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दर्द बाकी है आज भी

दिल्ली में 2020 में दंगों के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में आआपा के तत्कालीन निगम पार्षद ताहिर हुसैन का नाम सामने आया था। उसके ऊपर दंगों के लिए फंडिंग करने का भी आरोप था

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु'
Feb 4, 2025, 09:39 am IST
in विश्लेषण, दिल्ली
मजहबी उन्मादियों द्वारा की गई आगजनी (फाइल फोटो)

मजहबी उन्मादियों द्वारा की गई आगजनी (फाइल फोटो)

सर्वोच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आआपा) के पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को 28 जनवरी को दिल्ली चुनाव प्रचार के लिए 6 दिन की सशर्त कस्टडी पैरोल दी है। ताहिर इस बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम से मुस्तफाबाद सीट से उम्मीदवार हैं। हालांकि शीर्ष अदालत ने 20 जनवरी को जेल में बंद दिल्ली दंगों में आरोपी ताहिर हुसैन की चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत की मांग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, ”ऐसे सभी लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगनी चाहिए।” ताहिर हुसैन से पहले आआपा के नेता अरविन्द केजरीवाल को भी लोकसभा चुनावों में प्रचार के लिए जमानत मिली थी।

कौन है ताहिर हुसैन?

ताहिर हुसैन साल 2017 के एमसीडी चुनाव में आआपा के टिकट पर जीता था। दिल्ली दंगे 2020 के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में ताहिर हुसैन का नाम सामने आया। इसके ऊपर दंगों के लिए फंडिंग करने का भी आरोप था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली की चांद बाग पुलिस चौकी के पास स्थित ताहिर हुसैन के घर की छत पर पत्थर, पेट्रोल बम इकट्ठे करके रखे गए थे।

हिन्दू बस्तियों के अन्दर तक हमले करने के लिए उसकी छत पर एक बड़ी गुलेल भी लगाई गई थी। चांदबाग में हुए दंगों के दौरान ताहिर हुसैन का घर दंगा भड़काने का केंद्र बना हुआ था। वह आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का मुख्य आरोपी है। अब वह रिहा होकर अपना चुनाव प्रचार कर रहा है। ताहिर ने दंगों में अपनी लाइसेंसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया था। पुलिस के अनुसार, हुसैन ने दंगों से ठीक एक दिन पहले खजूरी खास पुलिस स्टेशन में जमा अपनी पिस्टल निकलवाई थी जो जांच के दौरान पुलिस ने जब्त की थी।

आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि हिंसा के समय ताहिर अपने घर की छत पर था और उसकी वजह से ही हिंसा भड़की थी। ताहिर के मामले में न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने कहा, ”ताहिर की याचिका स्वीकार करने से एक नई प्रथा शुरू हो जाएगी। विचाराधीन कैदी चुनाव में खड़े हो जाएंगे और चुनाव लड़ने और प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मांगेंगे।”

कहानी 2020 के दंगों की

नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 के पारित होने के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया गया। इन विरोध प्रदर्शनों की आड़ में 23, 24 और 25 फरवरी 2020 के दौरान दिल्ली के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सुनियोजित दंगे कराए गए।

दिल्ली के जाफराबाद, सीलमपुर, भजनपुरा, ज्योति नगर, करावल नगर, खजूरी खास, गोकुलपुरी, दयालपुर और न्यू उस्मानपुर समेत 11 पुलिस स्टेशन के इलाकों में मजहबी उन्मादियों ने जमकर उत्पात मचाया था। इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। करोड़ों की संपत्ति जलकर खाक हो गई थी। दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस ने कुल 758 एफआईआर दर्ज की थीं।

संयोग था या प्रयोग

जिस दौरान दंगे भड़काए गए, उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत में थे और दुनिया भर का मीडिया भारत में जमा था। ताहिर हुसैन, उमर खालिद, शरजील इमाम, खालिद सैफी और अन्य उन्मादियों द्वारा साजिश रची गई। दिल्ली पुलिस ने न्यायालय में दाखिल अपने आरोप पत्र में कहा है, ”ट्रंप के दौरे के दौरान भारत को बदनाम करने के लिए ताहिर हुसैन, उमर खालिद ने दंगों की साजिश रची थी। आरोप पत्र के मुताबिक उमर खालिद ने वैश्विक प्रचार के लिए डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान दिल्ली दंगें की साजिश रची थी।

साजिश का उद्देश्य था षड्यंत्र, आंतक एवं सांप्रदायिक हिंसा के इस्तेमाल से एक वैध रूप से चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकना। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय में भी यह कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ शाहीन बाग में चल रहा प्रदर्शन सहज स्पूर्त या स्वतंत्र आंदोलन नहीं था। पुलिस के अनुसार, पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया (पीएफआई) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया (एसडीपीआई) शाहीन बाग और विभिन्न स्थानों पर हुए धरनों को शह दे रही थीं।

मिश्रित आबादी वाला इलाका है उत्तर-पूर्वी दिल्ली

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू और मुस्लिमों की मिश्रित आबादी है। इन दंगों का एक उद्देश्य हिंदुओं को इस क्षेत्र से भागने के लिए मजबूर करके क्षेत्र की जनसांख्यिकी को बदलना भी था। हिंदू-मुस्लिम मुहल्लों की सीमा पर रणनीतिक तौर पर सीएए विरोधी टेंट लगाए गए थे। इस षड्यंत्र का खुलासा दिल्ली पुलिस की जांच से हुआ। दंगा भड़कने से पहले ताहिर हुसैन, फैजल फारुकी, सफूरा जरगर, मीरान हैदर, आसिफ इकबाल, इशरत जहां, खालिद सैफी, शरजील इमाम, गुलिस्ता फातिमा, शफी-उर-रहमान, नताशा नरवाल, देवांगना कलीता पर किसी ने भी संदेह नहीं किया था।

दंगों की जांच के दौरान नताशा नरवाल और देवांगना कलिता का नाम प्रमुखता से सामने आया था। दोनों पर दंगे कराने की साजिश रचने का आरोप है। उनके तार ‘इंडिया अगेंस्ट हेट’ गुट और उमर खालिद से जुड़े पाए गए थे। इसके अलावा कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) के कई पदाधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया था। इस संगठन को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

जख्म… जो भर नहीं सकते

  • खजूरी खास निवासी आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की 25 फरवरी को बर्बरता से हत्या कर दी गई थी। उनका शव तीन दिन बाद नाले में मिला था। इस मामले में ताहिर हुसैन मुख्य आरोपी है।
  • रतन लाल दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल के रूप में कार्यरत थे। 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली के गोकुल पुरी इलाके में हुई हिंसा को नियंत्रित करने की कोशिश के दौरान उन्हें गोली मार दी गई थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी और 13, 10 और 8 साल के तीन
    बच्चे हैं।
  • दिलबर सिंह नेगी हिंसा के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक शिव विहार में एक मिठाई की दुकान पर काम करते थे। 25 फरवरी को वह उपद्रवियों से बचने के लिए गोदाम में छिपे थे। तभी दंगाई अंदर घुस आए। उन्होंने पहले उनके शरीर के अंगों को काटा फिर गोदाम में आग लगा दी।
  • नितिन कुमार सरकारी स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र था। 26 फरवरी को वह चाऊमीन खरीदने गया था। आधे घंटे बाद उसके पिता को उसके परिवार के सदस्य का फोन आया और कहा गया कि नितिन नहीं मिल रहा है। स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि पुलिस घायलों को जीटीबी अस्पताल ले गई है। जब नितिन के पिता जीटीबी अस्पताल पहुंचे तो नितिन की सांसें चल रही थीं, लेकिन कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
  • 26 वर्षीय राहुल सोलंकी सिविल इंजीनियर थे। उनके परिवार ने बताया कि 24 फरवरी की शाम करीब 5:30 बजे वे पास की डेयरी से दूध लेने के लिए निकले थे, उनके जाने के 15 से 20 मिनट के भीतर खबर मिली कि उन्हें गोली मार दी गई है। इससे पहले कि वे अस्पताल पहुंच पाते, सोलंकी की मृत्यु हो गई।
  • 51 वर्षीय विनोद एक पेशेवर डिस्क जॉकी (डीजे) थे। 24 फरवरी को रात करीब 10:00 बजे वह और उनका बेटा 25 वर्षीय नितिन कुमार पास की दुकान से दवा खरीदने के लिए मोटरसाइकिल पर घर से निकले, रास्ते में नितिन को एक पत्थर लगा और वे अपने वाहन से गिर गए। जल्द ही उन्हें दंगाइयों की भीड़ ने घेर लिया और लाठियों और पत्थरों से लैस मजहबी उन्मादियों ने उन पर हमला कर दिया, जब भीड़ चली गई, तो स्थानीय लोग उन्हें लेकर अस्पताल गए जहां कुछ घंटे बाद उनकी मौत हो गई।
  • 23 वर्षीय राहुल बृजपुरी में रहता था जहां वह कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। वह यह देखने के लिए अपने घर से बाहर निकला कि क्या हो रहा है, कुछ ही मिनटों में उसके सीने में गोली मार दी गई।
  • 45 वर्षीय वीरभान 27 फरवरी को अपने बेटे के साथ मोटरसाइकिल पर काम से घर लौट रहे थे, वह मौजपुर में जींस और अन्य कपड़े बनाने वाली एक फैक्ट्री में काम करते थे। गोली लगने से वह शिव विहार के पास अपनी बाइक पर गिर पड़े। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले वीरभान पिछले 5 वर्षों से उत्तर पूर्वी दिल्ली में रह रहे थे, उनके परिवार में उनकी पत्नी, 22 वर्षीय बेटा और 15 वर्षीय बेटी है।
  • 27 वर्षीय प्रेम सिंह अपनी गर्भवती पत्नी और तीन बेटियों के साथ बृजपुरी इलाके में किराए के मकान में रहते थे। वे उत्तर प्रदेश के कासगंज के रहने वाले थे और 5 साल से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रिक्शा चालक के रूप में काम कर रहे थे। 25 फरवरी को काम के लिए घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। उनके पड़ोसियों ने जीटीबी अस्पताल के शवगृह में उनके शव की पहचान की।
Topics: इंडिया अगेंस्ट हेटदिल्ली दंगें की साजिशIndia Against Hateconspiracy of Delhi riotsDelhi RiotsआआपाAAPदिल्ली दंगेदिल्ली विधानसभा चुनावDelhi Assembly Electionsपाञ्चजन्य विशेष
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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