'राणा सांगा ने बाबर को बुलाया' : बयान पर अड़े सुमन, माफी से किया इंकार
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माफी का सवाल ही नहीं : अपने बयान पर अड़े रामजी लाल सुमन, फिर दोहराया- ‘राणा सांगा ने ही बाबर को बुलाया’

सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने अपने विवादित बयान को फिर दोहराया और कहा- माफी मांगने का कोई प्रश्न नहीं उठता

Written byShivam DixitShivam Dixit
Mar 28, 2025, 12:19 am IST
in भारत, उत्तर प्रदेश
सपा सांसद रामजी लाल सुमन (फाइल फोटो)

सपा सांसद रामजी लाल सुमन (फाइल फोटो)

आगरा । आगरा। वीर शिरोमणि राणा सांगा को लेकर समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन द्वारा दिए गए बयान पर देशभर में आक्रोश की लहर है। सुमन से माफ़ी की मांग को लेकर कई स्थानों पर जोरदार प्रदर्शन हुए, जिसके चलते समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी बैकफुट पर आना पड़ा है।

हालांकि, इन विरोध प्रदर्शनों और आलोचनाओं के बावजूद रामजी लाल सुमन अपने रुख पर कायम हैं। गुरुवार को उन्होंने एक बार फिर अपने बयान को दोहराते हुए माफ़ी मांगने से साफ इनकार कर दिया।

गुरुवार को रामजी लाल सुमन ने एक बार फिर साफ किया कि उन्होंने राणा सांगा को लेकर कोई गलत या अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। सुमन ने कहा कि उनका बयान ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है, न कि किसी की भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से दिया गया था।

सपा सांसद ने अपने बयान को दोहराते हुए कहा- “राणा सांगा ने ही बाबर को इब्राहिम लोदी को हराने के लिए हिंदुस्तान बुलाया था। मेरा बयान ऐतिहासिक संदर्भ में था। मैं सामाजिक सद्भाव का पक्षधर हूं और इसी भावना के साथ राजनीति करता आया हूं। माफी मांगने का कोई प्रश्न नहीं उठता।”

क्या है पूरा विवाद

बीते दिनों समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में एक ऐसा बयान दे डाला, जिसने इतिहास के महान योद्धा राणा सांगा के बलिदान और शौर्य को अपमानित कर दिया। राज्यसभा में उपसभापति को संबोधित करते हुए सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा- “भाजपा का तकियाकलाम है कि मुसलमानों में बाबर का डीएनए है। लेकिन हिंदुस्तान का मुसलमान बाबर को आदर्श नहीं मानता, वह मोहम्मद साहब और सूफी संतों को मानता है। बाबर को भारत कौन लाया.? राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को बुलाया था। अगर मुसलमान बाबर की औलाद हैं, तो तुम गद्दार राणा सांगा की औलाद हो”।

सपा सांसद के इस बयान के बाद पूरे सदन में शोर मच गया। वहीं उपसभापति हरिवंश ने नाराजगी जताते हुए संसदीय मर्यादा का पालन करने की हिदायत दी, लेकिन सुमन के शब्दों ने पहले ही आग लगा दी थी।

अब जानिए बाबर को भारत में किसने बुलाया..?

बाबर को भारत में बुलाने वाला दौलत खान लोदी था। उस समय दौलत खान लोदी पंजाब का सूबेदार था और उसने इब्राहिम लोदी, जो दिल्ली सल्तनत का सुल्तान था, के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया था। इब्राहिम लोदी की बढ़ती ताकत और अपने प्रभाव को कम होते देख दौलत खान ने बाबर से मदद मांगी। उस समय बाबर काबुल का शासक था और उसने इस अवसर का फायदा उठाया। इसके बाद ही बाबर ने 1526 में भारत पर आक्रमण किया, जिसके परिणामस्वरूप पानीपत की पहली लड़ाई हुई। इस लड़ाई में उसने इब्राहिम लोदी को हराकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी।

अब जानिए वीर शिरोमणी राणा सांगा के शौर्य की अमर गाथा

राणा सांगा, जिनका पूरा नाम महाराणा संग्राम सिंह था, मेवाड़ के सिसोदिया वंश के एक महान शासक थे, जिन्होंने 1508 से 1528 तक शासन किया। वे न केवल राजपूतों के एकीकरण के प्रतीक थे, बल्कि विदेशी आक्रांताओं और सुल्तानों के खिलाफ उनके संघर्ष ने उन्हें इतिहास में अमर कर दिया।

राणा सांगा ने अपने जीवन में 18 बड़े युद्ध लड़े और अपने शरीर पर 80 से अधिक घाव खाए, फिर भी कभी हार नहीं मानी। उनकी वीरता का सबसे बड़ा प्रमाण बाबर के साथ 1527 में हुआ खानवा का युद्ध है।

राणा सांगा का संघर्ष सिर्फ बाबर तक सीमित नहीं था। उन्होंने दिल्ली सल्तनत के सिकंदर खान लोदी, गुजरात के सुल्तान महमूद बेगड़ा और मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी जैसे शक्तिशाली आक्रान्ताओं को भी हराया था। एक आंख, एक हाथ और एक पैर खोने के बावजूद वे युद्धभूमि में डटे रहे, जो उनके अदम्य साहस को दर्शाता है।

बार-बार बलिदान का अपमान कर रहे सपा सांसद

समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन द्वारा अपने बयान पर अड़े रहना, न केवल वीर शिरोमणी राणा सांगा के बलिदान का अपमान है, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य को भी तोड़ता-मरोड़ता है, जिसमें उन्होंने भारत की अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

बरहाल सपा सांसद के बयान से राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्माया हुआ है। वहीं अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व इस मसले पर अगला कदम क्या उठाता है, क्योंकि रामजी लाल सुमन अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वहीं कई सामाजिक संगठन सपा सांसद के बयान का विरोध जताते हुए माफ़ी की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं।

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अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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