Mahakumbh: प्रयागराज। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के कुशल निर्देशन एवं उत्तर प्रदेश राज्य के कर्मठ, जुझारू, सनातन धर्म के प्रचार- प्रसार के लिए कटिबद्ध योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में प्रयागराज की आध्यात्मिक, धार्मिक, पुण्य धरती पर आयोजित विश्व के सबसे बड़े महाकुंभ मेले में आए हुए सभी धर्म, जाति के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था को देखकर संपूर्ण विश्व हैरान है।
खगोलीय गणना के अनुसार, 144 वर्ष बाद आयोजित भारत का महाकुंभ मेला विश्व भर की मीडिया, राजनीतिज्ञों, धर्माचार्यो के आकर्षण बहस का केंद्र बिंदु बना हुआ है। प्रयागराज की धरती पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण, साफ- सुथरी भूमि पर पर्यावरणीय शुद्धता, पवित्र स्नान, पदयात्रा, विश्राम आदि की सम्पूर्ण जिम्मेदारी स्वच्छता के अग्रदूत (सफाई कर्मियों) की है। जिनकी सेवाओं के आगे नतमस्तक होकर भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2019 के प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में सफाईकर्मी प्यारेलाल, नरेश कुमार, चौबी, होरीलाल, ज्योति मेहतर का पांव पखार कर पूरे विश्व को यह संदेश दिया कि स्वच्छता अग्रदूत ही कुंभ मेले जैसे विशाल आयोजन के असली हीरो है। इनके बिना इतना बड़ा आयोजन हो ही नही सकता। इस अवसर पर उन्होंने कहा था कि मैंने सफाई कर्मियों के पैर धोकर अपनी कृतज्ञता दिखाई है, उन सबके पैर धोने के बाद जो संतोष मिला वह मेरे जीवन का यादगार अनुभव हो गया।
144 वर्ष बाद तीर्थराज प्रयाग की स्वच्छ, अविरल, निर्मल प्रवाहित गंगा, यमुना, सरस्वती (अदृश्य) की जलधाराओं से युक्त त्रिवेणी की पवित्र भूमि पर आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले के विशाल संगम तट को स्वच्छ, सुंदर, प्रदूषण मुक्त बनाने व कुंभ यात्रियों को अधिक से अधिक सुविधा उपलब्ध करने के लिए, ‘स्वच्छ महाकुंभ’ की सुंदरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 15 हजार स्वच्छता अग्रदूत (सफाई कर्मियों) को तैनात किया है।
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महाकुंभ मेला परिक्षेत्र के अंतर्गत 1500 गंगा सेवादारों द्वारा स्वच्छता के साथ-साथ मेला परिक्षेत्र प्लास्टिक मुक्त किया जा रहा है। ये स्वच्छता के नायक दिन-रात मेला क्षेत्र को साफ़-सुथरा रखने के लिए कड़ी मेहनत और लगन से काम कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त सफाई मित्र, नाविक आज सभी एक साथ मिलकर महाकुंभ की स्वच्छता को सुनिश्चित कर रहे हैं और तीर्थ यात्रियों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। जो संपूर्ण विश्व के लिए नजीर है।
ये लोग सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफ़ाई, कचरे का व्यवस्थित निपटान, कीटाणुनाशकों का छिड़काव, तीर्थयात्रा मार्गों से मलबा हटाना, प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने के लिए दिन रात काम कर रहे हैं, ताकि यह महाकुंभ निर्विघ्नता के साथ अपने ऊंचाइयों को प्राप्त कर सके।
मेला क्षेत्र में 1.5 लाख शौचालय, 25,000 कूड़ेदान
कचरे को इकट्ठा करने के लिए जीपीएस से लैस 120 टिपर वैन और 40 कॉम्पैक्टर ट्रक की व्यवस्था की गई है। साथ ही
शौचालय की स्वच्छता के लिए जेट स्प्रे क्लीनिंग सिस्टम की भी व्यवस्था की गई है, जिसको स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी इन्हीं स्वच्छता के नायकों की है। मेला क्षेत्र में 1.5 लाख शौचालय और 25,000 कूड़ेदान भी लगाए गए हैं। हमारे देश में धार्मिक व्रत, पर्व- त्यौहार का सामाजिक जीवन में बड़ा महत्व है। जिसमें महाकुंभ का विशेष स्थान है। हमारे वैदिक ग्रंथों में महाकुंभ को अमरत्व का मेला माना गया है। जहां मानव को दिव्य, अलौकिक, आध्यात्मिक, धार्मिक अनुभूति के साथ साथ पुण्य फल प्राप्त होते हैं।
वैदिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के पश्चात अमृत से भरा कुंभ को स्वर्ग पहुंचने में 12 दिन लगा था, स्वर्ग का एक दिन पृथ्वी के 12 महीने के बराबर होता है, जिसके कारण प्रत्येक 12 साल में पूर्ण कुंभ का आयोजन प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन के प्रवाहित नदियों के तट पर होता है। खगोलशास्त्र के अनुसार- 11 डिग्री अक्षांश पर ऊर्जा सीधा ऊपर की ओर जाती है, जहां पर स्नान, ध्यान करने से मानव के मन-मस्तिष्क, शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
वर्ष 2025 आध्यात्मिक, धार्मिक व वैज्ञानिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति का एक विशेष आकाशीय संरेखण 144 वर्ष के बाद हो रहा है। इसलिए तीर्थराज प्रयाग की पवित्र भूमि पर प्रवाहित गंगा, यमुना, अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर आयोजित महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालु स्नान, ध्यान, दर्शन, पूजन, अर्चन कर रहे हैं। साथ ही लाखों श्रद्धालु कल्पवास कर शारीरिक शुद्धि, पूजन व भजन मोक्ष प्राप्ति की कामना से कर रहे हैं।
आध्यात्मिक ग्रंथों में महाकुंभ को सनातन धर्म के प्रचार- प्रसार का माध्यम माना गया है, जिसका प्रतिनिधित्व साधु, संत, संन्यासी, सिद्ध, महात्मा, नागा, अघोरी, शैव व वैष्णव साधक करते हैं। महाकुंभ के पर्व पर जब स्वच्छता की बात आती है, तो यही स्वच्छता अग्रदूतों (सफाई कर्मियों) खड़े नजर आते हैं, जिनकी वजह से इतना विशाल पवित्र मेला अपनी पूर्णता को प्राप्त करता है।

















