पाञ्चजन्य गुरुकुलम : प्रतापानंद ने बताए गुरुकुल से डिजिटल युग तक के रहस्य
August 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

Panchjanya Gurukulam 2025: गुरुकुल से डिजिटल युग तक, प्रतापानंद झा ने खोले अनोखे रहस्य! परंपरा और तकनीकी का अद्भुत संगम

पाञ्चजन्य द्वारा आयोजित 'गुरुकुलम' कार्यक्रम में प्रतापानंद झा ने डिजिटल युग में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, वैदिक हेरिटेज पोर्टल और ISO सर्टिफाइड डिजिटल रिपॉजिटरी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। परंपरा और आधुनिकता के संगम पर हुई गंभीर चर्चा।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Apr 6, 2025, 04:21 pm IST
inभारत, गुजरात

ध्रांगध्रा, सुरेंद्रनगर (गुजरात) । राष्ट्रीय पत्रिका पाञ्चजन्य द्वारा श्री स्वामीनारायण संस्कारधाम गुरुकुल, ध्रांगध्रा, सुरेंद्रनगर में आज 6 अप्रैल 2025 को “भारतीय ज्ञान परंपरा का विस्तार एवं आधार: गुरुकुल” विषय पर एक दिवसीय गुरुकुल केंद्रित कार्यक्रम “गुरुकुलम” का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कला केंद्र (IGNCA) के प्रतापानंद झा ने “Convergence of Tradition and Modernity in Digital Media” विषय पर अपनी बात रखी।

प्रतापानंद झा ने अपने संबोधन में कहा, “अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष जीवन के मुख्य लक्ष्य हैं। इन्हें पाने के लिए दो तरह के मार्ग हैं- प्रवृत्ति मार्ग और निवृत्ति मार्ग। मोक्ष निवृत्ति मार्ग का सूचक है, जबकि काम और अर्थ प्रवृत्ति मार्ग के सूचक हैं। धर्म इन सबके बीच सामंजस्य स्थापित करता है। इनके कार्यान्वयन के लिए हमारे यहां चतुर्दश और अष्टादश विद्याओं की एक विस्तृत योजना बनाई गई। यह रूपरेखा मुंडकोपनिषद में स्पष्ट कर दी गई थी। मुंडकोपनिषद में परा और अपरा विद्याओं का विस्तृत विवरण मिलता है। परा विद्या अक्षर विद्या है, जबकि अपरा विद्या में चारों वेद और वेदांगों का वर्णन मिलता है। जब हम वेदों की बात करते हैं, तो वेदों में केवल संहिता की बात नहीं होती। वेदों में संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद – इन सब का समग्र रूप शामिल है। इसीलिए जब हमने वैदिक हेरिटेज पोर्टल बनाया था, तो इसे इस व्यापक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “मुंडकोपनिषद से आगे बढ़ते हैं, तो इसमें दस विद्याओं को चतुर्दश विद्या बताया गया। फिर यही चतुर्दश विद्या आगे बढ़कर जब विष्णु पुराण और भविष्य पुराण की बात आती है, तो इसमें चार उपवेदों का भी समावेश किया गया – आयुर्वेद, धनुर्वेद, गंधर्वशास्त्र और अर्थशास्त्र। अब अगर हम भारतीय कलाओं की बात करें, तो विष्णु धर्मोत्तर पुराण में, जो चौथी शताब्दी के आसपास का है, कला के पांच रूपों के बारे में बताया गया है। ये हैं – वाङ्मय, प्रासाद लक्षण, प्रतिमा लक्षण, चित्रसूत्र और नृत्य सूत्र। जब हम वाङ्मय की बात करते हैं, तो हम जानते हैं कि यह हमारे मौखिक परंपरा से आगे आई है। गुरु-शिष्य परंपरा से यह परंपरा विकसित हुई है। इसका सबसे बड़ा संग्रह संस्कृत में है। पूरी दुनिया में जितने भारत के पास मैन्यूस्क्रिप्ट हैं, उतने कहीं नहीं हैं। इन मैन्यूस्क्रिप्ट में 60% केवल संस्कृत में हैं। लेकिन संस्कृत केवल देवनागरी या किसी एक विशेष लिपि में नहीं लिखी गई है। संस्कृत लगभग 22 लिपियों में लिखी गई है – गुजराती, बांग्ला, तमिल, तेलुगु आदि। जब भी मैं संस्कृत के बारे में सोचता हूं, तो मुझे लगता है कि संस्कृत एक बहुत बड़ा अभिलेखागार है। इसे डिकोड करने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। लेकिन केवल संस्कृत से काम नहीं चलेगा। हमें यह भी देखना होगा कि हमारे यहां शास्त्रीय परंपरा और लोक परंपरा साथ-साथ चली हैं। इसीलिए संस्कृत के ग्रंथों का जो अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में आगमन हुआ, उसे बनाया गया, उसका अनुवाद हुआ। कई ग्रंथों पर काम हुआ और इन क्षेत्रीय ग्रंथों के आधार पर भी कई बार संस्कृत ग्रंथों में संशोधन किया गया।”

उन्होंने परंपरा और कला के एकीकरण पर जोर देते हुए कहा, “जब हम प्रासादलक्षण की बात करते हैं, तो आर्किटेक्चर की बात करते हैं। आइकनोग्राफी की बात करते हैं, तो इसके ऊपर भी काफी एकीकरण की बात आती है। अब इन सबको समावेश कैसे करें, एकीकरण कैसे करें? इसके लिए हमने गीत गोविंद पर काम किया। गीत गोविंद 12वीं शताब्दी में लिखी गई थी। इसके पदों का गायन आज भी केरल के गुरुवायुर मंदिर में हो रहा है। यह 800 साल की लंबी परंपरा का हिस्सा है। इसमें जितने भी हमारे संगीत स्कूल, नृत्य स्कूल और चित्रकला स्कूल हैं, इन सभी में इन अष्टपदियों का प्रतिनिधित्व हुआ है। इसी को एकीकृत करने के लिए हमने गीत गोविंद में काम किया, जिसे आप मल्टीमीडिया के जरिए देख सकते हैं। यह हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध है।”

डिजिटल माध्यम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “आज की तारीख में अगर हम डिजिटल माध्यम की बात करें, तो जो डेटा हम बना रहे हैं, वह अधिकतम डिजिटल माध्यम से ही बना रहे हैं। चाहे हम टेक्स्ट बना रहे हों, मैसेज बना रहे हों, किताबें बना रहे हों या फोटोग्राफी कर रहे हों, वह सब डिजिटल फॉर्मेट में हो रहा है। इस डिजिटल डेटा को लेकर भविष्य में क्या योजना है, इसे समझाना बहुत जरूरी है। इसके स्वरूप को समझना बहुत जरूरी है। आज की तारीख में अधिकतम आबादी के एक बहुत बड़े हिस्से के पास इसकी उपलब्धता है। हम इस पहुंच का उपयोग कैसे कर सकते हैं? अनुमान है कि 2025 में दुनिया भर में हर दिन 463 एक्साबाइट डेटा प्रतिदिन बनेगा। अगर इतना डेटा बन रहा है, तो इसके लिए हमारी आगे की क्या योजना है? कई संगठन जो डिजिटल डेटा के दस्तावेजीकरण और संरक्षण पर काम कर रहे हैं, उनके लिए यह एक चुनौती भी है। इसके बारे में थोड़ी बात करेंगे। इससे हमें क्या लाभ है? यह जानने के लिए हमें यह देखना होगा कि डेटा के माध्यम से हम तत्काल सूचना का प्रसार कर सकते हैं और सही सूचना को खोज सकते हैं। आज की तारीख में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे ग्रोक काफी प्रसिद्ध हो रहा है। इससे पहले चैट GPT था। भविष्य में और भी कई आएंगे। क्योंकि आज के समय में डेटा डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध है। टूल्स के माध्यम से हम डेटा को अत्यधिक खोज सकते हैं, उसका विश्लेषण कर सकते हैं। लेकिन इसमें डर एक ही बात का है कि अगर पब्लिक डोमेन में जो डेटा है, उसकी प्रामाणिकता कितनी है? अगर वह डेटा प्रामाणिक नहीं होगा, तो कोई भी आर्टिफिशियल टूल सही परिणाम नहीं दे पाएगा। क्योंकि उसके पास विवेक नहीं है। विवेक केवल मनुष्यों में है। यह हमें समझना होगा।”

उन्होंने डिजिटल डेटा के लाभ और चुनौतियों पर कहा, “जो भी डिजिटल डेटा हम बना रहे हैं, उसमें संशोधन की बहुत सुविधा है। आज जितने भी मैन्यूस्क्रिप्ट हम बनाते हैं, उसे आसानी से एडिट करके पब्लिश करते हैं। सोशल मीडिया में अधिकतम लोग इसका उपयोग कर ही रहे हैं। अलग-अलग मीडिया के बीच एकीकरण का लाभ यह है कि हम ऑडियो को विजुअल के साथ, विजुअल को ऑडियो के साथ, टेक्स्ट के साथ एकीकृत कर सकते हैं। यह इस माध्यम में संभव है। जब भी हम इसकी कॉपी करते हैं, यह लॉसलेस कॉपी होती है। डेटा में तो कुछ न कुछ जेनरेशन लॉस होता है, लेकिन यह एकमात्र ऐसी मीडिया है, जिसमें जेनरेशन लॉस नहीं होता। तो ये इसके लाभ हैं। लेकिन इसकी कुछ चुनौतियां भी हैं, जिन्हें हमें समझने की जरूरत है। क्योंकि जब भी हम डेटा को सुरक्षित रखते हैं, तो उसे किसी न किसी फॉर्मेट में रखते हैं। कई बार यह फॉर्मेट किसी निजी कंपनी की संपत्ति होता है। इसलिए वह डेटा कितने दिन तक सुरक्षित रहेगा, यह उस कंपनी के समर्थन पर निर्भर करता है। दूसरा, डिजिटल मीडिया का जो माध्यम है, जिसमें हम स्टोर करते हैं, वह भी सीमित है। हमें याद है कि 15-20 साल पहले फ्लॉपी डिस्क होती थीं, फिर डीवीडी आईं। ये सारी मीडिया खत्म होती गईं। अब खत्म होती जा रही हैं। इस संबंध में हमें डेटा को नए-नए प्लेटफॉर्म पर कॉपी करना एक सतत प्रक्रिया है। तीसरी जो आवश्यकता है, वह सॉफ्टवेयर की है। इसका प्रचलन हो रहा है। यह चैलेंज केवल हमारे लिए नहीं, पूरे विश्व के लिए है। इसीलिए विश्व भर के वैज्ञानिक इसके ऊपर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “हमें भारत सरकार के लिए ऑडियो-विजुअल आर्काइव पर काम करने का मौका मिला। इस ऑडियो-विजुअल आर्काइव के लिए हमने यह कोशिश की कि इस डेटा को जो स्टैंडर्ड 2012 में बने थे – ISO 16363, जो ट्रस्टेड डिजिटल रिपॉजिटरी को परिभाषित करते हैं – उसके आधार पर संरक्षित करें। यह मानक भविष्य में आने वाले खतरों का अनुमान लगाता है और उन्हें बचाने के तरीके सुझाता है। इस तरह के प्रयास के बावजूद, हमने इस प्रोजेक्ट में कोशिश की कि जो ऑडियो-विजुअल डेटा आप सबके घरों में है – पुराने टेप में, पुराने वीडियो में, पुराने कैसेट में – जो धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है, उसे बचाया जाए। हमें यह खुशी है कि यह दुनिया की पहली सर्टिफाइड ट्रस्टेड डिजिटल रिपॉजिटरी बनी। अभी भी दुनिया में यह एकमात्र रिपॉजिटरी है, जो ISO सर्टिफाइड है। इसकी बहुत जरूरत है कि जितनी भी रिपॉजिटरी हम बनाएं, उसके साथ अपने डेटा को सुरक्षित करें, ताकि हम अगली पीढ़ी तक इसे पहुंचा सकें। हमारे पास जो है, वह 1500 साल पुराना है, 2000 साल पुराना है। जो ऑडियो-विजुअल है, वह 100 साल पुराना है। लेकिन जो डिजिटल डेटा हम आज बना रहे हैं, क्या 10 साल बाद भी हम उसे एक्सेस कर पाएंगे? यह सवाल है। हम किस तरह से अपने डिजिटल डेटा को ऐसी रिपॉजिटरी में रख सकें, जिससे अगली पीढ़ी को यह दे सकें?”

और अंत के निष्कर्ष में उन्होंने कहा- “भारतीय ज्ञान परंपराएं गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से आज भी संरक्षित हैं। यह जीवन को संपूर्णता में समझाने का एकमात्र विधान है। आधुनिकता समसामयिक तकनीक और ज्ञान के माध्यम से जीवन जीने की पद्धति है। दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि परस्पर विरोधी। समय-समय पर नई तकनीक आती है, जो हमारी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर देती है। आवश्यकता है कि हम तकनीक के गुणों को समझें और उसे अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाएं। तभी हम एक विकसित राष्ट्र की परिकल्पना कर सकते हैं।”

Topics: वैदिक हेरिटेजवैदिक हेरिटेज पोर्टलGurukul TraditionगुरुकुलमDigital Preservationडिजिटल मीडिया भारतपरंपरा और आधुनिकताप्रतापानंद झागीत गोविंद डिजिटलISO 16363 IndiaTrusted Digital Repositoryगुरु-शिष्य परंपराडिजिटल मीडियाभारतीय ज्ञानसंस्कृत ग्रंथभारतीय ज्ञान परंपरा
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

‘भारतीय ज्ञान का श्रुति-संवाद’ : पारंपरिक ज्ञान बना आधुनिक शिक्षा का हिस्सा

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री दत्तात्रेय होसबाले। साथ में हैं डॉ. अतुल कोठारी (दाएं) और अन्य अतिथि

‘आत्मविश्वासी और उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण से भारत होगा विकसित’

कार्यक्रम के मंच पर बैठे वक्ता

‘ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले को गुरु कहते हैं’

गुरु पूर्णिमा पर विशेष :  सर्वज्ञ वेदव्यास

गुरु पूर्णिमा : त्याग, तप और तेज का प्रतिनिधि भगवा ध्वज

सांस्कृतिक विस्मृति का निवारण करना ही भारत बोध

Load More

ताज़ा समाचार

23 अगस्त का पंचांग

आज का पंचांग: रविवार को बन रहे खास योग, जानें ग्रह स्थिति, लग्नारंभ समय, दिशाशूल

आज का इतिहास

23 अगस्त का इतिहास: चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से मोबाइल सेवा की शुरुआत तक, जानें इस दिन की प्रमुख घटनाएं

रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो)

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ सुनवाई 23 सितंबर को

जनसांख्यिकी परिवर्तन (चित्र प्रतीकात्मक)

यूरोप का जनसांख्यिकीय चौराहा: आंकड़ों के पीछे छिपता जनसांख्यिकीय परिवर्तन

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

हिमाचल: कांग्रेस सरकार ने विश्वविद्यालय से जुड़े मामले पर नहीं बुलाई बैठक,  हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, 5 लाख का जुर्माना

झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन

‘कपड़े फाड़े, दुपट्टा खींचा’, झारखंड में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली छात्राओं का पुलिस पर गंभीर आरोप

Rahul Gandhi

पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम में छात्रों को पैसे बांटने का आरोप, मुख्यमंत्री ने कहा-छानबीन की जाएगी

बहुआयामी वीर सावरकर

बहुआयामी वीर सावरकर की लिपि-दृष्टि

अमित शाह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री

‘चिकन नेक’ की सुरक्षा को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने की बैठक, घुसपैठ रोकने काे बनेगा त्रिस्तरीय सुरक्षा तंत्र

पूज्य सतगुरु लाल दास महाराज के 51वाँ निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

संतों का मार्गदर्शन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा, देवभूमि की पवित्रता बनाए रखना प्राथमिकता : सीएम धामी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies