बलिदानियों के शिरोमणि और ब्रह्मज्ञानी गुरु अर्जन देव जी
June 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम धर्म-संस्कृति

बलिदानियों के शिरोमणि और ब्रह्मज्ञानी गुरु अर्जन देव जी

श्री गुरु अर्जन देव जी के बलिदान की गाथा, जिन्होंने मुगल बादशाह जहाँगीर के अत्याचारों का सामना करते हुए सिख धर्म और मानवता की रक्षा की। उनके जीवन, गुरु ग्रंथ साहिब के संपादन और सिख इतिहास में उनके योगदान के बारे में जानें।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
Apr 20, 2025, 10:32 am IST
in धर्म-संस्कृति
Guru Arjan dev ji

गुरू अर्जन देव जी

‘तेरा कीआ मीठा लागे।
हरि नामु पदारथ नानक मांगे॥’

ये शबद गुरु अर्जन देव ने उस समय कहे थे , जब अय्याशी के सरताज़ जहाँगीर के आदेश पर उन्हें प्रकारांतर से इस्लाम मजहब कबूल करने के लिए, रुह कंपा देने वाली यातनाएं दी जा रही थीं। भयानक यातनाओं के बाद भी आतातायी मुगल, गुरु अर्जन देव को उनके धर्म से तिल भर भी ना डिगा सके और इस तरह यातनाओं के अतिरेक से उनका “स्व” के लिए महा बलिदान हुआ। ऐसी हुतात्माओं की जीवनी और मुगलों के कुकृत्यों के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए! ताकि भावी पीढ़ी को भी तो पता चले कि तथाकथित सेक्युलरों, वामपंथियों और परजीवी इतिहासकारों ने क्या छुपाया है? क्या गुनाह किया है?

गुरु अर्जन देव मानवीय आदर्शों पर अडिग रहने के लिए, अडिग रहने का उपदेश देते थे। गुरु जी एक महान आत्मा थे। उनके भीतर धार्मिक और मानवीय मूल्यों, निर्मल प्रवृत्ति, सहृदयता, कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों को देखकर उनके पिताजी श्री गुरु रामदास जी ने सन 1581 में श्री गुरु अर्जुन देव जी को पांचवा सिख गुरु के रूप में “गुरु गद्दी” पर सुशोभित किया था। इस समय गुरु अर्जुन देव जी की उम्र 18 साल और साढ़े चार महीने की थी।

मानवता के सच्चे सेवक, धर्म के रक्षक, शांत और गंभीर स्वभाव के स्वामी श्री गुरु अर्जुन देव जी अपने युग के सर्वमान्य लोकनायक थे। वह दिन-रात संगत की सेवा में लगे रहते थे। उनके मन में सभी धर्मों के प्रति अथाह सम्मान था। उनका बलिदान सिख धर्म के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि इसके बाद ही सिख छठवें गुरु हरगोविंद जी के नेतृत्व में एक महान सैनिक शक्ति के रुप में परिवर्तित होते हैं। अपनी मृत्यु के पूर्व गुरु अर्जन देव ने अपने पुत्र हरगोविंद को यही संदेश भेजा था कि “उससे कहना कि वह शोक न मनाए और न पुरुषत्वहीन व्यक्ति की भांति रोए बल्कि ईश्वर की प्रार्थना करे। वह अपने सिंहासन पर पूर्ण शस्त्र धारण करके बैठे और अपनी सामर्थ्य के अनुसार बड़ी से बड़ी सेना रखे।”

श्री गुरु अर्जन देव का जन्म वैशाख बदी 7 सम्वत 1620, तदनुसार, तत्समय, 15 अप्रैल सन् 1563 को गोइंदवाल साहिब में हुआ था। तत्कालीन संदर्भ में उनकी जयंती नानकशाही जंतरी (पंचांग) संवत 557 के अनुसार, वैशाख कृष्ण सप्तमी 20 अप्रैल को है। उनके पिता का नाम श्री गुरु रामदास जी और माता का नाम बीवी भानी जी था। आपका पालन-पोषण गुरु अमरदास जी (गुरु अर्जुन देव जी के नाना जी) जैसे गुरु तथा बाबा बुड्ढा जी जैसे महापुरुषों की देख-रेख में हुआ। आप जी बचपन से ही बहुत शांत स्वभाव तथा पूजा भक्ति करने वाले थे। आपके बाल्यकाल में ही गुरु अमरदास जी ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक बहुत बाणी की रचना करेगा। गुरु जी ने कहा था ‘दोहता बाणी का बोहेथा’। आप के दो भाई बड़े पृथ्वीचंद और महादेव जी थे। वे गुरु रामदासजी की तीसरे व सबसे छोटे पुत्र थे।

जब गुरु अर्जन देव जी की उम्र 16 वर्ष की हो गई तो 1579 ई० (23 आषाढ़ संवत) को उनका विवाह श्री कृष्ण चंद जी की पुत्री गंगा जी से हुआ। उनका विवाह जिस स्थान पर हुआ था वहां पर आज भी एक सुंदर गुरुद्वारा बना हुआ है। गुरु रामदास जी ने अपने पुत्र गुरु अर्जुन देव जी को लाहौर भेजा था। वहां से गुरु अर्जन देव जी ने अपने पिता को 3 चिट्ठियां लिखी थी, जिसमें उन्होंने पिता से मिलने की इच्छा व्यक्त की थी। गुरु रामदास जी यह चिट्ठी पाकर बहुत खुश हुए। उन्होंने हर प्रकार से गुरु अर्जन देव जी को गद्दी के योग्य समझा। उन्होंने अपने भाई गुरदास और बाबा बुड्ढाजी से भी इसके लिए परामर्श लिया।

गुरु रामदास जी ने सिख संगत के सामने गुरु अर्जन देव जी को गुरुनानक देव जी द्वारा चलाई गई रीति के अनुसार, पांच पैसे दिए। गुरु अर्जन देव जी ने पैसे और नारियल लेकर तीन परिक्रमा करके गुरु नानक जी की गद्दी को माथा टेक दिया। इस तरह गुरु अर्जन देव जी को गुरु गद्दी मिली। उन्होंने समस्त सिख समुदाय के साथ-साथ मानवता की भलाई करने का प्रण लिया था।

मुग़ल बादशाह अकबर के बाद में उसका विलासी पुत्र जहाँगीर सिहांसन पर बैठा। वो बहुत बड़ा नशेड़ी था। जहाँगीर नूरजहां गुट के साथ शेख़ अहमद सरहिंदी और शेख़ फ़रीद बुखारी से प्रभावित था। इसी कारण जहाँगीर सिर्फ़ एक कठपुतली बन गया और असली बादशाह तो नूरजहां गुट बना हुआ था। बादशाह जहाँगीर केवल अय्याश था, विलासिता के कारण शराब में डूबा रहता था। ऐसी दशा के कारण शहजादा खुसरो ने अपने पिता के विरुद्ध बगावत कर दी और वो गुरु अर्जुन देव जी के पास आ गया।

शेख़ अहमद सरहिंदी ने खुसरो की इस घटना से लाभ उठाने की योजना बनाई। जिसके अनुसार इस्लाम के विकास में बाधक, श्री गुरु अर्जुन देव जी को समाप्त करवाने का विचार बनाया। उसने गुरुजी पर दोष आरोपित किया कि गुरु अर्जुन देव जी ने खुसरो की सेना को भोजन इत्यादि से सहायता की थी, गुरुजी ने अपने ग्रंथ में इस्लाम की तौहीन (निन्दा) लिखी है। इसलिए गुरु जी को दरबार में पेश होने को बोला और साथ में गुरु ग्रंथ साहिब जी को भी लाने को बोला। गुरुजी, गुरु ग्रंथ साहिब जी और कुछ सिखों के साथ लाहौर में पहुंच गए। वहाँ पर उन्हें खुसरो को संरक्षण देने के आरोप में बाग़ी घोषित कर दिया था, दूसरे आरोप में कहा कि वे इस्लाम के विरुध्द प्रचार करते हैं। इसके उत्तर में गुरुजी ने सभी बातों का खंडन करते हुए कहा कि गुरुनानक के दर पर कोई भी व्यक्ति आ सकता है, वहाँ राजा व रंक का भेद नहीं किया जाता। आपके पिता अकबर अपने समय पर इस दर पर आये थे।

गुरुजी का उत्तर सुनकर जहाँगीर तो सन्तुष्ट हो गया, किन्तु शेख अहमद सरहिंदी ने कहा कि उनके ग्रंथ में इस्लाम का अपमान क्यों किया है,जबकि उसमें हज़रत मुहम्मद साहब की तारीफ़ की जानी चाहिए, इस पर बादशाह ने गुरु ग्रंथ साहिब जी की व्याख्या करने को कहा, लेकिन गुरु ग्रंथ साहिब में किसी भी धर्म के विरुद्ध कुछ भी नहीं मिला। इस पर बादशाह शांत हो गया, लेकिन शेख़ अहमद सरहिंदी और शेख फ़रीद बुखारी जो कि पहले से आगबबूला हुए बैठे थे। उन्होंने अय्याश बादशाह जहांगीर को अपनी बातों में लपेटकर, उसे गुरुजी को दंड देने के लिए राज़ी कर लिया। इस तरह बादशाह ने दो लाख रुपए दंड का आदेश दिया, और बादशाह वहाँ से चला गया। गुरुजी ने भुगतान करने से मना कर दिया क्योंकि जब कोई अपराध ही नहीं किया तो दण्ड क्यों भरा जाए?

गुरु जी को विलासी जहांगीर ने जानबूझकर, लाहौर के सूबेदार मुर्तजा खान के हवाले कर दिया था और मुर्तजा ने गुरुजी को मारने के लिए दीवान चंदू शाह के हवाले कर दिया। चंदू शाह भी यही चाहता था, क्योंकि अपनी लड़की की शादी गुरुजी के पुत्र से करना चाहता था, जिसके लिए गुरु जी ने पहले ही मना कर दिया था। दीवान चंदू लाल सोचता था कि गुरु जी को मनाने में वह सफल हो जाएगा। लेकिन गुरु जी ने उसकी बात मानने से मना कर दिया। गुरु जी ने उसके घर का अन्न-जल भी स्वीकार न किया। चंदू ने बहुत उल्टे-पुल्टे हथकंडे अपनाये। अंत मे उसने गुरु जी को भूखे-प्यासे ही एक कमरे में बंद कर दिया।

बस फ़िर क्या था सरकारी शैतानों को निर्धारित षड्यंत्र के अनुसार कार्य करने का अवसर प्राप्त हो गया। उन्होंने चन्दू को मोहरा बनाकर अपने विश्वास में ले लिया और गुरु जी को लेकर लाहौर के क़िले में आ गए। इस तरह शेख अहमद सरहिंदी ने परदे की ओट में रह कर ,शाही काजी से गुरुजी के नाम का फ़तवा जारी कर दिया। फ़तवे में कहा गया कि गुरु अर्जुन देव जी दण्ड की राशि अदा नहीं कर सके। अत: वह इस्लाम कबूल करले अन्यथा मृत्यु के लिए तैयार हो जाये। गुरु जी ने कहा कि यह शरीर तो नाशवान है। फ़िर मोह कैसा। आपने जो मनमानी करनी है उसे कर डालो। इस पर काजी ने इस्लामी नियमावली के अनुसार यासा के कानून के अंतर्गत मृत्यु दण्ड का फ़तवा दे दिया। वस्तुत: यासा कानून, चंगेज खान के समय मंगोलों में प्रचलित हुआ था, और फिर तुर्कों में आया था, जिसमें बिना रक्त बहाए, भयानक यातनाएं देकर मारा जाता है।

शेख अहमद सरहिंदी ने अपने रचे षडयंत्र के अनुसार, गुरुजी को यातनाएं देकर इस्लाम करवा लेने की योजना बनाई। गुरु जी को किले के आंगन में कड़कती धूप में खड़ा कर दिया, किन्तु वे तो आत्मबल के सहारे अडिग खड़े रहे। जल्लाद भी गुरु जी दबाव डाल रहा था कि इस्लाम स्वीकार कर लो, क्यो अपना जीवन व्यर्थ में खोते हो। परंतु गुरुजी ने साफ इनकार कर दिया। दुष्टों ने गुरु जी को एक लोह (रोटी बनाने का एक बहुत बड़ा तवा) पर बिठा दिया जो उस समय जेठ माह की कड़ाके की धूप में आग जैसी गर्म थी, फिर भी गुरुजी अडिग रहे। जैसे कोई आदमी तवे पर नहीं, बल्कि कालीन पर विराजमान हो।

गुरुजी पर जब कोई असर ना हुआ, तो जल्लादों ने गुरुजी को चुनौती देकर कहा कि अब भी समय है सोच विचार कर लो, अभी भी जान बख्शी जा सकती है। इस्लाम स्वीकार कर लो। गुरुजी के मना करने पर गुरु जी के सिर में गर्म रेत डालनी आरंभ कर दी, जिसके कारण गुरु जी के नाक से खून निकलने लगा और वे बेसुध हो गए। जल्लादों ने देखा कि उनका काम तो यासा क़ानून के विरुद्ध हो रहा है तो उन्होंने ने गुरुजी के सिर में खौलता पानी डाल दिया, ताकि यासा के अनुसार, दण्ड देते समय खून नहीं बहना चाहिए। सिर में पानी डालने से जब कोई परिणाम न निकला तो जल्लादों ने परेशान हो कर उनको उबलते पानी के देग में बिठा दिया।

‘ज्यों जलु में जलु आये खटाना त्यों ज्योति संग जोत समाना’ के महावाक्य के अनुसार गुरु जी ने जब अपना शरीर छोड़ दिया तो अत्याचारियों ने इस जघन्य हत्याकांड को छिपाने के लिए गुरु जी के पार्थिव देह को रात्रि के अंधकार में रावी नदी के जल में बहा दिया। इस जघन्य पाप को छुपाने के लिए कोतवाल ने दीवान चन्दू को बुलाकर उसको अपने पक्ष में लेकर पुनः मोहरा बनाया। दीवान चन्दू से कहा गया क्योंकि हमने गुरु जी को तुम्हारे यहाँ से हिरासत में लिया था, इसलिए यह अफवाह फैला दो, कि गुरु जी ने स्नान करने की इच्छा प्रकट की थी, इसलिये वह नदी में बह कर शायद डूब गए अथवा बह गए होंगे, परंतु सच तो यह है कि उनका शरीर आलोप हो गया था। 30 मई 1606 ई० (ज्येष्ठ सुदी चौथ संवत 1553 विक्रमी) अर्जुन देव जी का सिख धर्म की ओर से प्रथम बलिदान था। जिस स्थान पर गुरु अर्जुन देव जी का शरीर रावी नदी में विलुप्त हुआ था, वहां गुरुद्वारा डेरा साहिब (जो अब पाकिस्तान में है) का निर्माण किया गया है। दीवान चंदू शाह को अपने किए की सजा मिली। श्री गुरु अर्जुन देव जी को उनकी विनम्रता के लिए याद किया जाता है। ऐसा सर्वश्रुत है कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में किसी को दुर्वचन नहीं कहा था।

गुरु अर्जन देव जी की बानी (उपदेश) गुरु ग्रंथ साहिब में 30 रागों में संकलित है। गणना की दृष्टि से सबसे अधिक बानी (उपदेश) पांचवे गुरु श्री अर्जन देव जी की है। गुरु ग्रंथ साहिब जी में कुल 31 राग हैं जिसमें जय जयवंती राग को छोड़कर बाकी सभी रागों में गुरु अर्जन देव जी की गुरबाणी (उपदेश) दर्ज हैं। यह 2218 श्लोक के रूप संकलित है। उनकी मुख्य रचनाएँ –1. गौउडी सुखमनी 2. बारामाह माझ 3. बावन अखरी आदि 15 मुख्य रचनाएँ है।

गुरु अर्जन देव जी ने अमृतसर नगर का निर्माण कार्य आगे बढ़ाया था। उन्होंने अमृत सरोवर का निर्माण करवाया और उसमें हरमिंदर साहिब की स्थापना करवाई। गुरु अर्जन देव जी के समय में तरनतारन नगर बसाया गया था। गुरु अर्जन देव जी ने सभी जातियों के उद्धार के लिए सामाजिक कार्य किए थे। गुरु हरगोबिंद जी गुरु अर्जन देव जी के पुत्र थे। वह सिखों के छठे गुरु बने। हिन्द की चादर और सिखों के नवम गुरु तेग बहादुर जी गुरु अर्जुन देव जी के पोते थे।

गुरु अर्जन देव जी ने सभी गुरुओं की बानी (उपदेश) को एक स्थान पर एकत्रित करने का महान कार्य किया था। गुरु ग्रंथ साहिब में 36 महापुरुषों की वाणी: गुरु ग्रंथ साहिब में 6 गुरु साहिबान, 15 भक्तों, 11 भाटों एवं 4 निकटवर्ती सिखों यानी कुल 36 महापुरुषों की वाणी संकलित है। यह कार्य सन 1601 से सन 1604 की अवधि के बीच पूरा करवाया गया था (गुरु तेगबहादुर जी की वाणी बाद में दर्ज करी गई) 30 अगस्त 1604 ई० को दिव्य ग्रंथ को पहली बार दरबार साहिब में प्रकाशित किया गया था।

संपादन कला के गुणी गुरु अर्जन देव जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का संपादन भाई गुरदास की सहायता से किया था। उन्होंने रागों के आधार पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में संकलित वाणियों का जो वर्गीकरण किया है, उसकी मिसाल मध्यकालीन धार्मिक ग्रंथों में दुर्लभ है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में कुल 5894 शबद हैं जिनमें से 2216 शबद श्री गुरु अर्जुन देव जी के हैं।

Topics: Sikh historyGuru HargobindReligious Toleranceमुगल अत्याचारMughal atrocitiesश्री गुरु अर्जन देव जीबलिदानजहाँगीरsacrificeसिख इतिहासगुरु ग्रंथ साहिबगुरु हरगोविंदsikhismधार्मिक सहिष्णुताGuru Granth SahibShri Guru Arjan Dev Jiसिख धर्मJahangir
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

अनुच्छेद 370 हटाए जाने से डॉ. मुखर्जी का सपना साकार हुआ: CM मोहन माझी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री दत्तात्रेय होसबाले

‘अविनाशी और शाश्वत होते हैं मंत्र’

एकात्म पर्व को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव। मंचस्थ हैं ( बाएं से) प्रो. यज्ञेश्वर शास्त्री, स्वामी वेदतत्त्वानंद पुरी, पद्मश्री निवेदिता भिड़े, द्वारका शंकराचार्य सदानंद सरस्वती एवं अन्य पूज्य संत जन

एकात्म पर्व 2026 : परंपरा और नवचेतना का मेल

गुरु तेग बहादुर प्रकाश पर्व: ‘धरम हेत साका जिनि कीआ’

Suprime Court

धर्म बदलने पर नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति का दर्जा : सुप्रीम कोर्ट

गणेश शंकर विद्यार्थी

स्वतंत्रता का प्रज्वलित सूर्य: कैसे गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपनी कलम और प्राणों से इतिहास लिखा

Load More

ताज़ा समाचार

Rajkot Nandini Bosamiya Suicide Case Aslam Hussein Sama Live In Partner Torture Investigation

“पापा मैं जिंदगी की जंग हार गई हूं”: राजकोट में मुस्लिम प्रेमी का टॉर्चर और हिंदू लड़की की मौत, परिजनों को हत्या का शक

Rahul Gandhi

‘कन्फ्यूजन’ या राजनीतिक आरोपों की जल्दबाजी? राहुल गांधी का बयान पर खेद, लेकिन सवाल बरकरार !

Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने मानहानि मामले में हाईकोर्ट में लिखित आवेदन देकर बयान पर जताया खेद

50 Years of Emergency India Sunil Ambekar Ram Bahadur Roy Patna Seminar RSS

आपातकाल की सबसे बड़ी सीख : जागरूक समाज ही लोकतंत्र का वास्तविक प्रहरी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

रानी दुर्गावती के नाम पर होगा जबलपुर एयरपोर्ट का नाम, केन्द्र को भेजेंगे प्रस्ताव : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

maharashtra government considers printing bride groom dob on wedding cards

महाराष्ट्र में बाल विवाह पर कड़ा प्रहार: शादी के कार्ड पर छपेगी दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि! सरकार ला रही नया नियम

israel will not withdraw from southern lebanon defence minister israel katz

‘अमेरिका कहेगा, तब भी नहीं हटेंगे’ : दक्षिणी लेबनान पर इज़राइल का बड़ा एलान

rashtra sevika samiti praveen shiksha varg concludes nagpur shanta kumari

“वैश्विक संघर्षों के बीच हिंदू जीवन-दृष्टि ही दिखाएगी शांति का मार्ग” : प्रमुख संचालिका शांता कुमारी

AAP MLA Chaitar Vasava Bharuch Court Summons Bharuch Police Case Investigation

जेल में बंद AAP विधायक चैतर वसावा की मुश्किलें और बढ़ीं: अब भरूच कोर्ट ने भेजा समन; पुलिस की बदनामी करने का आरोप!

howrah shibpur tmc leader attacks-bjp supporting locality manoj khan

हावड़ा: शिवपुर में TMC नेता की अगुवाई में हुई भारी बमबाजी और फायरिंग, भाजपा नेता थे निशाना, जमकर लगे मजहबी नारे

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies