है। बस ऐसे अराजक तत्वों को झूठी बातें बोलकर, बहकाकर हिंसा के लिए उकसाया जा रहा। बंगाल में यह कई सालों से चल रहा है। इस समस्या के निराकरण के लिए बंगाल में हिन्दू समाज को एकत्रित होना पड़ेगा, तभी दंगाइयों से मुकाबला करके उनका इलाज कर पाएंगे।

जिन-जिन जगहों पर दंगा-फसाद हुआ वहां के हिन्दू बहुत डरे हुए हैं। कट्टरपंथी लगातार धमकी दे रहे हैं कि ‘जब तक तुम्हारा बाप (बीएसएफ) है तब तक ही तुम सुरक्षित हो। जैसे ही यहां से बीएसएफ के जवान जाएंगे, हम फिर तुम लोगों को काटेंगे।’ ऐसे में धुलियान के हिन्दू इलाके में बीएसएफ कैंप की मांग कर रहे हैं। क्या इस विषय में आपकी संबंधित एजेंसियों से कोई बात हुई है? 
हां, मेरी भी पीड़ितों से जब बात हुई तो उन्होंने यह मांग रखी है। इसके बारे में मैंने माननीय राज्यपाल जी को बताया और देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह जी को भी अवगत कराया है। इसके अलावा पीड़ित परिवारों को राज्य के डीजीपी से भी मिलवाकर उनके दर्द को प्रशासन तक पहुंचाया। सभी पीड़ितों की एक ही मांग है कि हमें बीएसएफ कैंप चाहिए। इसके बिना यहां पर हिन्दू रह ही नहीं सकते। और यह सच्चाई भी है। आज इन इलाकों में हिन्दू असुरक्षित हैं। कब उसके घर, दुकान, खेत को लूटकर जला दिया जाएगा, कुछ नहीं कह सकते। लेकिन एक सच यह भी है कि इस सबके बावजूद बीएसएफ कैंप के लिए राज्य सरकार जगह नहीं दे रही है, क्योंकि यहां की सरकार नहीं चाहती कि हिन्दू सुरक्षित रहें।

 राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहती हैं कि जब-जब चुनाव आने को होता है, भाजपा दंगा-फसाद की राजनीति शुरू कर देती है। वह तो यह भी कहती हैं कि भाजपा और बीएसएफ मिलकर बंगाल में अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं। इस पर आप क्या कहेंगे?
ममता बनर्जी झूठ बोलने में बड़ी माहिर हैं। वह अपने बचाव के लिए कुछ भी आरोप मढ़ सकती हैं। अभी उन्होंने कहा था कि बीएसएफ ने पत्थरबाजी करवाई। इस बात को लेकर बंगाल पुलिस प्रशासन ने उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दर्ज करवाई। लेकिन उसी पुलिस ने अदालत में जो हलफनामा दिया, उसमें यही पुलिस ममता बनर्जी को झूठा साबित करती दिखती है। राज्य की जनता सब देख रही है कि दंगे की राजनीति कौन कर रहा है। कौन बंगाल में आग लगा रहा है। तुष्टीकरण की राजनीति कौन कर रहा है। भाजपा विकास की राजनीति करती है। समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान और उसके उन्न्यन के लिए काम करती है। गांव-गरीब और महिलाओं को संपन्न बनाने के लिए काम करती है। भाजपा हमेशा हिन्दुओं एवं पीड़ितों के पक्ष में रही है। हिन्दुओं पर किसी भी प्रकार अत्याचार होता है तो सबसे पहले भाजपा के लोग ही पहुंचते हैं। चुनाव जीतेंगे तब भी और हारेंगे तब भी हम हिन्दुओं के साथ रहेंगे।

सीमावर्ती जिला मुर्शिदाबाद में हिन्दू अब ना के बराबर रह गया है। क्या कहेंगे?
जो कुछ हिन्दू परिवार बचे भी हैं, वे भी घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं। चारों तरफ बांग्लादेश की सीमा है। बांग्लादेशी घुसपैठ से लेकर अवैध हरकतों तक का यह ठिकाना बन चुका है। ऐसे में इस इलाके से हिन्दुओं का पलायन देश के लिए भी गंभीर संकट का विषय है। राज्य में भाजपा की सरकार आने दीजिए। इसके बाद हम इसका इलाज सही तरीके से करेंगे। हमें सब पता है कि चीजें कानून के दायरे में रहकर कैसे ठीक होती हैं। उत्तर प्रदेश में योगी जी के नेतृत्व में चीजें ठीक हुई हैं ना। इसलिए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि बंटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो ‘सेफ’ रहोगे। एक और बात, आजादी के समय से ही मालदा और मुर्शिदाबाद में हिंसा होती रही है। इन इलाकों के मुसलमानों के पूर्वजों ने देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान के पक्ष में वोट दिया था। इसके बाद बांग्लादेश से भी इनका जुड़ाव रहता ही है। ऐसे में समझ सकते हैं कि यहां के कट्टरपंथियों की क्या मानसिकता रहती होगी।

आज पश्चिम बंगाल के कई जिलों की भौगोलिक स्थिति बिल्कुल बदल गई है। यहां हिन्दू या तो ना के बराबर रह गए हैं या जिन इलाकों में हैं, वहां पलायन की स्थिति बनी हुई है। ऐसे कौन-कौन से इलाके हैं जहां भौगोलिक स्थिति बड़ी तेजी के साथ बदल रही है, वे तस्करी एवं अवैध धंधों का केंद्र बनते जा रहे हैं?
बांग्लोदश से राज्य के जिन इलाकों की सीमा लगती है, वहां स्थितियां बड़ी तेजी के साथ बदल रही हैं। जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा, और उत्तर दिनाजपुर का एक बहुत लंबा क्षेत्र है। आप उत्तर में चले जाएं तो नदिया क्षेत्र की डेमोग्राफी बहुत खराब हो गई है। उत्तर और दक्षिण 24 परगना क्षेत्र में भी स्थिति इस कदर खराब है कि जो हिन्दू बचे हैं, उनका रहना दूभर है। मुसलमान यहां बहुसंख्यक हो चुके हैं। इसमें एक बड़ी संख्या बांग्लादेशी घुसपैठियों की ही है। मेरा मानना है कि जो स्थिति आज इन इलाकों की है, ऐसे में एनआरसी ही पश्चिम बंगाल को बचा सकता है? बिना एनआरसी के बंगाल नहीं बच सकता। बंगाल की जनसांख्यिकी बहुत तेजी से बदल रही है। इसके पीछे की वजह पिछली सेकुलर सरकारें रहीं। दूसरी बात, इन जगहों पर हिन्दुओं ने जनसंख्या नियंत्रण किया लेकिन मुसलमानों ने जनसंख्या को अंधाधुंध बढ़ाया। लेकिन इसके बारे में कोई बात नहीं करता। सरकार ने कहा कि दो से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। इस कानून को हिन्दुओं ने तो मान लिया पर मुसलमानों ने नहीं माना, जिसके कारण उनकी संख्या बढ़ती चली जा रही है। हिन्दुओं की घटती संख्या और मुसलमानों का बढ़ता वोट बैंक एक बड़ी समस्या है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में हिन्दुओं की वोट की शक्ति बढ़ा देनी चाहिए। मैं आगाह करना चाहता हूं कि अगर इन इलाकों में इसी तरह की स्थिति रही तो ये इलाके भारत में ही रहते हुए पाकिस्तान बन जाएंगे।

चोर तबरेज या गोहत्यारे अखलाक को लेकर देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न की गई थी। ऐसा माहौल बनाया गया था कि मुस्लिम समाज असुरक्षित है। इंडी गठबंधन के नेताओं का हुजूम तबरेज और अखलाक के घर लगा रहता था लेकिन मुर्शिदाबाद में चंदन और उनके पिता हरगोविंद दास की निर्मम हत्या पर इनके मुंह सिले हुए हैं। इन दोहरे चरित्र वाले नेताओं पर क्या कहेंगे?
इंडी गठबंधन की इसी दोहरी राजनीति के कारण देश की जनता ने बार-बार इन्हें नकारा है। इन लोगों ने सेकुलरिज्म का चश्मा पहन रखा है। इन्हें चंदन की मौत नहीं दिखती लेकिन अन्य समुदाय का व्यक्ति मरता है तो ये रोते हैं। इनके लिए चंदन और उनके पिता की मौत सेकुलर मौत है। लेकिन किसी मुस्लिम के साथ हुई घटना पर ये आसमान सिर पर उठा लेते हैं। हिन्दुओं के पक्ष में भाजपा के अलावा और कोई नहीं है। हिन्दुओं को भाजपा के पक्ष में आना चाहिए। यह एकत्रीकरण देश एवं दुनिया के लिए बहुत ही जरूरी है।

पश्चिम बंगाल में आज स्थिति क्या है?
पश्चिम बंगाल इस समय बहुत कठिन स्थिति में है। जो भी यहां घटित होगा वही पूरे प्रदेश का भविष्य तय करेगा। अगले चुनाव में जो भी निर्णय यहां के लोग लेंगे उसी पर निर्भर होगा कि राज्य में हिन्दू रहेंगे या 50 साल के बाद पश्चिम बंगाल के बाहर उनकी नाम मात्र की पहचान रह जाएगी।

 

Topics: इस्लामिक हिंसा का सामनामुर्शिदाबाद में हिन्दूममता बनर्जीपाञ्चजन्य विशेषमालदा-मुर्शिदाबादहिन्दुओं को जागना होगाहिन्दू घुुट घुटकर जीने को मजबूरवक्फ संशोधन ने कानून
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
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