वन्यजीवों की सुरक्षा में तकनीक: नया युग, नई उम्मीदें वन्यजीव संरक्षण में तकनीकी नवाचार की बढ़ती भूमिका
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वन्यजीवों की सुरक्षा में तकनीक: नया युग, नई उम्मीदें वन्यजीव संरक्षण में तकनीकी नवाचार की बढ़ती भूमिका

वन्य जीव धरती के पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न अंग हैं, जो जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन मानवीय गतिविधियों, जलवायु परिवर्तन और अवैध शिकार के कारण वन्य जीवों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है।

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल
Mar 3, 2025, 12:22 pm IST
inभारत
विश्व वन्यजीव दिवस

विश्व वन्यजीव दिवस

प्रदूषिण वातावरण और प्रकृति के बदलते मिजाज के कारण जीव-जंतुओं तथा वनस्पतियों की अनेक प्रजातियों के अस्तित्व पर अब विश्वभर में संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वन्य जीव धरती के पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न अंग हैं, जो जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन मानवीय गतिविधियों, जलवायु परिवर्तन और अवैध शिकार के कारण वन्य जीवों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की ‘लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट’ में भी यह चौंकाने वाला चिंताजनक खुलासा हो चुका है कि पूरी दुनिया में वन्यजीवों की आबादी तेजी से घट रही है और पिछले पांच दशकों में लैटिन अमेरिका तथा कैरेबियन क्षेत्रों में वन्यजीव आबादी में नब्बे फीसद से भी ज्यादा की गिरावट आई है, अफ्रीका और एशिया में भी यह गिरावट बहुत ज्यादा दर्ज हुई है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के भीतर तो वन्यजीव आबादी चौंका देने वाली दर से घट रही है। ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन ऑफ नेचर’ (आईयूसीएन) की रिपोर्ट में भी बताया जा चुका है कि दुनियाभर में वन्यजीवों तथा वनस्पतियों की हजारों प्रजातियां संकट में हैं और आने वाले समय में इनकी धरती से गायब होने की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है।

धरती पर वन्यजीवों के अस्तित्व पर मंडराते संकट को लेकर शोधकर्ताओं का कहना है कि अधिकांश प्रजातियां मानव शिकार के कारण लुप्त हुई हैं जबकि कुछ अन्य कारणों में दूसरे जानवरों का हमला तथा बीमारी शामिल हैं। वन्य जीवों की अनेक प्रजातियां जिस प्रकार दुनियाभर में धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं, उसी के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसम्बर 2013 को अपने 68वें सत्र में 3 मार्च के दिन को ‘विश्व वन्यजीव दिवस’ (वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे) के रूप में अपनाए जाने की घोषणा की थी। दुनिया के जंगली जीवों और वनस्पतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा विश्व वन्यजीव दिवस के आयोजन का निर्णय लिया गया था और तभी से प्रतिवर्ष 3 मार्च को यह दिवस मनाया जाता है। विश्व वन्यजीव दिवस प्रतिवर्ष एक खास विषय के साथ मनाया जाता है और इस वर्ष यह दिवस ‘वन्यजीव संरक्षण वित्त: लोगों और ग्रह में निवेश’ थीम के तहत मनाया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि हम वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी और स्थायी रूप से वित्तपोषित करने के लिए कैसे मिलकर काम कर सकते हैं और लोगों तथा ग्रह दोनों के लिए एक लचीला भविष्य बना सकते हैं।

तकनीकी नवाचार ने अनुसंधान, संचार, ट्रैकिंग, डीएनए विश्लेषण और वन्यजीव संरक्षण के कई अन्य पहलुओं को आसान, अधिक कुशल और सटीक बना दिया है। ‘वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (साइट्स) की महासचिव इवोन हिगुएरो का कहना है कि डिजिटल नवाचार हमारी अमूल्य जैव विविधता की सुरक्षा के तरीके को बदल रहा है। उन्नत ट्रैकिंग सिस्टम, वास्तविक समय डेटा विश्लेषण और एआई संचालित समाधान दुनियाभर में संरक्षणवादियों को वन्यजीवों की पहचान, निगरानी, ट्रैक और अंततः संरक्षण में मदद करने के लिए अभूतपूर्व उपकरणों के साथ सशक्त बना रहे हैं। विभिन्न मोबाइल एप अब सैंकड़ों की संख्या में भी बाघों की विभिन्न प्रजातियों के बीच अंतर बताने में अब हमें आसानी से सक्षम बना रहे हैं। समुद्री कछुओं के घोंसले के स्थानों का पता लगाने के लिए ड्रोन हमें बड़े क्षेत्रों में घूमने में मदद कर रहे हैं। इवोन हिगुएरो के मुताबिक जैसे-जैसे हम अपनी बढ़ती तकनीकी क्षमताओं का लाभ उठाते हैं, हमें सतत विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं को भी पुनर्जीवित करना चाहिए। उनके मुताबिक इलैक्ट्रॉनिक ‘साइट्स’ अनुमति प्रणालियां जानवरों और पौधों के अवैध व्यापार में धोखाधड़ी को रोकने में मदद कर रही हैं।

बहरहाल, वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियों को शिकारियों से बचाने के लिए ‘डब्ल्यूडब्ल्यूएफ’ अब प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ साझेदारी से ड्रोन से लेकर इन्फ्रारेड कैमरों तक हर चीज का उपयोग करके वन्यजीव अपराध से निपटने के लिए ऐसे अभिनव तरीके विकसित करने में जुटा है, जिससे रात के अंधेरे में भी आसानी से शिकारियों का पता लगाया जा सके। वेब-आधारित प्लेटफार्मों के माध्यम से अवैध वन्यजीव उत्पादों के व्यापार से निपटने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने ऑनलाइन व्यापार के लिए एक मानकीकृत वन्यजीव नीति ढ़ांचे को अपनाने हेतु ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया कम्पनियों के साथ भी मिलकर काम किया है। ‘डब्ल्यूडब्ल्यूएफ’ का कहना है कि दुनियाभर में प्रजातियों के विलुप्त होने की वर्तमान दर के पीछे मनुष्य का हाथ है, जो प्रकृति की अपेक्षा से कम से कम 100 से 1000 गुना अधिक है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ समृद्ध और विविध पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करने में पिछले करीब छह दशकों से जुटा है और कुछ जगहों पर इसके प्रयासों के कुछ सकारात्मक नतीजे भी सामने आए हैं लेकिन फिर भी जिस तेजी से वन्यजीवों की अनेक प्रजतियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है, वह बेहद चिंतनीय है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की रिपोर्ट में बताया जा चुका है कि हाथी दांत के लिए हाथियों की अवैध हत्या से उनकी वैश्विक आबादी नष्ट हो रही है। अनुमान के मुताबिक शिकारी प्रतिवर्ष उनके दांतों के लिए ही करीब 20 हजार हाथियों की हत्या कर देते हैं।

जहां तक वन्य जीवों के संरक्षण में तकनीक की भूमिका की बात है तो वन्य जीवों की निगरानी, अवैध गतिविधियों पर नज़र रखने तथा वन्य जीवों के संरक्षण के प्रयासों को बेहतर बनाने में ड्रोन, जीपीएस ट्रैकिंग, कैमरा ट्रैपिंग, डीएनए विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी विभिन्न तकनीकें अब महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ये तकनीकें वन्य जीवों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका तो निभा ही सकती हैं, साथ ही वन्य जीव संरक्षण के प्रयासों को बेहतर बनाने में भी प्रभावी साबित हो सकती हैं। वन्य जीव संरक्षण में विभिन्न प्रकार की तकनीकों का इस्तेमाल उनकी बेहतर निगरानी और सटीक संख्या का सटीक अनुमान लगाने में मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा अवैध शिकार तथा अन्य अवैध गतिविधियों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने में भी मदद मिल रही है। ड्रोन तकनीक एक ओर जहां शिकारियों और अवैध गतिविधियों पर नज़र रखने में बेहद प्रभावी है, वहीं ड्रोन वन्य जीवों की निगरानी, उनकी संख्या के वास्तविक अनुमान तथा उनके प्रवास मार्गों का पता लगाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इसी प्रकार जीपीएस ट्रैकिंग उपकरणों के जरिये अब वन्य जीवों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सकती है, जिससे वैज्ञानिकों को उनके आवास और भोजन के साथ प्रजनन व्यवहार को समझने में भी मदद मिल रही है। आधुनिक युग की सबसे महत्वपूर्ण खोज साबित हो रही वन्य जीवों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने का एक अन्य प्रभावी तकनीक है कैमरा ट्रैपिंग, जो उनकी सटीक संख्या, उनकी गतिविधियों और उनके व्यवहार का अध्ययन करने में सहायक है। एआई तकनीक तो वन्य जीव संरक्षण के लिहाज से बेहद उपयोगी मानी जा सकती है। एआई के जरिये किए जाने वाला डेटा विश्लेषण अवैध गतिविधियों का पता लगाने के साथ वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। डीएनए विश्लेषण तकनीक वन्य जीवों की प्रजातियों की पहचान, उनकी आनुवंशिक विविधता और उनके संबंधों का अध्ययन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए वन्यजीव संरक्षण रणनीति बनाने में मददगार है।

पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर मंडराते संकट का सीधा असर भविष्य में पैदावार, खाद्य उत्पादन इत्यादि पर पड़ना तय है, जिससे पूरा इको सिस्टम बुरी तरह प्रभावित होगा। पर्यावरणविदों के मुताबिक जिस प्रकार जंगलों में अतिक्रमण, कटान, बढ़ते प्रदूषण तथा पर्यटन के नाम पर गैर जरूरी गतिविधयों के कारण पूरी दुनिया में वन्य जीवों पर संकट मंडरा रहा है, वह पर्यावरण संतुलन बिगड़ने का साफ संकेत है और यदि इसमें सुधार के लिए शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में बड़े नुकसान के तौर पर इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। हालांकि वन्य जीव संरक्षण में आधुनिक युग की विभिन्न तकनीकें क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं, तकनीक के उपयोग से वन्यजीवों की निगरानी, उनकी सुरक्षा और उनके आवासों के संरक्षण में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है लेकिन प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए वन्य जीवों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण के लिए दुनिया के तमाम देशों को अपने-अपने स्तर पर अन्य गंभीर प्रयास करने की भी सख्त आवश्यकता है। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए तकनीक के इस्तेमाल के साथ ही वन्यजीव तस्करों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए भी दुनिया के तमाम देशों को एकजुट होकर गंभीर प्रयास करने की जरूरत है।

Topics: World Wildlife Day 2025world wildlife day theme 2025how to celebrate world wildlife dayWorld Wildlife Conservation Dayविश्व वन्यजीव दिवसWorld Wildlife Day
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