लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सार्वजनिक मंच से विपक्ष और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजनीति से ऊपर उठकर बेटियों के सम्मान की रक्षा करने का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने सपा प्रमुख को अपने कार्यकर्ताओं की भाषा मर्यादित रखने की नसीहत दी।
इसके साथ ही उन्होंने बहराइच में महाराजा सुहेलदेव के ऐतिहासिक गौरव, आजमगढ़ के बदले हुए नैरेटिव और भारत के इतिहास की उन भूलों का भी स्मरण कराया, जिसके कारण विदेशी आक्रांताओं ने इस पावन धरा को नुकसान पहुँचाया था।
“बेटी सबकी बेटी होती है, अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सरकार और उनके समर्थकों की भाषा शैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उनके मन में बेटियों के प्रति अगाध सम्मान है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ी हों। उन्होंने अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ हुई अभद्र टिप्पणी का उल्लेख करते हुए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा-
“बेटी का हमेशा सम्मान होना चाहिए। पिछले दिनों मैंने देखा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ कुछ लोगों ने गलत और अमर्यादित टिप्पणियां की थीं। जैसे ही यह विषय मेरे संज्ञान में आया, मैंने तत्काल पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मामले में तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करो। बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। बेटी तो बेटी होती है! हम सब उस सनातन संस्कार में पले-बढ़े हैं, जहाँ कहा जाता है— ‘गांव की बेटी, सबकी बेटी’।”
अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा-
“अखिलेश जी, आप दूसरों को तो बड़े उपदेश देते हो, कभी अपने चेले-चपाटों को भी थोड़ा उपदेश दे दो कि वे अपनी जुबान और भाषा को संयमित कर लें। दूसरों पर उंगली उठाने से पहले स्वयं सोचना चाहिए कि आपके लोग किस प्रकार की स्तरहीन भाषा का प्रयोग करते हैं। अपने लोगों को संस्कारित करें, उन्हें समझाएं; और अगर आपसे वे नहीं संभल रहे, तो उन्हें हमारे हवाले कर दें, हम संभाल लेंगे।”
बहराइच और आजमगढ़ का बदला नैरेटिव: गुलामी के प्रतीक स्वीकार नहीं
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक और राष्ट्रवाद आधारित पुनरुत्थान का जिक्र करते हुए बहराइच और आजमगढ़ का उदाहरण सामने रखा:
- सालार मसूद नहीं, महाराजा सुहेलदेव का गौरव: सीएम योगी ने कहा कि पहले बहराइच में विदेशी आक्रांता सालार मसूद और गाजी मियां के नाम पर आयोजन थोंपे जाते थे। हमने स्पष्ट कह दिया कि यह नया भारत है, यहाँ गाजी के नाम पर नहीं, बल्कि राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव के नाम पर भव्य आयोजन होगा। नया भारत गुलामी के किसी भी प्रतीक को स्वीकार नहीं करेगा। आज बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनकर पूरी गरिमा के साथ खड़ा है।
- आजमगढ़ के कलंक से मुक्ति: आजमगढ़ के अतीत पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पावन धरा आखिर क्यों अपनी सकारात्मक पहचान की मोहताज हुई थी? क्यों पूर्व की सरकारों में हर बड़ी आतंकी घटना में आजमगढ़ के संजरपुर का नाम सामने आता था? क्यों इस ऐतिहासिक भूमि को बार-बार बदनाम किया गया? इसका कारण केवल एक था— तत्कालीन स्वार्थी और संकीर्ण सोच वाली सरकारें, जो अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए यहाँ के भोले-भाले युवाओं को गुमराह कर उनका इस्तेमाल करती थीं।
“जब-जब हम जाति और परिवारवाद में बंटे, तब-तब हारे”
मुख्यमंत्री ने इतिहास के पन्नों को खोलते हुए समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर न बंटने की कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने भारत के गौरव और पराजय की ऐतिहासिक कड़ियों को इस प्रकार सामने रखा-
| ऐतिहासिक महानायक / कालखंड | इतिहास का सच और राष्ट्र को संदेश |
|---|---|
| राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव | उन्होंने अपनी संगठित शक्ति के बल पर विदेशी आक्रांताओं को नाकों चने चबवा दिए थे, उन्हें पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था। उनके डर से कोई आक्रांता भारत की तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं करता था। |
| विभाजन और पराजय का दौर | जैसे ही हम आपस में बंटे— जाति, क्षेत्र, भाषा और परिवारवाद के जाल में फंसे, वैसे ही परिणाम घातक हुए। महाराजा सुहेलदेव के बाद देश बंटा और मोहम्मद गोरी का क्रूर हमला हुआ। |
| महाराज पृथ्वीराज चौहान | वीर पृथ्वीराज चौहान ने उस कायर आक्रांता गोरी को हर बार युद्ध के मैदान में परास्त किया। परंतु जैसे ही हमसे एक चूक हुई, उसने धोखे से पृथ्वीराज जी को बंधक बना लिया। यह इतिहास हमारे सामने गवाह है। |
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भावुक अपील करते हुए कहा कि हम वही गलतियां बार-बार दोहराते रहे, जिन ऐतिहासिक भूलों का परिमार्जन आज से ठीक एक हजार वर्ष पहले अकेले महाराजा सुहेलदेव ने संगठित समाज के बल पर किया था।
दुर्भाग्यवश, उनके बाद की पीढ़ियां उनसे वह आवश्यक प्रेरणा नहीं ले पाईं।
आज समय आ गया है कि हम जाति और परिवारवाद की संकीर्ण बेड़ियों को तोड़कर राष्ट्रवाद के पथ पर एकजुट हों, क्योंकि संगठित समाज ही समर्थ और सुरक्षित भारत का एकमात्र आधार है।
















